फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   sankat mochan sangeet samaroh 2022 Anu showers the troubleshooter's court with a stream of tears

संकटमोचन संगीत समारोह: हनुमत दरबार को आंसुओं की धारा से अनु ने पखारा, अर्पित किया कथक का पुष्प

Fri, 22 Apr 2022 01:32 PM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Fri, 22 Apr 2022 01:32 PM IST
सार

संकटमोचन संगीत समारोह की दूसरी निशा के प्रथमार्ध में सांगीतिक पुष्प का अर्पण कथक नृत्यांगना अनु सिन्हा ने किया। अनु सिन्हा ने बाबा के दरबार को श्रद्धा के आंसुओं से पखारा और कथक के पुष्प को संकट मोचन के चरणों में अर्पित किया। 

विज्ञापन
sankat mochan sangeet samaroh 2022 Anu showers the troubleshooter's court with a stream of tears
कथक नृत्यांगना अनु सिन्हा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संकटमोचन के दरबार की दूसरी निशा का श्रीगणेश कथक से हुआ। दिल्ली से आई कथक नृत्यांगना अनु सिन्हा ने बाबा के दरबार को श्रद्धा के आंसुओं से पखारा और कथक के पुष्प को संकट मोचन के चरणों में अर्पित किया। संगीत समारोह की दूसरी निशा के प्रथमार्ध में सांगीतिक पुष्प का अर्पण कथक नृत्यांगना अनु सिन्हा ने किया।

विज्ञापन


अनु ने अपनी पहली ही प्रस्तुति में संकट मोचन के सुधि दर्शकों के दिल को छू लिया। जयपुर घराने के उस्ताद रजेंद्र गंगानी की शिष्या अनु सिन्हा ने जयपुर घराने के कथक की प्रस्तुतियां दीं। संगीत समारोह में पहली बार हाजिरी लगाने का मौका मिला तो वर्षों से इंतजार का दर्द नृत्य के साथ साथ आंसुओं में छलक पड़ा। वह यह कहते कहते रो पड़ीं कि हनुमानजी महाराज ने मेरी प्रार्थना बहुत देर से स्वीकार की। दर्शकों ने भी हर हर महादेव के जयघोष से कलाकार का हौसला बढ़ाया। तालियों की गड़गड़ाहट से संकट मोचन का परिसर गूंजता रहा।
विज्ञापन


दूसरी निशा की प्रथम प्रस्तुति के आरंभ होते ही समूचा मंदिर परिसर संकट मोचन के जयकारे से गूंज उठा। अनु ने प्रस्तुति का आरंभ गणेश वंदना से किया। इसके बाद शंकर डमरू बाजे... पर भावपूर्ण प्रस्तुति दी। तीन ताल में निबद्ध शब्द रचना पर भावनृत्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इसके बाद राम भजन की प्रस्तुति कर श्रोताओं की तालियां बटोरीं। मेरे राम लला ने...पर कलाकार की भावपूर्ण प्रस्तुति दर्शकों के लिए अविस्मरणीय रही।
विज्ञापन
विज्ञापन


दूसरी प्रस्तुति कोलकाता की सुलग्ना बनर्जी ने शिव वंदना से कथक नृत्य का आरंभ किया। लखनऊ घराने की वरिष्ठ कलाकर ने ओम नम: शिवाय... पर नृत्य में बेहतरीन अभिनय से मनमोह लिया। लखनऊ घराने के पारंपरिक कथक की तीन ताल में प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही।

तबले पर पं. दीनानाथ मिश्र, गायन में आनंद किशोर मिश्र, सितार पर ध्रुवनाथ मिश्र एवं सारंगी पर ध्रुव सहाय ने संगत की। तीसरी प्रस्तुति में विदुषी कल्पना झोकरकर मंच पर विराजमान हुईं। ग्वालियर घराने के उस्ताद रजतअली खां की परंपरा की गायिका कल्पना ने राग काफी में टप्पा ‘ठुमक चलत बनवारी...’ से हनुमान के दरबार में कृष्णप्रेम के रस से श्रोताओं को सराबोर कर दिया। तबले पर पं. कुबेरनाथ मिश्र और हारमोनियम पर विनय मिश्र ने संगत की।

आशीर्वाद लेने और बैट्री रिचार्ज करने आए हैं: अनूप जलोटा

sankat mochan sangeet samaroh 2022 Anu showers the troubleshooter's court with a stream of tears
भजन सम्राट अनूप जलोटा संकटमोचन पहुंचे हाजिरी लगाने - फोटो : अमर उजाला

भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा ने कहा कि दुनिया चले ना हनुमान के बिना...। दुनिया पवनपुत्र के बिना नहीं चल सकती है और मैं भी उनका भक्त हूं। बाबा के दरबार में आशीर्वाद लेने और अपनी बैट्री रिचार्ज करने आया हूं। कोरोना संक्रमण काल के दो साल हर किसी के लिए भयावह रहे, खासकर कलाजगत और कलाकारों के लिए। हमने बहुत कुछ खो दिया इस कोरोना काल में, जिसकी भरपाई कर पाना मुश्किल है।

