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दूसरे दिन खुदाई में मिले गुप्तकालीन अवशेष, कुषाणकालीन भवनों के प्रमाण मिलने की भी संभावना

Fri, 28 Feb 2020 03:26 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Fri, 28 Feb 2020 03:26 PM IST
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Archaeological department digging Babhniav finding evidence of Gupta relics varanasi
खदुाई करती टीम। - फोटो : अमर उजाला।

जमीन के नीचे दबे पुरावषेशों से काशी के इतिहास की कड़ियां जुड़ने लगी हैं। राजातालाब के बभनियाव स्थित शिल्पग्राम में चल रही खुदाई के दूसरे दिन बीएचयू प्राचीन इतिहास, पुरातत्व विभाग की टीम को गुप्तकालीन अवशेष मिले हैं। गुरुवार को मंदिरों के अवशेष, मिट्टी के बर्तन, खिलौने मिले हैं, जिनके शिल्प से इनके गुप्तकालीन होने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि सही उम्र का पता कार्बन डेटिंग के बाद चलेगा। अभी यहां महीने भर खुदाई चलनी है। पुरातत्वविदें ने यहां कुषाणकालीन भवनों के प्रमाण भी मिलने की संभावना जताई है।

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बीएचयू की टीम ने सर्वेक्षण के दौरान मिट्टी के बर्तन, भट्टी, मंदिरों के अवशेष, मूर्तियां आदि मिलने पर यहां करीब तीन हजार साल पुरानी बस्ती होने की संभावना जताई थी। बृहस्पतिवार को खुदाई में जो मिट्टी के बर्तन मिले हैं वह भी करीब 2000 साल पहले गुप्तकाल के हैं।
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बीएचयू प्राचीन इतिहास, पुरातत्व विभागाध्यक्ष प्रो. ओंकारनाथ सिंह के निर्देशन में डॉ. अशोक सिंह, डॉ. राहुल राज, प्रो. एके दूबे के साथ ही रविशंकर, संदीप सिंह के अलावा फोटोग्राफर, ड्राफ्टमैन की टीम खुदाई में लगी है।
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बुधवार को जो भट्ठी मिली थी, उसकी साफ -सफाई कराई गई तो कुछ मिट्टी के बर्तन, खिलौने भी मिले। बर्तन भी 3000 साल पहले का लग रहे हैं। इसके अलावा परात के टुकड़े, मृदभांड, मिट्टी के खिलौने भी मिले, जिसको प्रथम दृष्टया देखने पर यह 1400 से 2000 साल पहले की लग रही है।

शिल्पकारों के यहां रहने का अनुमान
निदेशक प्रो. ओंकारनाथ ने बताया कि मुताबिक जिस तरह से सर्वेक्षण के दौरान गांवों में जगह-जगह पड़ी मूर्तियां, मदृभांड, शिवलिंग आदि मिल रहे हैं, इससे यह कहा जा सकता है कि यहां तीन हजार साल पहले शिल्पकारों का बसेरा था और लोग शिवलिंग बनाया करते थे। बभनियाव भी बनारस का एक अहम हिस्सा था। पंचक्रोशी मार्ग होने की वजह से यहां धार्मिक यात्राएं भी निकलती थी, इसी वजह से शिवलिंग, देवी देवताओं की मूर्तियां, मृदभांड आदि मिलते जा रहे हैं। पुरावशेषों के मिलने पर कहा जा सकता है कि तब खेतों में जुताई, मकान बनाने के समय नींव की खुदाई में भी पत्थरों के टुकड़े भी यहां मिले हैं, जो जगह-जगह रखे गए हैं।



