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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   BAMS graduates will now also gain admission to IITs permission granted to appear for GATE-27 in Varanasi

आयुर्वेद से आईआईटी तक: अब बीएएमएस स्नातकों को भी मिलेगा प्रवेश, गेट-27 में शामिल होने की मिली अनुमति

Fri, 11 Sep 2026 04:52 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Fri, 11 Sep 2026 04:52 PM IST
सार

आईआईटी में अब बीएएमएस स्नातकों को भी प्रवेश मिलेगा। फरवरी 2027 में आईआईटी मद्रास की ओर से गेट-2027 का आयोजन किया जा रहा है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

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BAMS graduates will now also gain admission to IITs permission granted to appear for GATE-27 in Varanasi
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Freepik

विस्तार

देश के तकनीकी संस्थानों के दरवाजे अब आयुर्वेद के स्नातकों के लिए भी खुल गए हैं। बीएएमएस (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) डिग्री धारक छात्र-छात्राएं भी अब ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (गेट-2027) के माध्यम से आईआईटी और अन्य प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश पा सकेंगे। 

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नीति आयोग ने इसकी मंजूरी दे दी है। बीएचयू आयुर्वेद संकाय के रसशास्त्र विभाग के प्रो. आनंद चौधरी ने बताया कि बीएएमएस के विद्यार्थी अपने चौथे वर्ष में गेट-2027 की परीक्षा में शामिल हो सकेंगे और इन परीक्षाओं में प्राप्त अंकों के आधार पर आगामी तीन शैक्षणिक सत्रों तक प्रवेश के पात्र होंगे। 
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फरवरी 2027 में आईआईटी मद्रास की ओर से गेट-2027 का आयोजन किया जा रहा है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रो. चौधरी ने आईआईटी मद्रास को पत्र लिखकर गेट 2027 की सूचना पुस्तिका में केंद्र सरकार और संबंधित हितधारकों द्वारा लिए गए निर्णयों के अनुरूप बीएएमएस स्नातकों की पात्रता को स्पष्ट रूप से प्रकाशित करने की अपील की है। 
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प्रो. आनंद चौधरी के मुताबिक बीएएमएस, नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन एक्ट 2020 के अंतर्गत विनियमित एक वैधानिक व्यावसायिक योग्यता है। संकाय प्रमुख प्रो. केएन मूर्ति ने इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री की भारतीय ज्ञान संवर्धन योजनाओं का मूर्त रूप बताते हुए इसके लिए आभार व्यक्त किया है। 

कहा कि अंतर्विषयी शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा वर्तमान समय में उच्च शिक्षा में ‘’इंडियन नॉलेज सिस्टम’’ और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान व प्रौद्योगिकी के साथ समन्वयित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस बदलाव से उचित शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले आयुर्वेद स्नातक जैव-चिकित्सा विज्ञान, जैव-प्रौद्योगिकी, सार्वजनिक स्वास्थ्य, फार्मास्युटिकल साइंसेज, डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अन्य उभरते क्षेत्रों में शोध कर महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगे।

उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान की संभावनाओं को समझने में मिलेगी सहायता
प्रो. आनंद चौधरी ने आईआईटी मद्रास के रजिस्ट्रार को संबोधित पत्र में कहा है कि कई उम्मीदवार केवल इस कारण आवेदन करने से वंचित रह सकते हैं क्योंकि उन्हें यह स्पष्ट नहीं होता कि उनकी स्नातक डिग्री संबंधित पेपर के लिए स्वीकार्य है या नहीं। दूसरी ओर, आवेदन की जांच और प्रवेश के चरण में पात्रता को लेकर उत्पन्न अस्पष्टता से अभ्यर्थियों और संस्थानों दोनों को कठिनाई हो सकती है। यह भी कहा है कि बीएएमएस की पात्रता के संबंध में स्पष्टता प्रदान करने से योग्य आयुर्वेद स्नातकों को राष्ट्रीय स्तर की उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान की संभावनाओं को समझने में सहायता मिलेगी।

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