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Varanasi News: डेढ़ माह बाद एनआईसीयू से बाहर मां की गोद में आया बच्चा
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वाराणसी। बलिया निवासी जिस गर्भवती महिला का बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में सर्जरी और डिलीवरी साथ-साथ की गई थी, अब वह और उसका बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है। डेढ़ माह तक बीएचयू अस्पताल के एनआईसीयू में रहने के बाद बच्चा मां की गोद आया। महिला और उसकी मां ने डॉक्टरों का आभार जताया है।
बलिया जिले के बसारिखपुर निवासी महिला प्रतिमा गौड़ (28) को जनवरी के पहले सप्ताह में चोट लग गई थी। इसमें उसकी जांघ की हड्डी टूट गई थी। परिजन उसे छह जनवरी को बीएचयू ट्रॉमा सेंटर लेकर आए थे। ट्रॉमा सेंटर प्रभारी प्रो. सौरभ सिंह के निर्देशन में टीम ने महिला को भर्ती किया। एक ओर महिला को चोट से उबारना तो दूसरी तरफ उसकी डिलीवरी कर बच्चे को बचाने की चुनौती थी। चिकित्सकों ने 12 जनवरी को महिला का ऑपरेशन किया। करीब दो घंटे तक चली सर्जरी में पहले महिला की डिलीवरी कर नवजात की जान बचाई गई। इसके बाद टूटी जांघ की सर्जरी की गई। महिला को ट्रॉमा सेंटर से 19 जनवरी को डिस्चार्ज किया गया था लेकिन उसका बच्चा उसी दिन से प्रो अशोक कुमार की देखरेख में बीएचयू अस्पताल के एनआईसीयू में था। प्रो. सौरभ सिंह ने बताया कि महिला शनिवार को जांच के लिए आई थी। महिला अब फिट है।
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बलिया जिले के बसारिखपुर निवासी महिला प्रतिमा गौड़ (28) को जनवरी के पहले सप्ताह में चोट लग गई थी। इसमें उसकी जांघ की हड्डी टूट गई थी। परिजन उसे छह जनवरी को बीएचयू ट्रॉमा सेंटर लेकर आए थे। ट्रॉमा सेंटर प्रभारी प्रो. सौरभ सिंह के निर्देशन में टीम ने महिला को भर्ती किया। एक ओर महिला को चोट से उबारना तो दूसरी तरफ उसकी डिलीवरी कर बच्चे को बचाने की चुनौती थी। चिकित्सकों ने 12 जनवरी को महिला का ऑपरेशन किया। करीब दो घंटे तक चली सर्जरी में पहले महिला की डिलीवरी कर नवजात की जान बचाई गई। इसके बाद टूटी जांघ की सर्जरी की गई। महिला को ट्रॉमा सेंटर से 19 जनवरी को डिस्चार्ज किया गया था लेकिन उसका बच्चा उसी दिन से प्रो अशोक कुमार की देखरेख में बीएचयू अस्पताल के एनआईसीयू में था। प्रो. सौरभ सिंह ने बताया कि महिला शनिवार को जांच के लिए आई थी। महिला अब फिट है।
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