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गुस्से में सड़क पर उतरे लोग, जाम लगाया
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 10 Dec 2016 01:49 AM IST
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चोलापुर के नियारडीह में काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक के बाहर किसानों की लगी भीड़।
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नोटबंदी के एक महीने बाद कैश की किल्लत से जूझ रही ग्राम्यांचल की जनता का सब्र टूटने लगा है। खेती और गृहस्थी का काम छोड़ घंटों कतार में लगने के बाद भी रुपये न मिलने से नाराज लोगों ने शुक्रवार को बड़ागांव में हंगामा करते हुए सड़क जाम कर दी। पुलिस के समझाने पर करीब एक घंटे बाद जाम समाप्त हुआ। वहीं, दानगंज के नियारडीह और चौबेपुर के धौरहरा में भी लोगों ने नोट न मिलने पर हंगामा किया। शहर में भी बैंकों में आए दिन आमजन और कर्मचारियों से कहासुनी हो रही है।
बड़ागांव क्षेत्र के ताड़ी में यूनियन बैंक पर शुक्रवार को सुबह दस बजे के बाद मैनेजर ने बताया कि बैंक में आज रुपये नहीं हैं, इसलिए वे अपने-अपने घर जाएं। भोर से ही कतार में खड़े लोगों को मैनेजर की इस घोषणा पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने नारेबाजी और हंगामा करते हुए बाबतपुर-जमालपुर मार्ग पर जाम लगा दिया। कालीचरण, मिंटू सिंह, शिवप्रकाश, सुनील, मुश्ताक, सुरेंद्र सिंह, मुनका देवी का कहना था कि कई दिनों से बैंक के चक्कर काट रहे हैं लेकिन रुपये नहीं मिल रहे। जाम की जानकारी मिलने पर फूलपुर पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझा-बुझा कर शांत कराया। वहीं, शाखा प्रबंधक प्रकाश रंजन का कहना था कि करेंसी चेस्ट से कैश न मिलने के कारण समस्या बनी हुई है।
दानगंज के नियारडीह, बेला और चोलापुर स्थित काशी गोमती संयुक्त ग्रामीण बैंक की शाखाओं में भी लोगों ने हंगामा किया। दानगंज स्थित यूनियन बैंक में लोगों ने बैंककर्मियों पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। इसी तरह चौबेपुर स्थित ओरिएंटल बैंक, इलाहाबाद बैंक, एसबीआई और काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक में ग्राहकों की जबरदस्त भीड़ रही। इन बैंकों में लोगों को पांच से दस हजार रुपये दिए गए जबकि क्षेत्र के ज्यादातर एटीएम बंद रहे। वहीं, यूनियन बैंक, धौरहरा में कैश न होने की वजह से लोगों को रुपये नहीं मिल पाए। इससे नाराज लोगों ने हंगामा किया। शाम चार बजे कैश आने पर लोगों को दो से तीन हजार रुपये दिए गए।
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इसी तरह राजातालाब के गंगापुर स्थित सेंट्रल बैंक में सुबह कैश न होने पर लोगों ने नारेबाजी की। दो बजे के बाद कैश आया तो रुपये लेने के लिए भीड़ टूट पड़ी। इससे अफरातफरी कच गई। रोहनिया क्षेत्र के मोहनसराय स्थित काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक में भोर से ही लोगों की भीड़ जुट गई। दस बजे बैंक खुलने के बाद नो कैश का बोर्ड लगा दिया गया। बैंक मैनेजर रवींद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मुख्य शाखा से कैश न आने की वजह से ग्राहकों को लौटाना पड़ा।
