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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   anoop jalota ne bahaee suron kee ganga Anup Jalota of tones, the Baha'i Ganga

अनूप जलोटा ने बहाई सुरों की गंगा

Sat, 30 Apr 2016 02:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Sat, 30 Apr 2016 02:19 AM IST
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 anoop jalota ne bahaee suron kee ganga Anup Jalota of tones, the Baha'i Ganga
साोमा घ्‍ााोष्‍ा
भजन सम्राट अनूप जलोटा ने शुक्रवार की रात हरि गुन की धुन से संकट मोचन दरबार में प्रेम-माधुर्य की गंगा बहा दी। ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन... के बोल पर तो तालियों की लय चल पड़ी। शिवमणि ने ड्रम पर अपने रिद्म से संगीत प्रेमियों को खूब झुमाया। गायन, वादन, नृत्य के संगम में हजारों संगीत प्रेमी रात भर डूबते-उतराते रहे। संकट मोचन संगीत समारोह की चौथी निशा इसी तरह के भावों को लेकर साकार हुई।
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सुसज्जित मंच पर संगीत निशा का ड्रम, मेंडोलिन और बांसुरी की जुगलबंदी से जोरदार आगाज हुआ। ड्रम प्लेयर शिवमणि ने अपने रिद्म के अंदाज से लोगों को मुरीद बना लिया। पं. यू राजेश की मेंडोलिन और रोनू मजूमदार की बांसुरी की गतें ड्रम की थाप पर एकाकार हुईं। इनके बाद पीटी नरेंद्रन ने भरतनाट्यम के भावों को पौराणिक कथानकों पर संजोया। इनके बाद कथक क्वीन सितारा देवी की शिष्याओं नीलांजला और साक्षी ने अनूप जलोटा के भजन- बंशी बजइया मोरी निदिया उड़ावे.. पर भावपूर्ण नृत्य पेश किया। इनके बाद बारी आई भजन सम्राट अनूप जलोटा की। उन्होंने शुरुआत की अपने लोकप्रिय भजन- ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन से....वो तो गली-गली हरि गुन गाने लगी...।
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इसके बाद दुनिया चले न श्रीराम के बिना, राम जी चलें न हनुमान के बिना...। फिर अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम... की प्रस्तुति कर उन्होंने श्रोताओं को मुग्ध कर दिया। इसके बाद श्रोताओं की फरमाइश पर उन्होंने भजन पेश किया- श्याम तेरी बंशी पुकारे राधा नाम, लोग करें मीरा को यूं ही बदनाम...। इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले... जैसे भजनों की उन्होंने झड़ी लगा दी। तबले पर अरशद खां, वायलिन पर इकबाल वारसी, गिटार पर अजय मिश्रा और साइड रिदम अनुरोध ने संगत की।
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ठुमरी गायिका सोमा घोष को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजे जाने पर शुक्रवार की रात काशी में कलाकारों, साहित्यकारों ने सम्मानित किया। इस मौके पर सोमा खुद को नहीं रोक सकीं और उन्होंने मंच संभाल लिया। आज जाने की जिद ना करो, मेरे पहलू में बैठे रहो... गजल को उन्होंने जब आवाज दी तो सुरों की कशिश से रात निखर उठी। इनसे पहले सितार के तारों पर गतकारी हुई। तबले पर पं. ललित कुमार ने संगत की। इस मौके पर महापौर राम गोपाल मोहले, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग, काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य पं. अशोक द्विवेदी, अखिल भारतीय काशी विद्वत परिषद के पं. कामेश्वर नाथ उपाध्याय, उद्योग पति किशन कुमार जालान, पूरन महाराज, यूएस अग्रवाल, पं. देवव्रत मिश्र, अंजलि मिश्र, पूरन महाराज समेत तमाम लोग उपस्थित थे।

 
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