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Varanasi News: अब आर्यभाषा पुस्तकालय का खुलेगा ताला, 25 हजार दुर्लभ पुस्तकों का होगा प्रकाशन

Tue, 27 Feb 2024 11:24 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Tue, 27 Feb 2024 11:24 AM IST
सार

Aryabhasha Library: नागरी प्रचारिणी सभा की नई कार्यकारिणी ने आर्यभाषा पुस्तकालय का ताला खोलने का निर्णय किया है। नागरी प्रचारिणी सभा ने यहां 129 वर्षों का इतिहास सहेजे हुए है। सभा में पांडुलिपि लैब भी स्थापित होगी। पांडुलिपियों में सौ वर्ष से अधिक के प्राचीन साहित्य, पत्रिकाएं और हस्तलिखित दस्तावेज हैं।

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Aryabhasha Library will now open 25 thousand unique books will be published
Aryabhasha Library - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नागरी प्रचारिणी सभा का वैभव फिर लौटेगा। 50 हजार पांडुलिपियों के संरक्षण के साथ ही सभा की 25 हजार दुर्लभ पुस्तकें आमजन के लिए सुलभ होंगी। लंबे समय से बंद चल रहे आर्यभाषा पुस्तकालय का ताला भी खुल जाएगा। सभा के फिर से जीवंत होने पर हिंदी साहित्य के विद्यार्थियों और शोधार्थियों का हिंदी संसार समृद्ध होगा।

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नागरी प्रचारिणी सभा 129 वर्षों का इतिहास सहेजे है। अब पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटाइजेशन के साथ ही उनका डाटाबेस तैयार करने का निर्णय लिया गया है। इसकी जिम्मेदारी राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन को मिली है। पहले चरण में 30 लोगों का चयन कर उन्हें पांडुलिपि-संरक्षण में प्रशिक्षित किया जाएगा, फिर उनसे ही पांडुलिपि संरक्षण का काम कराया जाएगा। सभा में ही एक पांडुलिपि लैब बनेगी। पांडुलिपियों में सौ वर्ष से अधिक के प्राचीन साहित्य, पत्रिकाएं और हस्तलिखित दस्तावेज हैं।
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सबसे महत्वपूर्ण सभा की पत्रिका सरस्वती के लिए लिखे गए स्वीकृत और अस्वीकृत लेख, कहानियां, कविताएं हैं। इसे आचार्य महावीर प्रसाद ने जूही के नाम से संग्रहीत किया था और सभा को दान दिया था। जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, मुंशी प्रेमचंद, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, नंद दुलारे वाजपेयी, सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा, चंद्रधर शर्मा गुलेरी की रचनाएं प्रमुख हैं। इसमें सरस्वती के अंकों में प्रकाशित होने वाली कॉपियां और क्यों नहीं छपी इसका कारण भी है।

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कबीर, सूर, तुलसी के साथ ही शब्दकोश भी होंगे प्रकाशित

नागरी प्रचारिणी सभा की 25 हजार दुर्लभ पुस्तकें भी आम जनमानस के लिए उपलब्ध होंगी। इसमें मानस की पोथी, सूरसागर की पोथी, बीजक की पोथी, फारसी लिपि में पद्मावत, संस्कृत के ग्रंथ, शब्दकोश, मुहावरा लोकोक्ति कोश, तकनीकी शब्दों के कोश शामिल हैं।

सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने बताया कि सभा की ओर से प्रकाशित किताबों का एक मेला लगाया जाएगा और दुर्लभ किताबें बिक्री के लिए उपलब्ध होंगी। हिंदी के सबसे पुराने आर्यभाषा पुस्तकालय के भवन का संरक्षण भी होगा। सवा सौ साल पुरानी इस हेरिटेज इमारत का रंगरोगन कराया जाएगा।

संगीत समारोह और रामायण मेले की होगी शुरुआत
प्रधानमंत्री ने बताया कि नागरी प्रचारिणी सभा में समारोहों के सिलसिले की शुरुआत संगीत समारोह और रामायण मेले से होगी। इसके साथ ही पर्यटन विभाग की मदद से संस्था परिसर में एक भव्य ऑडिटोरियम के निर्माण को मंजूरी मिल गई है।
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