बैंको में शनिवार से लगातार तीन दिन की छुट्टी पड़ जाने की वजह से खाताधारक परेशान हैं। शुक्रवार को सुबह बैंक खुलने के बाद से लोग रुपये के लिए परेशान रहे लेकिन आवश्यकतानुसार नोट न मिलने पर नाराजगी जाहिर की। कांग्रेस के पूर्व जिलामंत्री विपिन सिंह-जीवन लाल शर्मा ने कहा कि बैंकों-एटीएम का चक्कर लगाते-लगाते लोक थक गए हैं। जल्द ही हालात नहीं सुधरी तो कभी सड़क पर उतरकर आंदोलन कर सकते हैं। यहां वैसे तो विभिन्न बैंकों के दस से अधिक एटीएम हैं लेकिन एक्सिस बैंक को छोड़ कर सभी एटीएम बंद हैं।
सरैयां इस्लामपुरा निवासी अब्दुल हमीद (55) की शुक्रवार की भोर में मौत हो गई। परिवार के लोगों ने बताया कि नोटबंदी से परेशान था। वह बुनकारी का तानी जोड़कर घर का खर्च चलाता था। लगभग 20 वर्षों से उसने चार लाख रुपये मकान की मरम्मत के लिए जुटाए थे। बैंक से पैसे नहीं मिलने पर वह मानसिक रूप से परेशान था। पांच दिन पूर्व वह लकवाग्रस्त हो गया था। पीलीकोठी स्थित जामिया अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं, पुलिस ने नोटबंदी से किसी व्यक्ति की मौत की सूचना से इंकार किया है।
पांच सौ और हजार के नोट बंद होने के बाद प्लास्टिक मनी की ओर लोगों का रुझान बढ़ रहा है। शहर के मॉल और शोरूम में 70 से 90 फीसदी खरीदारी क्रेडिट-डेबिट कार्ड के जरिए की जा रही है। कैश की किल्लत देखते हुए कुछ बड़े आउटलेट्स ने अपने ई-वैलेट भी शुरू कर दिए हैं। शहर के प्रमुख शोरूम और शॉपिंग बाजारों में पहले 90 प्रतिशत खरीदारी कैश देकर की जाती थी। नोटबंदी के एक माह बाद यह आंकड़ा उलट गया है। अब लोग प्लास्टिक मनी के जरिए खरीदारी कर रहे हैं। स्पेंसर के सूरज दूबे ने बताया कि इन दिनों ज्यादातर लोग क्रेडिट-डेबिट कार्ड से खरीदारी कर रहे हैं। बिग बाजार के प्रवक्ता ने बताया कि नोटबंदी के चलते मार्केट डाउन जरूर हुआ है पर प्लास्टिक मनी का चलन बढ़ा है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी की घोषणा के एक हफ्ते बाद ही 90 से 95 प्रतिशत लोग कैशलेस खरीदारी कर रहे हैं।
नोटबंदी के एक महीने बाद भी हालात सामान्य नहीं हो रहे। लोगों को बैंकों-एटीएम में घंटों कतार में खड़े होने के बाद भी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं मिल रहे। वजह, बैंक खुद ही कैश की किल्लत से जूझ रहे हैं। बैंक अफसरों का कहना है कि आरबीआई की ओर से उन्हें पर्याप्त रुपये नहीं मिल रहे।
जिले में 27 राष्ट्रीयकृत, 14 निजी क्षेत्र और एक ग्रामीण बैंक की कुल 431 शाखाएं हैं। बावजूद इसके हालात सामान्य नहीं हो रहे। लोगों को अपने रुपये पाने के लिए बैंक से लेकर एटीएम तक के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं लेकिन उन्हें कहीं राहत नहीं मिल पा रही है। ऐसे में परेशान लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है और बैंक कर्मचारियों से नोंकझोंक हो रही है। शुक्रवार को तो जिले में कुछ जगहों पर तो मैनेजर बैंक में ताला बंद कर बाहर चले गए।
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बड़ागांव क्षेत्र के ताड़ी में यूनियन बैंक पर शुक्रवार को सुबह दस बजे के बाद मैनेजर ने बताया कि बैंक में आज रुपये नहीं हैं, इसलिए वे अपने-अपने घर जाएं। भोर से ही कतार में खड़े लोगों को मैनेजर की इस घोषणा पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने नारेबाजी और हंगामा करते हुए बाबतपुर-जमालपुर मार्ग पर जाम लगा दिया। कालीचरण, मिंटू सिंह, शिवप्रकाश, सुनील, मुश्ताक, सुरेंद्र सिंह, मुनका देवी का कहना था कि कई दिनों से बैंक के चक्कर काट रहे हैं लेकिन रुपये नहीं मिल रहे। जाम की जानकारी मिलने पर फूलपुर पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझा-बुझा कर शांत कराया। वहीं, शाखा प्रबंधक प्रकाश रंजन का कहना था कि करेंसी चेस्ट से कैश न मिलने के कारण समस्या बनी हुई है।
