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उत्खनन: परत दर परत खुदाई से हजारों साल पुराने राज खोलेगा बभनियाव, मिला जटा-मूंछधारी शिवलिंग 

Thu, 05 Mar 2020 08:05 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Thu, 05 Mar 2020 08:05 PM IST
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Archaeologist Excavation got quadratic arghya with Shivalinga in babhaniyav
खुदाई में मिला शिवलिंग। - फोटो : अमर उजाला।

वाराणसी के बभनियाव गांव में हो रहे उत्खनन के दौरान गुरुवार को गर्भगृह के बीच में अर्घ्य दिखाई पड़ा। खुदाई के दौरान अभी तक गर्भगृह में कुषाण कालीन ईटों के बीच शिवलिंग का ऊपरी हिस्सा ही दिखाई पड़ा था। जटाधारी और मूंछ धारी शिवलिंग के नीचे मिले चौकोर अर्घ्य से पानी का बहाव उत्तर की ओर जाता दिख रहा है।

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बीएचयू प्राचीन इतिहास, पुरातत्व विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर ओएन सिंह के निर्देशन में चल रही खुदाई के बारे में प्रो. अशोक सिंह, प्रो. एके दुबे ने बताया कि अरघा उत्तर की तरफ थोड़ा झुका हुआ है। जिसे देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि यहां मंदिर जीवंत मंदिर के रूप में काफी वर्षों तक लोगों के लिए पूजा स्थल में प्रयोग होता रहा है। गुप्त काल में स्थापित इस शिवलिंग की कई सौ वर्षों तक पूजा होती रही होगी।
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प्रोफेसर द्वय ने बताया कि इस शिवलिंग पर जल काफी वर्षों तक चढ़ाने के प्रमाण मिल रहे हैं क्योंकि अरघा के पत्थर का क्षरण साफ-साफ दिख रहा है, जो जल चढ़ाने के कारण हुआ प्रतीत होता है। इन लोगों का यह भी कहना था कि शिव लिंग एक वर्ग मीटर के चौकोर पत्थर के अर्घ्य में बीच में काट कर लगाया गया है। अब आगे यह देखना है कि अर्घ्य का पूरा हिस्सा एक ही पत्थर के टुकड़े का है या दो टुकड़े जोड़कर यह बनाया गया है।

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गुरुवार को अर्घ्य का आधा हिस्सा ही साफ हो सका है लेकिन यह स्पष्ट है कि अरघा पूरी तरह चौकोर है। उत्तर की तरफ जहां से मंदिर का पानी आगे की निकलने का प्रमाण मिल रहा है, वह नुकीला और 16 सेंटीमीटर लंबा है। इस स्थान को जल प्रणाल कहते हैं।

ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि वह आगे की ओर किसी पशु की मुखाकृति जैसे पत्थर से जुड़ा हो सकता है, जिससे पानी अर्घ्य से बाहर निकलता रहा होगा। गड्ढे में मजदूरों के साथ लगातार लगे रहने वाले रिसर्च स्कॉलर डॉक्टर रविशंकर और डॉक्टर संदीप ने बताया कि गर्भ गृह दो मीटर के वर्गाकार क्षेत्र में है, जबकि अरघा 1 मीटर के आकार में दिख रहा है।

यहां मिले इस प्राचीन अवशेष को लेकर कहा जा रहा है कि गुप्त काल में मंदिर में ईटों का प्रयोग कम ही जगहों पर देखने को मिलते है। मंदिर का ऐसा अवशेष कानपुर में भीतरी गांव में मिला है। गुरुवार को खुदाई में लौह अयस्क भी भारी संख्या में मिले।

जैसे-जैसे यहां की खुदाई के बारे में और शिवलिंग मिलने की चर्चा आसपास के गांव के लोगों को पता चल रही है, मौके पर पहुंचने वालों की भारी भीड़ लगती जा रही है। बुधवार की रात हुई हल्की बूंदा बादी को देखते हुए के गुरुवार को बारिश की संभावना को देखते हुए गड्ढे को प्लास्टिक के कवर से ढक दिया गया, ताकि गड्ढे में पानी न जाए। स्थिति यह है कि बभनियाव गांव में लोग घर-घर सभी समाचार पत्रों के संस्करण खरीद कर संग्रहित कर रहे हैं। समाचार पत्र विक्रेता शॉर्टेज के चलते गांव में अखबार नहीं दे पाता है।

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