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शाम को खाया जलेबी, रात में गूंजी कजरी, सुहागिन महिलाएं आज रखेंगी कजरी तीज
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कजरी तीज का व्रत रखने की पूर्व संध्या पर सुहागिनों ने जलेबा खाया। इसके बाद रतजगा भी हुआ। इस दौरान शहर से गांव तक कजरी की तान गूंजती रही। ढोलक-झाल संग महिलाओं ने घरों में ही एकजुट होकर पूरी रात नृत्य-संगीत किया। बुधवार को कजरी तीज मनाई जाएगी।
मंगलवार की सुबह से ही दुकानों पर जलेबा बनाए जाने की तैयारियां शुरू हो गईं, शाम होते ही शहर के सभी इलाकों में जलेबा की दुकानें भी सज गईं। कजरी तीज के दिन सुबह 5.57 बजे तक धृति योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस योग में किया गया सभी शुभ कार्य सफल एवं शुभ फलदायी होता है। इस व्रत को करने से सुहागिनों को पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि-आरोग्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
पूजन का शुभ मुहूर्त
काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी के अनुसार कजरी तीज का व्रत भाद्र पद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर रखा जाता है। भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 24 अगस्त की शाम 4:05 से शुरू हो कर 25 अगस्त को शाम 4:18 तक रहेगी। ऐसे में कजरी तीज का व्रत 25 अगस्त को रखा जाएगा।
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इस तरह करें कजरी तीज में पूजन
सुबह नित्य क्रिया से निवृत्त होकर महिलाएं भगवान शिव और माता गौरी की मिट्टी की मूर्ति बना लें। इस मूर्ति को चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाकर स्थापित करें। इसके बाद सविधि शिव-गौरी का पूजन करें। माता गौरी को सुहाग के सोलह शृंगार की सामग्री अर्पित करें। वहीं भगवान शिव को बेल पत्र, गाय का दूध, गंगा जल, धतूरा, भांग आदि चढ़ाएं।
चंद्रोदय के बाद करें पारण
पूरे दिन व्रत रखने और शाम को पूजन करने के बाद चंद्रमा का दर्शन करने के बाद व्रती महिलाएं व्रत का पारण करेंगी। कजरी तीज के दिन जौ, गेहूं, चना, चावल के सत्तू में घी और मेवा मिलाकर तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं।
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मंगलवार की सुबह से ही दुकानों पर जलेबा बनाए जाने की तैयारियां शुरू हो गईं, शाम होते ही शहर के सभी इलाकों में जलेबा की दुकानें भी सज गईं। कजरी तीज के दिन सुबह 5.57 बजे तक धृति योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस योग में किया गया सभी शुभ कार्य सफल एवं शुभ फलदायी होता है। इस व्रत को करने से सुहागिनों को पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि-आरोग्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
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पूजन का शुभ मुहूर्त
काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी के अनुसार कजरी तीज का व्रत भाद्र पद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर रखा जाता है। भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 24 अगस्त की शाम 4:05 से शुरू हो कर 25 अगस्त को शाम 4:18 तक रहेगी। ऐसे में कजरी तीज का व्रत 25 अगस्त को रखा जाएगा।
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इस तरह करें कजरी तीज में पूजन
सुबह नित्य क्रिया से निवृत्त होकर महिलाएं भगवान शिव और माता गौरी की मिट्टी की मूर्ति बना लें। इस मूर्ति को चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाकर स्थापित करें। इसके बाद सविधि शिव-गौरी का पूजन करें। माता गौरी को सुहाग के सोलह शृंगार की सामग्री अर्पित करें। वहीं भगवान शिव को बेल पत्र, गाय का दूध, गंगा जल, धतूरा, भांग आदि चढ़ाएं।
चंद्रोदय के बाद करें पारण
पूरे दिन व्रत रखने और शाम को पूजन करने के बाद चंद्रमा का दर्शन करने के बाद व्रती महिलाएं व्रत का पारण करेंगी। कजरी तीज के दिन जौ, गेहूं, चना, चावल के सत्तू में घी और मेवा मिलाकर तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं।