{"_id":"5b769bfc42c79224d813e9c9","slug":"atal-bihari-vajpayee-scolding-former-mla-in-varanasi","type":"story","status":"publish","title_hn":"बनारस की इस पूर्व विधायक को पड़ी थी अटल जी की डांट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बनारस की इस पूर्व विधायक को पड़ी थी अटल जी की डांट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 17 Aug 2018 03:27 PM IST
विज्ञापन
पूर्व विधायक ज्योत्सना श्रीवास्तव
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बनारस से कई अनुभव जुड़े हैं। इनमें से कुछ खट्टे तो कुछ मीठे है। अपने सौम्य स्वभाव के लिए अटल बिहारी वाजपेयी जाने जाते थे, लेकिन एक किस्सा ऐसा भी है जिसमें अटल बिहारी ने बनारस से विधायक रहीं ज्योत्सना श्रीवास्तव को डांट दिया था।
पूर्व विधायक ज्योत्सना श्रीवास्तव ने बताया कि 1989 में पहली बार कैंट विधानसभा से चुनाव लड़ रही थी। कलराज मिश्र ने फोन कर नामांकन करने के लिए कहा था। नामांकन के बाद मैं प्रचार में लग गई। उसी दौरान वाजपेयी बनारस आए। लोहता स्टेशन पर ट्रेन के इंतजार में बैठे थे। उनसे मुलाकात की तो वह नाराज हो गए।
उन्होंने डांटते हुए कहा कि तुमने किससे पूछकर नामांकन किया। इस पर मैंने बताया कि कलराज मिश्र के कहने पर किया। वह बिना बोले चले गए। मैं जीत गई। 1991 में फिर चुनाव लड़ने को कहा। इस बार भी मेरी जीत हुई थी। बाद में पता चला कि उनकी डांट जीतने की मेहनत करने के लिए थी।
विज्ञापन
ज्योत्सना ने बताया कि आपातकाल के दौरान वाजपेयी वाराणसी आए थे। कार्यकर्ता खाने की व्यवस्था करना भूल गए थे। पति उन्हें लेकर घर आ गए। मैं घर पर नहीं थी। पति ने टेलीफोन कर घर बुलाया और कहा कि आठ बजे के बाद वाजपेयी खाना नहीं खाते हैं। मैं साढ़े सात बजे घर पहुंची जल्दी जल्दी दाल, चावल और सब्जी बनाकर दी।
विज्ञापन
पूर्व विधायक ज्योत्सना श्रीवास्तव ने बताया कि 1989 में पहली बार कैंट विधानसभा से चुनाव लड़ रही थी। कलराज मिश्र ने फोन कर नामांकन करने के लिए कहा था। नामांकन के बाद मैं प्रचार में लग गई। उसी दौरान वाजपेयी बनारस आए। लोहता स्टेशन पर ट्रेन के इंतजार में बैठे थे। उनसे मुलाकात की तो वह नाराज हो गए।
विज्ञापन
उन्होंने डांटते हुए कहा कि तुमने किससे पूछकर नामांकन किया। इस पर मैंने बताया कि कलराज मिश्र के कहने पर किया। वह बिना बोले चले गए। मैं जीत गई। 1991 में फिर चुनाव लड़ने को कहा। इस बार भी मेरी जीत हुई थी। बाद में पता चला कि उनकी डांट जीतने की मेहनत करने के लिए थी।
विज्ञापन
ज्योत्सना ने बताया कि आपातकाल के दौरान वाजपेयी वाराणसी आए थे। कार्यकर्ता खाने की व्यवस्था करना भूल गए थे। पति उन्हें लेकर घर आ गए। मैं घर पर नहीं थी। पति ने टेलीफोन कर घर बुलाया और कहा कि आठ बजे के बाद वाजपेयी खाना नहीं खाते हैं। मैं साढ़े सात बजे घर पहुंची जल्दी जल्दी दाल, चावल और सब्जी बनाकर दी।