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इमामबाड़े में 72 ताबूत की जियारत कर अश्कबार हुईं आंखें
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कर्बला के शहीदों की याद में सरैयां स्थित इमामबाड़े पर 72 ताबूत सजाए गए। जायरीन ने ताबूतों की जियारत की और शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की। सबसे छोटे शहीद छह महीने के अली असगर का ताबूत देखकर हर किसी की आंखें नम हो उठीं। कोरोना प्रोटोकॉल के अनुसार जुलूस तो नहीं उठा लेकिन अलम और दुलदुल की जियारत हुई।
रविवार को 26वीं मुहर्रम की सुबह सरैयां स्थित सदर इमामबाड़े में कर्बला के 72 शहीदों की याद में ताबूत की जियारत करने जायरीन पहुंचे। सुबह से शाम 10 घंटे तक चले आयोजन में कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार ताबूतों की जियारत की गई। इस दौरान 72 ताबूत की जियारत करके हर किसी की आंखें अश्कबार हो उठीं। जुलूस नहीं निकाले गए, लेकिन जियारत के लिए ताबूत सजाए गए। 72 ताबूतों को सजाकर इस साल केवल जियारत के लिए रखा गया जिस पर शहर भर से आए अकीदतमंदों ने फूल चढ़ाए।
बच्चे, बुजुर्ग, महिलाओं और युवा भी शहीदाने कर्बला की जियारत करने पहुंचते रहे। इमामबाड़े पर अंजुमन आबिदिया एवं मोमेनीन ए बनारस की ओर से कर्बला के 72 शहीदों की याद में 72 ताबूत सजाए गए। करीब 1300 साल पहले कर्बला में इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों को यजीद के फौजियों ने शहीद कर दिया था। ताबूत के आयोजन में शामिल रिजवी, वजीर हसन, सज्जाद अली, दुलारे हसन और जाफर इमाम ने सहयोग किया।
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रविवार को 26वीं मुहर्रम की सुबह सरैयां स्थित सदर इमामबाड़े में कर्बला के 72 शहीदों की याद में ताबूत की जियारत करने जायरीन पहुंचे। सुबह से शाम 10 घंटे तक चले आयोजन में कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार ताबूतों की जियारत की गई। इस दौरान 72 ताबूत की जियारत करके हर किसी की आंखें अश्कबार हो उठीं। जुलूस नहीं निकाले गए, लेकिन जियारत के लिए ताबूत सजाए गए। 72 ताबूतों को सजाकर इस साल केवल जियारत के लिए रखा गया जिस पर शहर भर से आए अकीदतमंदों ने फूल चढ़ाए।
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बच्चे, बुजुर्ग, महिलाओं और युवा भी शहीदाने कर्बला की जियारत करने पहुंचते रहे। इमामबाड़े पर अंजुमन आबिदिया एवं मोमेनीन ए बनारस की ओर से कर्बला के 72 शहीदों की याद में 72 ताबूत सजाए गए। करीब 1300 साल पहले कर्बला में इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों को यजीद के फौजियों ने शहीद कर दिया था। ताबूत के आयोजन में शामिल रिजवी, वजीर हसन, सज्जाद अली, दुलारे हसन और जाफर इमाम ने सहयोग किया।
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