काशी फिल्म महोत्सव में बोले अनुपम खेर: विरासत में नहीं कठिन परिश्रम से मिला मुकाम
काशी फिल्म महोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार को सिगरा स्थित रूद्राक्ष इंटरनेशन कन्वेंशन सेंटर में फिल्म निर्माण संभावनाओं पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें फिल्म अभिनेता अनुपम खेर ने कहा कि विरासत में उन्हें कुछ नहीं मिला। मुकाम हासिल करने के लिए उन्हें कठिन परिश्रम करना पड़ा। फिल्म अभिनेता ने यहां हर व्यक्ति विद्वान होता है। विकास कार्य ने शहर में बदलाव दिखने लगा है। गुरूदत्त, बलराज साहनी, बिस्मिल्लहा खां ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने दुनियां को भारतीय मेधा से परिचित कराया।
कहा कि उनकी पत्नी भाजपा से सांसद हैं इसलिए विकास कार्य की तारीफ नहीं कर रहे बल्कि जमीन पर दिख रहे विकास की बात बता रहे हैं। अनुपम खेर ने उनके काम के बजाय विरोधियों द्वारा भाजपा के रंग में रंगने को मूर्खता करार दिया।
कहा जो विकास हुआ है उसे कहना होगा। मोदी को अच्छा पीएम बताते हुए कहा कि वे लगतार काम कर रहे हैं। फिल्म निर्माण से जुड़े मधुर भंडारकर ने कहा कि यूपी फिल्म सिटी निर्माण में जो भी मदद की जरूरत होगी वे करेंगे।
काशी में होगा अंतरराष्ट्रीय फिल्म प्रीमियर
परिचर्चा को संबोधित करते हुए फिल्म निर्माण से जुड़े विनोद बच्चन ने कहा कि अगला फिल्म फेस्टिव में अंतराष्ट्रीय स्तर की फिल्म का प्रीमियर काशी में होगा। यह दुनिया में मना हुआ फेस्टिवल होगा। फिल्म एक जगह बैठक कर नहीं बनाई जाती। फिल्म सिटी इंटरनेशनल लेबल की बनाइ जाएगी। यह फिल्म सिटी देश की कलात्मक दुनियां को रिप्रजेंट करेगी।
यूपी के कामगारों का फिल्म निर्माण में सर्वाधिक योगदान
फिल्म निर्माण परिचर्चा को संबोधित करते हुए कुमार मंगत पाठक ने कहा कि फिल्म इंड्स्ट्री एक परिवार की तरह है। करीब 90 प्रतिशत यूपी के मजदूर चुपचाप काम करता है। सभी मिलकर इंड्स्ट्री के विकास के लिए काम करते है। आज यूपी सरकार सब्सिडी दे रही है। महाराष्ट्र सरकार सिर्फ मराठी फिल्मों सब्सिडी दे रही थी यूपी हिंदी सिनेमा को सपोर्ट दे रही है।
अभी तो काम करने की आजादी मिली है-सतीश कौशिक
फिल्म निर्माता और अभिनेता सतीश कौशिक ने कहा कि पूर्वांचल में हिंदी सिनेमा का उदय हो रहा है। अब यूपी में काम करने की आजादी मिली है। यूपी से जुड़ने पर गर्व जताते हुए कहा कि फिल्म इंडस्ट्री सेकुलर है। सभी युनिट के साथ मिलकर काम करते हैं। कहा कि अगले तीन साल तक फिल्में करने में व्स्त हैं। इनमें से दो फिल्मों की सुटिंग यूपी में होंगी। बताया मार्च 2022 में एक फिल्म की शुटिंग शुरू हो जाएगी।
पहले एनआरआई के लिए फिल्में बनती थीं
परिचर्चा को संबोधित करते हुए राहुल मित्रा ने कहा कि जब वे इंडस्ट्री में आए तब ज्यादातर फिल्में एनआरआई को ध्यान में रखकर बनाई जाती थी। लेकिन उन्होंने लिक से हटकर छोटे शहरों पर आधारित फिल्में बनाई जो हिट रही। कहा फिल्म के लिए तीन चिजे जरूरी होती है। पहला प्रशासनिक सुधार, लोकेशन और श्रम की उपलब्धता। ओटीटी सिनेमा का कंपटीटर नहीं बल्किा इसका जोड़ीदार है।
यूपी में मिलेगा कामगारों को रोजगार -बीएन तिवारी
फिल्म इंडस्ट्री से जुडें बीएन तिवारी ने कहा कि उन्होंने काशी से मुंबई जाकर संघर्ष कर 44 साल से काम कर रहे हैं। यूपी में फिल्म सिटी का निर्माण हिंदी सिनेमा का नया अवतार होगा। कहा इंडस्ट्री को प्रशासनिक सुधार से लाभ मिल रहा है। फिल्म महोत्सव का आयोजन काशी के लिए गर्व की बात है। दादा साहब फालके से शुरू हुआ सिनेमा यूपी तक बढ़ता जा रहा है।
यूपी में फिल्म निर्माण के सभी पहलू मौजूद-अशोक
आल इंडिया फिल्म इंप्लाइज कंफेडरेशन के अध्यक्ष अशोक रमापति दूबे ने कहा कि फिल्म बनाने के दो पहलु है एक प्रोड्यूसर और दुसराक काम करने वाले लोग। फेडरेशन ने कोरोना काल में 15 करोड़ जुनियर आर्टिस्टों को आर्थिक मदद मुहैया कराई। काशी फिलम फेस्टिवल के लिए सरकार का ध्यन्यवाद दिया।