1200 साल पहले की हैं देवी देवताओं की मूर्तियां
बभनियाव में अब तक चले सर्वेक्षण के दौरान 1200 साल की प्राचीन काल की मूर्तियां, कुछ शिवलिंग मिलने की जानकारी मिली है। टीम के सदस्यों के मुताबिक गांव में कई जगह मूर्तियां भी रखी गई हैं। इसके अलावा पिछले सप्ताह तक चले सर्वेक्षण में अलग-अलग आकार के शिवलिंग की भी जानकारी मिली है। जो मूर्तियां मिली हैं, उस पर दोनों तरफ आकृतियां बनी हैं। इसमें देवी देवताओं में दुर्गा, शिव-पार्वती, हनुमान, सूर्य की मूर्तियां है। प्राचीन इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. ओंकारनाथ सिंह के मुताबिक प्रथम दृष्टया देखने से करीब 1200 साल पुरानी मूर्तियां लग रही है।

शिवलिंग बनाने के पत्थर भी मिले
खुदाई स्थल के आसपास गावों में शिवलिंग बनाने के लिए के टुकड़े भी यहीं मिले हैं। जो पांच से छह फीट लंबा और डेढ़ से दो फीट चौड़ाई है। इसमें कुछ पर शिवलिंग बना है जबकि कुछ अर्द्धनिर्मित हैं। एक शिवलिंग पर ब्राह्मी लिपि में आलेखन भी है, जो करीब 1800 साल पहले का देखने से लग रहा है। खुदाई के लिए चल रहे प्रोजेक्ट के कोआर्डिनेटर प्रो. ओंकारनाथ सिंह के मुताबिक यहां मिलने वाले पुरावशेषों को देखकर यह भी कहा जा सकता है कि यहां पहले नदी की धारा भी बहती रही होगी। जिन पत्थरों के शिवलिंग बने हैं, वह चुनार के लग रहे हैं।

ग्रंथों से पता लगाते हैं मूर्तियों की प्राचीनता
सर्वेक्षण के दौरान मिलने वाली मूर्तियां कितनी पुरानी हैं, इसका महत्व क्या हैं, इसकी जानकारी ग्रंथों से पता चलती है। प्रो. ओएन सिंह के मुताबिक 600 ई.के ग्रंथों में विशेष तौर पर मूर्ति विन्यास से जुड़ी अहम जानकारियां हैं। प्राचीनता जानने के लिए इसका सहारा लिया जाता है। अलग-अलग ग्रंथों में अहम जानकारियां मिल जाती हैं। बताया कि हर कालखंड की अपनी विशेषता होती हैं। जहां तक लिपि की बात है तो हर लिपि की अपनी बनावट होती है। यहां मिलने वाली लिपियां ज्यादात्तर कुषाण काल की प्रतीत होती है। अब सही जानकारी कार्बन डेटिंग के बाद ही पता चलेगा। 

पचास जगहों पर होनी है खुदाई 
राजातालाब के पंचक्रोशी मार्ग के पास अभी तो बभनियाव में खुदाई चल रही है लेकिन बीएचयू की टीम पंचास जगहों पर खुदाई कराने की तैयारी चल रही है। अनुमान है कि यहां 3 से 4 हजार साल पहले के पुरावशेष मिलेंगे। बभनियाव के साथ ही औढ़े, ढलना, खुशीपुर, महाबन आदि जगहों पर खुदाई होगी।

यह भी जानना अहम है
- सर्वेक्षण के दौरान ब्राह्मी लिपियों में लेखन मिलने के बाद यह माना जा सकता है कि यहां शैव, वैष्णव और ब्राह्मण धर्म के लोग रहते थे। 
- भगवान शंकर, माता पार्वती, दुर्गा जी की पूजा भी यहां लोग करते थे।
- 600 से 900 साल की शिव की मूर्तियां भी गांव में जगह-जगह मिली है। 
- समय के साथ-साथ लिपियां बदलती रहती हैं
- बभनियाव में गुप्तकाल, कुषाण काल, पाषाणक ाल से जुड़े बर्तन, धातुएं भी मिल रही हैं। 

यह है काल का क्रम
-गहड़वाल-वर्तमान से 1300 साल पहले 
-गुप्तोत्तर काल-वर्तमान से 1500 साल पहले
-गुप्तकाल-वर्तमान से 1500 से 2000 साल पहले
-कुषाणकाल-वर्तमान से 2000 से 2200 साल पहले 

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