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Varanasi News: 75 साल में नहीं खोजी जा सकीं नई आयुर्वेदिक दवाएं, BHU में आयुष मंत्रालय के सचिव ने कही बड़ी बात

Thu, 22 Feb 2024 03:34 PM IST
प्रगति चंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: प्रगति चंद Updated Thu, 22 Feb 2024 03:34 PM IST
सार

बीएचयू के आयुर्वेद संकाय में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि भारत के अन्य आयुर्वेद विश्वविद्यालयों की तुलना में बीएचयू शिक्षक, इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं में ज्यादा संपन्न है। ऐसे में शोध, शिक्षण और चिकित्सा को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

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Ayush Ministry secretary said new ayurved medicines could not be discovered
Rajesh Kotecha - फोटो : कार्यक्रम को सम्बोधित करते वक्ता

विस्तार

बीएचयू आयुर्वेद संकाय में दो दिनी राष्ट्रीय संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति की महत्ता पर चर्चा कर इसे बढ़ावा देने का संकल्प लिया। मुख्य अतिथि आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि चिंता की बात यह है कि 75 साल में कोई भी नई आयुर्वेदिक औषधियां नहीं खोजी जा सकी हैं। वर्तमान में आयुष और आईसीएमआर के सहयोग से शोध के लिए एक इंटीग्रेशन सेंटर खोलने की तैयारी चल रही है। छह साल यानी 2030 तक तीन और 2047 तक यानी तेईस साल (2024 से 2047) में दस नई औषधियां विकसित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।

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आईएमएस बीएचयू केएन उडुप्पा सभागार में सचिव ने शिक्षकों, छात्रों से संवाद में कहा कि देश में अब तक 10 हजार वेलनेस सेंटर खुल चुके हैं। आयुर्वेद के चिकित्सक को आयुर्वेद की ही दवा करना चाहिए, तभी वैद्य को समाज में सबसे ज्यादा प्रतिष्ठा मिल सकती है। अब तक 43 हजार शोध का प्रकाशन देश भर में हो चुका है। कोरोना काल में भी आयुष औषधियां अधिक प्रभावी दिखीं। 
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कहा कि आईएलबीएस और आयुष मंत्रालय के सहयोग से पंचकर्म पर शोध चल रहा है। जिसमें घृतपान के बाद मल का परीक्षण करने पर सकारात्मक परिणाम देखने को मिला है। शोध के लिए खोले जाने वाले इंटीग्रेशन सेंटर के प्रयास से आयुर्वेद का अमृत काल 5 प्रतिशत जीडीपी को प्राप्त कर सकता है। कहा कि आयुर्वेद के प्रति लोगों का विश्वास ही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक 100 बार मन की बात में 34 बार आयुष का नाम लिया। 2024 में सबसे अधिक आयुष से जुड़े 8 लोगों को पद्मश्री मिला है।

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आयुर्वेद में जल्द लागू होगी एनईपी

वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि आयुष मंत्रालय की ओर से एनीमिया उन्मूलन को लेकर विशेष अभियान चलाया जाएगा। आयुष एवं जनजाति मंत्रालय ने एक लाख लोगों पर सर्वे करने के लिए हस्ताक्षर किया है। एनसीआईएम के माध्यम से जल्द ही नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को लागू करने का प्रयास है। बीएचयू पर कहा कि 100 फैकल्टी के सदस्य और इतने बड़े संस्थान में 150 बेड नहीं बल्कि 500 बेड का आयुर्वेद अस्पताल होना चाहिए। आयुष मंत्रालय हर स्तर पर सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

पांच प्रतिशत लोगों को पड़ती है सर्जरी की जरूरत
बीएचयू आयुर्वेद संकाय के पूर्व निदेशक प्रो. मनोरंजन साहू ने कहा कि भारत के अन्य आयुर्वेद विश्वविद्यालयों की तुलना में बीएचयू शिक्षक, इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं में ज्यादा संपन्न है। ऐसे में शोध, शिक्षण और चिकित्सा को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। खास बात यह है कि बवासीर के केवल 5 प्रतिशत मरीजों को ही सर्जरी की जरूरत होती है, बाकी 95 प्रतिशत दवा से ठीक हो जाते हैं। आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने आयुर्वेद संकाय को देश के संस्थानों के लिए रोल मॉडल बनाने के लिए प्रेरित किया।

सम्मेलन में बनाएंगे तीन दशक का बनाएंगे रोड मैप
संकाय प्रमुख प्रो. पीके गोस्वामी ने कहा कि सम्मेलन में तीन दशक के लिए आयुर्वेद चिकित्सा को लेकर संकाय की ओर से एक रोड मैप तैयार करवाया जाएगा। ताकि आयुर्वेदिक चिकित्सा शिक्षा और शोध को जन-जन तक पहुंचाया जा सके। प्रो. केएन मूर्ति, पीएस ब्याडगी, डॉ. ममता तिवारी ने भी अपनी बात रखी। संचालन डॉ. वंदना वर्मा, डॉ. देवानंद उपाध्याय, धन्यवाद प्रो. चंद्रशेखर पांडेय ने किया। इस दौरान प्रो. आनंद चौधरी, वैद्य सुशील दूबे, प्रो. बी राम, प्रो. एम पालीवाल, प्रो. वाईबी त्रिपाठी मौजूद रहे।
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