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आजमगढ़ में डॉक्टरों ने किया ऐसा शर्मनाक काम कि मानवता हो गई तारतार

Wed, 20 Sep 2017 06:28 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Wed, 20 Sep 2017 06:28 PM IST
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Azamagrh doctors do shameful work with patient
बदबू के कारण पास जाने से कतरा रहे चिकित्सक-कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला
यूपी के आजमगढ़ जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने मानवता को शर्मशार करने वाला कृत्य किया है। सेप्टिक से पीड़ित एक अर्द्घविक्षिप्त युवक के पास जाने से डॉक्टरों ने मना कर दिया। और तो और उसे बाहर फिंकवाने के लिए कूड़ा गाड़ी भी मंगाने की कोशिश की गई। लेकिन नगर पालिका ने इस अमानवीय काम में साथ देने से साफ इंकार कर दिया।
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वजह थी कि सेप्टिक की वजह से सड़ गए दोनों पैर और एक हाथ से आने वाली बदबू। पांच दिन पहले अस्पताल आए युवक को एक कमरे में बंद कर दिया गया है। कमरे में उसे खाना पहुंचा दिया जाता है, लेकिन न तो उसकी मरहम पट्टी हो रही और न ही उसे दवा दी जा रही है।  
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उक्त 28 वर्षीय अर्द्घविक्षिप्त युवक को 108 एंबुलेंस ने पांच दिन पहले कंधरापुर क्षेत्र से लाकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जब युवक अस्पताल में आया तो इसके दोनों पैर और एक हाथ सेप्टिक की चपेट में थे और बुरी तरह बदबू आ रही थी।
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पहले दिन चिकित्सकों ने घाव को साफ कर इसकी मरहम पट्टी की और अस्पताल के एक कमरे में बंद कर दिया। तबसे लेकर आज तक इसकी पट्टी को दोबारा बदलने की जहमत नहीं उठाई गई।  इस बीच अगर कमरे का दरवाजा खुला रह गया तो यह युवक पूरे अस्पताल में घूमने लगता है।

फिर इसे पकड़कर कमरे में बंद कर दिया जाता है। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एसके तिवारी ने कहा कि मुझे इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। वैसे ऐसा होना तो नहीं चाहिए लेकिन मैं इस संबंध में जानकारी करता हूं। अगर ऐसा हुआ है तो गलत हुआ है।

अस्पताल प्रशासन के हाथ पैर फूले

Azamagrh doctors do shameful work with patient
आजमगढ़ जिला अस्पताल का कुछ ऐसा है हाल - फोटो : अमर उजाला
25 और 26 सितंबर को जिले के नोडल अधिकारी प्रमुख सचिव आलोक कुमार के आजमगढ़ आगमन की संभावना है। इसे देखते हुए अस्पताल प्रशासन के हाथ पैर फूले हुए हैं। वह इस युवक से छुटकारा पाना चाहता है।

इसके लिए जिला अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने उक्त युवक को वहां से हटाने के लिए नगरपालिका ईओ को फोन कर वाहन की मांग की। लेकिन नगर पालिका ने कूड़ा गाड़ी देने से मना कर दिया।   ईओ नगरपालिका दिनेश कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि जिला अस्पताल से मेरे मोबाइल पर फोन आया था।

उनके द्वारा गाड़ी की मांग की जा रही थी। लेकिन हमने उनसे कह दिया कि नगरपालिका के पास कूड़ा उठाने वाली गाड़ी है। इसके बाद बात खत्म हो गई। अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक  डा. जीएल केशरवानी ने कहा कि    मरीज की हालत काफी टिपीकल है। वह जहां रहता है वहीं पर गंदगी करता है।

जिसके कारण अस्पताल में तैनात कर्मचारी और मरीज उसे यहां से हटाने के लिए कह रहे हैं। रही बात नगरपालिका से गाड़ी की मांग करने की तो वह मैंने अस्पताल से कूड़ा हटाने के लिए गाड़ी की मांग की थी। 
 
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