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UP : इस जिले में मिलीं तीन हजार साल पुरानी कील, पत्थर और हड्डियों की नक्काशीदार वस्तुएं

Fri, 06 Apr 2018 10:51 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भदोही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भदोही Updated Fri, 06 Apr 2018 10:51 AM IST
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Archaeological department found three thousand years old stones and bones
खुदाई में मिला साक्ष्य - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के भदोही में पुरातत्व विभाग की टीम को खुदाई में तीन हजार साल पुरानी लोहे की कील, मिट्टी, पत्थर और हड्डियों से बनीं नक्काशीदारी वस्तुएं और उपकरण मिले हैं।
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बाबूसराय क्षेत्र के द्वारिकापुर और अगियाबीर गांव के मध्य स्थित टीले की खुदाई करा रही बीएचयू की पुरातत्व विभाग की टीम का मानना है कि ये दुर्लभ साक्ष्य यहां नव पाषाण काल की सबसे प्राचीन बस्ती के मौजूद के होने का संकेत दे रहे हैं।
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जिला मुख्यालय से तकरीबन 30 किलोमीटर दूर दक्षिण-पूर्व में गंगा तट पर स्थित द्वारिकापुर-अगियाबीर के बीच स्थित टीले में प्राचीन सभ्यता की तलाश में बीएचयू के प्राचीन इतिहास और पुरातत्व विभाग की टीम वर्ष 1999 से खुदाई करा रही है। हर वर्ष दो महीने तक खुदाई कराई जाती है।
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इस बार 13 मार्च को खुदाई शुरू हुई थी। यहां टीम 12 ट्रेंच लगाकर खुदाई कर रही है। इस दौरान लोहे की कीलें, मिट्टी, स्टोन और हड्डियों से बने विभिन्न सामान और उपकरण मिले हैं। 

दुर्लभ साक्ष्य छिपे होने की उम्मीद

Archaeological department found three thousand years old stones and bones
भदोही में की जा रही पुरातात्विक खुदाई - फोटो : अमर उजाला
संभावना जताई जा रही है कि उस समय के लोग इनका उपयोग आभूषण आदि के रूप में करते रहे होंगे। इन्हें लगभग तीन हजार वर्ष पुरानी नव पाषाण कालीन लौह संस्कृति से जुड़े साक्ष्य के रूप में देखा जा रहा है। इसके पहले की खुदाई में मध्य पाषाण काल के मृदभांड मिल चुके हैं।

टीम का नेतृत्व कर रहे प्रो. एके सिंह ने बताया कि खुदाई में मिली वस्तुओं की नक्काशी उस दौर के बेहतरीन शिल्प को प्रदर्शितकरती है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह नव पाषाण कालीन लौह संस्कृति से जुड़े अवशेष हैं।

यहां उस समय की सबसे प्राचीन बस्ती मौजूद होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि खुदाई से ऐसा लगता है कि गंगा तटीय इलाका होने के नाते यह मछुआरों की बस्ती रही होगी, जहां लोग झोपड़े बनाकर रहते रहे होंगे।

उन्होंने बताया कि खुदाई के साथ-साथ यहां मिले अवशेषों पर अध्ययन भी शुरू हो गया है। कहा कि इस टीले के गर्भ में प्राचीन सभ्यता के दुर्लभ साक्ष्य छिपे होने की उम्मीद है। यह रहस्य जल्द ही सामने आएगा।
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