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नई सोशल इंजीनियरिंग बनाने में जुटी बसपा, इन नेताओं के कारण पूर्वांचल में समीकरण बदले
जय नारायण सिंह यादव,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 01 Feb 2017 05:06 PM IST
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बसपा सुप्रीमो मायावती व अंबिका चौधरी
- फोटो : amar ujala
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कांग्रेस से गठबंधन के बाद सपा में आए दिन आ रहे बयान और टिकटों में बदलाव के बीच बसपा मुखिया मायावती ने नए तरीके की सोशल इंजीनियरिंग पर काम तेज कर दिया है।
2007 में सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर बहुमत हासिल करने वाली मायावती ने इसी के तहत सपा के पूर्व मंत्रियों अंबिका चौधरी और नारद राय के अलावा कौमी एकता दल के अंसारी बंधुओं के जरिए पूर्वांचल में सभी वर्गों के साधने की कोशिश की है।
बसपा ने भूमिहार, यादव और मुसलमानों के दिग्गज नेताओं को टिकट देकर पूर्वांचल के चुनावी समीकरण बदल दिए हैं।
पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के बसपा छोड़ने के बाद पार्टी में पिछड़ा वर्ग के किसी बड़े चेहरे की कमी महसूस हो रही थी, जो अंबिका के आने से कुछ हद तक दूर हो गई है।
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वाराणसी, आजमगढ़ और मिर्जापुर मंडल में 61 सीटें हैं। चर्चाएं हैं कि पिछड़ा, दलित और मुसलमानों के एक साथ आने पर पूर्वांचल के नतीजे अप्रत्याशित हो सकते हैं।
मायावती की मुसलमानों को लुभाने की सियासी रणनीति ही है कि वह चुनावी रैलियों की शुरुआत 28 फरवरी को मऊ से करेंगी।
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2007 में सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर बहुमत हासिल करने वाली मायावती ने इसी के तहत सपा के पूर्व मंत्रियों अंबिका चौधरी और नारद राय के अलावा कौमी एकता दल के अंसारी बंधुओं के जरिए पूर्वांचल में सभी वर्गों के साधने की कोशिश की है।
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बसपा ने भूमिहार, यादव और मुसलमानों के दिग्गज नेताओं को टिकट देकर पूर्वांचल के चुनावी समीकरण बदल दिए हैं।
पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के बसपा छोड़ने के बाद पार्टी में पिछड़ा वर्ग के किसी बड़े चेहरे की कमी महसूस हो रही थी, जो अंबिका के आने से कुछ हद तक दूर हो गई है।
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वाराणसी, आजमगढ़ और मिर्जापुर मंडल में 61 सीटें हैं। चर्चाएं हैं कि पिछड़ा, दलित और मुसलमानों के एक साथ आने पर पूर्वांचल के नतीजे अप्रत्याशित हो सकते हैं।
मायावती की मुसलमानों को लुभाने की सियासी रणनीति ही है कि वह चुनावी रैलियों की शुरुआत 28 फरवरी को मऊ से करेंगी।
सपा से रूठों ने बसपा प्रत्याशियों की नींद उड़ाई
सपा से रूठों ने बसपा प्रत्याशियों की नींद उड़ाई
सपा से रूठे नेताओं ने बसपा के पूर्व घोषित उम्मीदवारों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। सपा के पूर्व मंत्री और कद्दावर नेता अंबिका चौधरी एवं नारद राय के बसपा में शामिल होने तथा क्रमश: फेफना और बलिया सदर से टिकट मिलने के बाद यह पसोपेश और बढ़ गया है। 2012 में अंबिका चौधरी फेफना (बलिया) से सपा के टिकट पर चुनाव हार गए थे।
इस बीच सपा से टिकट कटने के बाद पूर्वांचल के कई सपा नेता बसपा के संपर्क में हैं।
गाजीपुर और वाराणसी के नाराज नेताओं की संख्या सबसे ज्यादा हैं।
सपा-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार घोषित होने और टिकट कटने से नाराज सपा नेताओं पर बसपा की खास नजर है। इसी क्रम में पार्टी गाजीपुर की जहूराबाद सीट पर अपना प्रत्याशी बदल सकती है।
इस बीच सपा से टिकट कटने के बाद पूर्वांचल के कई सपा नेता बसपा के संपर्क में हैं।
गाजीपुर और वाराणसी के नाराज नेताओं की संख्या सबसे ज्यादा हैं।
सपा-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार घोषित होने और टिकट कटने से नाराज सपा नेताओं पर बसपा की खास नजर है। इसी क्रम में पार्टी गाजीपुर की जहूराबाद सीट पर अपना प्रत्याशी बदल सकती है।