गांधी को हिंदुओं का नेता तो कांग्रेस को हिंदुओं की पार्टी कहते थे जिन्ना- भाजपा सांसद
भारतीय किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व भाजपा के सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने ने मंगलवार को बलिया के सोनबरसा में अपने संसदीय कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने विपक्षी दलों पर जमकर हमला बोला।
उन्होंने कहा कि आजादी से पहले मोहम्मद अली जिन्ना, कांग्रेस को केवल हिंदुओं की पार्टी और महात्मा गांधी को हिंदुओं का नेता कहते थे। ठीक उसी तरह अब कांग्रेस, सपा, बसपा, वामदल, टीएमसी जैसी पार्टियां भाजपा को हिंदुओं की पार्टी और नरेंद्र मोदी-अमित शाह को हिंदुओं का नेता बता रही हैं।
वीरेंद्र सिंह मस्त ने कहा कि हमारी सरकार और हमारी पार्टी बार-बार कह रही है कि नागरिकता संशोधन बिल नागरिकता लेने का नहीं बल्कि नागरिकता देने का कानून है। लेकिन विरोधी दल देश के दुश्मनों के पैसे से कानून के खिलाफ आंदोलन चला रहे हैं। यह बात सोमवार को प्रमाणित तथ्यों के साथ देश के सामने आ गई है।
भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव से पहले कश्मीर से धारा 370 हटाने, अयोध्या में राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को क्रियान्वित कराने, नागरिकता संशोधन बिल को लेकर वादा किया था। इसी के आधार पर पार्टी को देश की जनता ने सरकार बनाने के लिए बहुमत दिया। अब इसे लागू करके हमने चुनावी घोषणा पत्र पर लोगों का भरोसा बढ़ाने की परंपरा की नींव डाली है।
हमने यह बताने का प्रयास किया है कि भाजपा जो कहती है वही करती है। कांग्रेस, सपा, बसपा, टीएमसी, वामदलों के लिए चुनावी घोषणा पत्र महज एक लफ्फाजी होता है, जिसे वे चुनाव के बाद भूल जाते हैं। अब उस पर हमने विराम लगा दिया है। यह हमारी भरोसे की राजनीति की परंपरा है।
उन्होंने कहा कि देश के बंटवारे के समय 23 प्रतिशत हिंदू पश्चिमी पाकिस्तान में, 28 प्रतिशत हिंदू पूर्वी पाकिस्तान (अब के बंगला देश) में थे। नौ प्रतिशत मुसलमान हिंदुस्तान में रह गए थे। आज पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी एक प्रतिशत व पूर्वी पाकिस्तान में डेढ़ प्रतिशत रह गई है। हमारे देश में मुसलमानों की संख्या बढ़कर 23 प्रतिशत हो गई है। ऐसा क्यों हुआ, इस पर नागरिकता संशोधन बिल का विरोध करने वाले दलों को जवाब देना होगा, वरना इस देश की जनता उन्हें माफ नहीं करेगी।
उन्होंने कहा कि जो हिंदू प्रताड़ित होकर भारत में शरण लेने के लिए आते हैं। उनमें 85 प्रतिशत दलित वर्ग से आते हैं। ऐसे में नागरिक संशोधन बिल के विरोध का मतलब ये विरोधी दल दलित विरोधी भी हैं। देश की जनता इनकी असलियत जान चुकी है, इनके चिखने-चिल्लाने व विरोध करने से अब कोई अंतर पड़ने वाला नहीं है।