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किसानों को भूसा खरीदेगा पशुपालन विभाग
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सोनभद्र। सरकार ने किसानों से गेहूं के साथ ही भूसा भी खरीदने का फैसला किया है। दो महीने में भूसा खरीद करके उसका भंडारण करने के पीछे सरकार की मंशा ऑफ सीजन में पशुओं के चारे को लेकर होने वाली समस्या से निजात पाना है।
जिले में छुट्टा पशुओं के रहने के लिए चोपन ब्लॉक के ग्राम पंचायत चोपन और घोरावल ब्लॉक के केवली मय देवली गांव में स्थायी गोवंश आश्रय स्थल बना है। इसके अलावा राबर्ट्सगंज नगर सहित 16 स्थानों पर अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल हैं। इन गोवंश आश्रय स्थलों में 1660 पशु रखे गए हैं। पशुओं के भरण पोषण के लिए प्रति पशु 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से शासन से भुगतान होता है। अप्रैल में गेहूं कटाई होने पर भूसे के दाम काफी कम हो जाते हैं। ऑफ सीजन में यही भूसा महंगा हो जाता है। सीजन में सस्ता भूसा मिलने से राजस्व की बचत होगी। इसके लिए पशुपालन विभाग एवं आश्रय स्थलों में पशुओं की देखरेख कर रहे विभागों की तरफ से भूसा खरीदने की तैयारी की जा रही है। इसलिए शासन स्तर से अप्रैल-मई मे ही गोवंश आश्रय स्थलों की जरूरत भर का भूसा खरीद कर रख लेने का निर्देश दिया गया है।
देखरेख करने वाले ही खरीदेंगे भूसा
भूसा खरीदने की योजना जो बनी है उस हिसाब से देखरेख करने वाले ही भूसा खरीदेंगे। पशु स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अस्थायी आश्रय स्थलों के लिए भूसा की खरीद संबंधित नगर पंचायत और ब्लाक प्रशासन करेगा। इसके साथ ही स्थायी आश्रय स्थलों के देखरेख की जिम्मेदारी जिला पंचायत प्रशासन की है।
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स्थायी (वृहद) गोवंश आश्रय स्थल की देखरेख जिला पंचायत विभाग, राबर्ट्सगंज नगर में नगर पालिका परिषद प्रशासन और ग्राम पंचायतों में खुले गोवंश आश्रय स्थलों की देखरेख ब्लॉक प्रशासन की तरफ से की जाती है। जरूरत के हिसाब से किसानों से भूसा खरीदा जा रहा है।
- डॉ. एके श्रीवास्तव, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, सोनभद्र
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जिले में छुट्टा पशुओं के रहने के लिए चोपन ब्लॉक के ग्राम पंचायत चोपन और घोरावल ब्लॉक के केवली मय देवली गांव में स्थायी गोवंश आश्रय स्थल बना है। इसके अलावा राबर्ट्सगंज नगर सहित 16 स्थानों पर अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल हैं। इन गोवंश आश्रय स्थलों में 1660 पशु रखे गए हैं। पशुओं के भरण पोषण के लिए प्रति पशु 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से शासन से भुगतान होता है। अप्रैल में गेहूं कटाई होने पर भूसे के दाम काफी कम हो जाते हैं। ऑफ सीजन में यही भूसा महंगा हो जाता है। सीजन में सस्ता भूसा मिलने से राजस्व की बचत होगी। इसके लिए पशुपालन विभाग एवं आश्रय स्थलों में पशुओं की देखरेख कर रहे विभागों की तरफ से भूसा खरीदने की तैयारी की जा रही है। इसलिए शासन स्तर से अप्रैल-मई मे ही गोवंश आश्रय स्थलों की जरूरत भर का भूसा खरीद कर रख लेने का निर्देश दिया गया है।
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देखरेख करने वाले ही खरीदेंगे भूसा
भूसा खरीदने की योजना जो बनी है उस हिसाब से देखरेख करने वाले ही भूसा खरीदेंगे। पशु स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अस्थायी आश्रय स्थलों के लिए भूसा की खरीद संबंधित नगर पंचायत और ब्लाक प्रशासन करेगा। इसके साथ ही स्थायी आश्रय स्थलों के देखरेख की जिम्मेदारी जिला पंचायत प्रशासन की है।
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स्थायी (वृहद) गोवंश आश्रय स्थल की देखरेख जिला पंचायत विभाग, राबर्ट्सगंज नगर में नगर पालिका परिषद प्रशासन और ग्राम पंचायतों में खुले गोवंश आश्रय स्थलों की देखरेख ब्लॉक प्रशासन की तरफ से की जाती है। जरूरत के हिसाब से किसानों से भूसा खरीदा जा रहा है।
- डॉ. एके श्रीवास्तव, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, सोनभद्र