बाबा कालभैरव: रजत मुखौटा में दिए दर्शन, सवा लाख बत्तियों से उतारी आरती; चारों वेदों का हुआ पारायण
Varanasi News: भोग आरती के बाद बाबा को नवीन रजत मुखौटा धारण कराया गया। विविध सुगंधित फूलों से झांकी सजाकर विधिवत पूजन हुआ। फल, पकवान, मिष्ठान आदि का भोग लगा। इसके बाद मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए गए।
विस्तार
Varanasi News: काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव की नैयनाभिराम झांकी के दर्शन कर भक्त निहाल हुए। बाबा कालभैरव रजत मुखौटे से सजे थे। चारों वेदों का पारायण और सवा लाख बातियों से उनकी आरती उतारी गई। भोर से रात में शयन आरती तक दर्शन के लिए भीड़ उमड़ी रही। भजन गंगा में भक्त डूबे रहे।
सोमवार को कालभैरव मंदिर में बाबा के दर्शन भोर में मंगला आरती के बाद से ही शुरू हो गए। वार्षिक शृंगार महोत्सव पर महंत सुमित उपाध्याय के आचार्यत्व में दोपहर में शृंगार हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बाबा को पंचामृत स्नान स्नान कराकर उन्हें नवीन वस्त्र धारण कराया गया।
हर हर महादेव और बाबा के जयघोष के साथ दर्शन का सिलसिला शयन आरती तक चला। शाम को भक्तों की लंबी कतार लगी थी। बाहर के श्रद्धालुओं की भी काफी भीड़ रही। काशीवासियों के साथ ही दूर-दराज से आए दर्शनार्थियों ने भी बाबा के दिव्य स्वरूप का दर्शन कर धन्य हुए।
शाम को चारों वेदों की ऋचाओं के साथ बाबा की बसंत पूजा हुई। भजन संध्या में गायक पवन पांडेय के भजनों पर भक्त भक्तिरस में डूबे रहे। मध्यरात्रि में सवा लाख बत्तियों से बाबा की महाआरती हुई। वहीं, दोपहर से रात तक भंडारे में भक्तों की भीड़ रही। पूजन में पं. मनीष उपाध्याय, पं. पुनीत उपाध्याय आदि रहे।
देसी-विदेशी फूलों से निखरी आभा
बाबा कालभैरव के शृंगार के साथ देसी-विदेशी फूलों, कामिनी की पत्तियों और रंग-बिरंगे विद्युत झालरों से मंदिर परिसर की आभा निखर उठी। मंदिर तक आने वाले मार्गों को आकर्षक रोशनी और विद्युत झालर लगाए गए थे। इस दौरान मंदिर के पूर्व महंत स्व. प्रदीप नाथ उपाध्याय को श्रद्धांजलि दी गई।