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एपेक्स कॉलेज का मामला गरमाया, छात्राओं का आरोप- चेयरमैन ने की अभद्रता

Thu, 06 Jul 2017 05:02 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Thu, 06 Jul 2017 05:02 PM IST
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apex college chairman misbehave with students
नर्सिंग छात्रों ने लगाई न्याय की गुहार - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी के एपेक्स कॉलेज आफ नर्सिंग की परीक्षा और मान्यता को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा। गुरुवार दोपहर बाद हंगामा इतना बढ़ गया कि पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। विरोध कर रहे छात्रों का आरोप है कि कॉलेज के चेयरमैन ने छात्राओं से अभद्रता की है।
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छात्राओं ने आरोप लगाया है कि कॉलेज के मुद्दे पर बात करने पहुंची तो चेयरमैन डॉ.एस के यादव ने कहा कि जाओ पहले मोबाइल रख कर आओ। छात्राओं ने विरोध किया तो उन्होंने अपशब्द कहे। इस बात की जानकारी जब दूसरे छात्रों को हुई तो हंगामा करने लगे।
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किसी ने 100 नंबर डायल कर पुलिस बुला ली है। इसी बीच मामला बढता देख एपेक्स के कुछ कर्मचारी लंका थाने पहुंच गए। इससे पहले आज सुबह एडीएम सिटी भी एपेक्स कॉलेज पहुंचे थे। लेकिन वहीं चेयरमैन के नहीं होने के कारण कोई बात नहीं हो पाई थी। 
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बता दें कि एपेक्स कॉलेज आफ नर्सिंग में परीक्षा और मान्यता की शिकायत के बाद जहां धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ है वहीं आरटीआई में मान्यता को लेकर चौकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है।

आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. अवधेश दीक्षित के आवेदन पर इंडियन नर्सिंग काउंसिल(आईएनसी) ने सत्र 2017-18 में प्रवेश के लिए मान्यता न दिए जाने का जवाब दिया है। उधर जवाब आने के बाद 2015 में प्रवेश लेने वाली छात्राओं ने एक बार फिर परीक्षा न कराने के विरोध में धरना दिया। वो मंगलवार से ही धरना पर बैठी हैं। 

ये है पूरा मामला

apex college chairman misbehave with students
एपेक्स कॉलेज में हंगामा - फोटो : अमर उजाला
आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. अवधेश दीक्षित ने छह जून 2017 को आरटीआई के माध्यम से आईएनसी से एपेक्स कॉलेज को बीएससी नर्सिंग की पहली बार मान्यता मिलने और उसकी प्रमाणित छायाप्रति मांगी थी। साथ ही सीटों की संख्या, अप्रूवल की छाया प्रति के साथ अनियमितता पर की गई कार्रवाई के बारे में भी जानकारी मांगी थी।

30 जून को आईएनसी के सचिव रंजीत कौर ने जो जवाब भेजा है, उसमें यह बताया कि पहली बार तीन नवंबर 2009 में संस्था को बीएससी नर्सिंग में 50 सीट की अनुमति मिली थी। साथ ही यह भी बताया है कि सत्र 2017-18 के लिए संस्था को मान्यता नहीं दी गई है। अवधेश ने बताया कि आईएनसी सचिव ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलसचिव से कॉलेज को दी गई मान्यता का आधार मांगा है।

साथ ही विश्वविद्यालय से नर्सिंग साइंस की फेकल्टी होने के बारे में भी रिपोर्ट मांगी है। सचिव ने यह भी कहा है कि नियमानुसार किसी अन्य कॉलेज को संबद्धता से देने से पहले विश्वविद्यालय के पास खुद नर्सिंग की मान्यता का होना जरूरी है।

उधर इसकी जानकारी होने के बाद छात्र-छात्राओं ने कॉलेज के अंदर धरना दिया। बताया कि 22 महीने बाद अब तक परीक्षा न कराने से परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान छात्रों ने जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई।

बता दें कि 13 मई को इसी मामले में नर्सिंग छात्र काशीनाथ एवं अन्य छात्र-छात्राओं  की तहरीर पर लंका थाने में कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ है।
 
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