बृहस्पतिवार को बातचीत के दौरान अनूप जलोटा ने कहा कि संगीत में भी समय के साथ काफी बदलाव आया है। हालांकि गजल, भजन और शास्त्रीय संगीत का मिजाज नहीं बदला है। आज भी यह दिल को बहुत सुकून देता है, बस शर्त यह है कि शुद्ध संगीत हो और उसमें किसी तरह का शोर नहीं हो।

हनुमान लला के दरबार में हाजिरी लगाने के बाद मुझे जो ऊर्जा मिलती है वह वर्ष भर काम आती है। इसलिए जब भी हनुमत दरबार में आने का मौका मिलता है मैं दौड़ा चला आता हूं। हनुमान जी की कृपा से ही सारा काम हो रहा है और उनके बिना तो कुछ भी संभव नहीं है।

पद्मभूषण पं. राजन मिश्र को साजन ने समर्पित किए सुरों के सप्तक

संकटमोचन संगीत समारोह की प्रथम निशा की अंतिम प्रस्तुति ने हर आंख को नम कर दिया। पद्मभूषण पं. साजन मिश्र ने स्वरों के सप्तक अपने बड़े भाई पं. राजन मिश्र को समर्पित किया। 44 साल में पहला मौका था जब राजन-साजन की जोड़ी मंच पर नहीं थी और पं. साजन मिश्र अकेले ही मंच पर हनुमत लला के चरणों में संगीत की स्वरांजलि अर्पित कर रहे थे।

बृहस्पतिवार की भोर में जब पं. साजन मिश्र ने मंच संभाला तो भगवान भास्कर भी संगीत समारोह के साक्षी बन रहे थे। पं. साजन मिश्र ने कहा कि पहला मौका है जब भइया के बिना मैं इस मंच पर आपके सामने हूं। वह हमारे बीच भले न हों लेकिन हमारे हृदय में वह आज भी हैं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप के हृदय में भी हैं तभी पिछली शाम सात बजे से यहां आकर आप सब सुबह छह बजे तक मेरे गायन की प्रतीक्षा में बैठे हैं।’ इतना कहते ही पं. साजन मिश्र की आंखें नम हो गईं और श्रोता भी खुद को ना रोक सके। 

इसके बाद पं. साजन मिश्र ने राग सलागबराली तोड़ी में विलंबित एक ताल में निबद्ध बंदिश तेरो ही नाम जगत अधारा... से गायन की शुरुआत की। रात भर की नींद से अलसाए श्रोता भी गायन की ऊर्जा से चैतन्य हो उठे। उनके पुत्र स्वरांश मिश्र ने गायन में उनके सुर से सुर मिलाया। तबले पर राजेश मिश्रा, सारंगी पर विनायक सहाय मिश्रा, हारमोनियम पर विनय मिश्र ने संगत की। 

इसके पूर्व प्रथम निशा की चौथी प्रस्तुति में पद्मश्री पं. उल्हास कसालकर मंच पर विराजमान हुए। उन्होंने राग जोग कौंस में अपनी पीर पराई...बोल से शुरूआत की और श्रीकृष्ण भजन से गायन को विराम दिया। पांचवीं प्रस्तुति में  पं. किशन महाराज के शिष्य पद्मश्री कुमार बोस ने तबला वादन की बेहतरीन प्रस्तुति दी। छठवीं प्रस्तुति युवा गायक प्रसाद खापर्डे की रही। सातवीं प्रस्तुति संकट मोचन की आरती के बाद युगल सरोद वादन की रही।

डिजिटल स्वरूप चित्र प्रदर्शनी देख भावविभोर हुए लोग

संकटमोचन संगीत समारोह में लगी चित्र प्रदर्शनी में डिजिटल स्वरूप में सजी हनुमान जी की तस्वीर सभी का मन मोह रही है। चित्र प्रदर्शनी में लगी पहली पंक्ति में तीसरी तस्वीर को देखकर लोग बरबस ही ठिठक जा रहे हैं। तस्वीर में हनुमान जी को मोबाइल से कान में हेडफोन लगाए हुए जय श्रीराम का संगीत सुनते हुए दिखाया गया है। इस चित्र को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पेंटिंग विभाग के द्वितीय वर्ष के छात्र सुमित श्रीवास्तव ने बनाया है।

सुमित ने बताया कि वो पिछले पांच सालों से संगीत समारोह में आ रहे हैं। उनकी पेंटिंग हनुमान जी की भक्ति पर आधारित है। विगत दो वर्षों से संगीत समारोह ऑनलाइन चल रहा था। इसलिए मैंने हनुमान जी के हाथों में मोबाइल लेकर संगीत सुनते हुए तस्वीर बनाई है। कोरोना काल में जिस तरह हमने ऑनलाइन संगीत का लुफ्त उठाया उसी तरह हनुमान जी ने भी संगीत का लुफ्त उठाया है। चित्र प्रदर्शनी लगाने का मतलब ये नही की हम अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे है बल्कि ये है कि हम अपनी कला हनुमान जी को समर्पित करते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed