एंटी रेबीज डे: वाराणसी शहर में 35 हजार आवारा कुत्ते, 10 हजार से अधिक पालतू, रोज अस्पताल पहुंच रहे 50-60 मामले
वाराणसी शहर में इस समय 35 हजार से अधिक आवारा कुत्ते और 10 हजार पालतू कुत्ते हैं। मगर पंजीकरण महज 1200 कुत्तों का ही हुआ है। वहीं आए दिन कुत्तों के काटने के मामले अस्पतालों में आ रहे हैं।
विस्तार
वाराणसी शहर में इस समय 35 हजार से अधिक आवारा कुत्ते और 10 हजार पालतू कुत्ते हैं। मगर पंजीकरण महज 1200 कुत्तों का ही हुआ है। वहीं आए दिन कुत्तों के काटने के मामले अस्पतालों में आ रहे हैं। एक आकड़ें के मुताबिक जिले के सरकारी अस्पतालों में औसतन 50 से 60 लोगों को जहां एटी रेबीज वैक्सीन लगाई जा रही है, वहीं स्वास्थ्य केंद्रों पर भी 10 से 15 लोग पहुंचते हैं।
कुत्तों के काटने से होने वाली परेशानी और इसके बचाव के लिए एआरवी यानी एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने के प्रति जागरूकता के लिए हर साल 28 सितंबर को एंटी रेबीज डे मनाया जाता है। शहर की सड़कों पर हर दिन कुत्ते घूमते हुए नजर आ जाएंगे। साथ ही ये कुत्ते दुर्घटना के कारण भी बनते हैं।
20 हजार कुत्तों का बंध्याकरण
इस पर रोक लगाने के उद्देश्य से नगर निगम की ओर से आवारा कुत्तों को पकड़ने का अभियान चलाने के साथ ही लोगों से पालतू कुत्तों के पंजीकरण और उन्हें समय पर एआरवी लगवाने की अपील की जाती है। नगर निगम के पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ.अजय प्रताप सिंह के अनुसार शहर में जो आवारा कुत्ते घूम रहे हैं, उसमें 20 हजार का बंध्याकरण किया जा चुका है।
बाकी का बंध्याकरण जल्द किया जाएगा। उधर सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी का कहना है कि अस्पतालों के साथ ही स्वास्थ्य केंद्रों को पर्याप्त मात्रा में एआरवी, एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध करवाई गई है। साथ ही कुत्ता काटने के बाद बरती जाने वाली सावधानियों भी बताई जा रही है।
तेजी से फैलता है संक्रमण, सतर्कता जरूरी
दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ.पी के सिंह का कहना है कि कुत्ता काटने के बाद काटने वाली जगह पर संक्रमण तेजी से फैलता है। कुत्ते के मुंह में कई तरह की बैक्टीरिया होती हैं। ऐसे में इलाज में किसी तरह की देरी नहीं करनी चाहिए। ऐसी घटना होने के बाद सतर्कता बहुत जरूरी है। जिस जगह पर कुत्ता काटा हो, उसको पहले साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद घाव को साफ कपड़े से बांधकर अस्पताल जाकर एआरवी लगवाना चाहिए। अस्पताल में हर दिन ऐसे मरीज आते हैं, इनमें बच्चों की संख्या अधिक होती है।