जरूरतमंदों की सहायता में जुटी बीए की छात्रा, सैनिटाइजर और मास्क बनाकर दूर कर रही परेशानी
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में जहां सरकार भी लोगों से मदद मांगने में लगी हुई है, वहीं आदिवासी बहुल सोनभद्र जिले के बभनी ब्लॉक स्थित दरनखांड़ टोले (बभनी ग्राम पंचायत) की रहने वाली स्नातक की छात्रा दिव्या शर्मा ग्रामीणों को खुद का बना मास्क और सैनिटाइजर उपलब्ध कराकर दूसरों के लिए नजीर बन रही है।
पांच हजार की आबादी वाले बभनी ग्राम पंचायत की निवासी दिव्या के पिता किसान और मां सरिता शर्मा शिक्षामित्र हैं। बेहद ही सामान्य परिवार से होने के बावजूद लॉकडाउन के पहले दिन से ही दिव्या ने अपनी ग्राम पंचायत के साथ ही आसपास के गांवों में ग्रामीणों को मास्क और सैनिटाइजर बनाकर वितरित करने का बीड़ा उठाया हुआ है।
इसके लिए वह खुद मास्क तैयार कर रही है, वहीं घरेलू नुस्खों के जरिए सैनिटाइजर भी बना रही है। इसको वितरित करने के साथ ही लोगों को घर पर ही सैनिटाइजर कैसे बनाएं? इसका गुर सिखाने में भी लगी हुई है। कोराना की इस लड़ाई में ज्यादा से ज्यादा लोग आत्मनिर्भर हों, इस काम में वह अपने भाई प्रियांशु शर्मा, छोटी चचेरी बहन नव्या का भी सहयोग ले रही है।
उसके लिए सघन बस्ती, सार्वजनिक वितरण गल्ले की दुकानों पर पहुंच कर ग्रामीणों में सैनिटाइजर वितरित करना और जिनके पास मास्क नहीं है, उन्हें मास्क उपलब्ध कराना दिनचर्या बन गई है। बीए की पढ़ाई कर रही छात्रा दिव्या ने बताया कि उसने कौशल विकास योजना के तहत एक वर्षीय नर्सिंग कोर्स किया हुआ है। यहां से उसे कुछ करने की प्रेरणा मिली। वह घर में साफ-सफाई रखने के प्रति भी लोगों को जागरूक कर रही है।
यह है घरेलू सैनिटाइजर बनाने का नुस्खा
दिव्या ने बताया कि नीम के पत्ते, फिटकरी, तुलसी के पत्ते और कपूर मिलाकर सैनिटाइजर बनाया जा रहा है। यह औषधीय गुणों से युक्त होने के साथ ही पूरी तरह से कीटाणु नाशक है। ग्रामीण भी इसमें काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। कई परिवारों ने इसे खुद बनाकर उपयोग करना भी शुरू कर दिया है।
दिव्या के अनुसार 10 लीटर पानी, तीन किलोग्राम नीम व एक किलोग्राम तुलसी की पत्तियां, 250 ग्राम फिटकरी,100 ग्राम कपूर और 10 पीस छोटी इलायची मिलाकर खौला देते हैं। खौलते-खौलते जब लगभग छह लीटर बचता है, तब इसको छानकर शीशी में भर देती है। अब तक दिव्या अपनी बहन स्नेहा शर्मा की मदद से करीब दो सौ लोगों में इसे वितरित कर चुकी हैं। पिता श्याम सुंदर शर्मा और मां सरिता शर्मा भी इस कार्य में सहयोग करते हैं।