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दानगंज के नियारडीह, बेला और चोलापुर स्थित काशी गोमती संयुक्त ग्रामीण बैंक की शाखाओं में भी लोगों ने हंगामा किया। दानगंज स्थित यूनियन बैंक में लोगों ने बैंककर्मियों पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। इसी तरह चौबेपुर स्थित ओरिएंटल बैंक, इलाहाबाद बैंक, एसबीआई और काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक में ग्राहकों की जबरदस्त भीड़ रही। इन बैंकों में लोगों को पांच से दस हजार रुपये दिए गए जबकि क्षेत्र के ज्यादातर एटीएम बंद रहे। वहीं, यूनियन बैंक, धौरहरा में कैश न होने की वजह से लोगों को रुपये नहीं मिल पाए। इससे नाराज लोगों ने हंगामा किया। शाम चार बजे कैश आने पर लोगों को दो से तीन हजार रुपये दिए गए।
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इसी तरह राजातालाब के गंगापुर स्थित सेंट्रल बैंक में सुबह कैश न होने पर लोगों ने नारेबाजी की। दो बजे के बाद कैश आया तो रुपये लेने के लिए भीड़ टूट पड़ी। इससे अफरातफरी कच गई। रोहनिया क्षेत्र के मोहनसराय स्थित काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक में भोर से ही लोगों की भीड़ जुट गई। दस बजे बैंक खुलने के बाद नो कैश का बोर्ड लगा दिया गया। बैंक मैनेजर रवींद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मुख्य शाखा से कैश न आने की वजह से ग्राहकों को लौटाना पड़ा।
बैंको में शनिवार से लगातार तीन दिन की छुट्टी पड़ जाने की वजह से खाताधारक परेशान हैं। शुक्रवार को सुबह बैंक खुलने के बाद से लोग रुपये के लिए परेशान रहे लेकिन आवश्यकतानुसार नोट न मिलने पर नाराजगी जाहिर की। कांग्रेस के पूर्व जिलामंत्री विपिन सिंह-जीवन लाल शर्मा ने कहा कि बैंकों-एटीएम का चक्कर लगाते-लगाते लोक थक गए हैं। जल्द ही हालात नहीं सुधरी तो कभी सड़क पर उतरकर आंदोलन कर सकते हैं। यहां वैसे तो विभिन्न बैंकों के दस से अधिक एटीएम हैं लेकिन एक्सिस बैंक को छोड़ कर सभी एटीएम बंद हैं।
सरैयां इस्लामपुरा निवासी अब्दुल हमीद (55) की शुक्रवार की भोर में मौत हो गई। परिवार के लोगों ने बताया कि नोटबंदी से परेशान था। वह बुनकारी का तानी जोड़कर घर का खर्च चलाता था। लगभग 20 वर्षों से उसने चार लाख रुपये मकान की मरम्मत के लिए जुटाए थे। बैंक से पैसे नहीं मिलने पर वह मानसिक रूप से परेशान था। पांच दिन पूर्व वह लकवाग्रस्त हो गया था। पीलीकोठी स्थित जामिया अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं, पुलिस ने नोटबंदी से किसी व्यक्ति की मौत की सूचना से इंकार किया है।
पांच सौ और हजार के नोट बंद होने के बाद प्लास्टिक मनी की ओर लोगों का रुझान बढ़ रहा है। शहर के मॉल और शोरूम में 70 से 90 फीसदी खरीदारी क्रेडिट-डेबिट कार्ड के जरिए की जा रही है। कैश की किल्लत देखते हुए कुछ बड़े आउटलेट्स ने अपने ई-वैलेट भी शुरू कर दिए हैं। शहर के प्रमुख शोरूम और शॉपिंग बाजारों में पहले 90 प्रतिशत खरीदारी कैश देकर की जाती थी। नोटबंदी के एक माह बाद यह आंकड़ा उलट गया है। अब लोग प्लास्टिक मनी के जरिए खरीदारी कर रहे हैं। स्पेंसर के सूरज दूबे ने बताया कि इन दिनों ज्यादातर लोग क्रेडिट-डेबिट कार्ड से खरीदारी कर रहे हैं। बिग बाजार के प्रवक्ता ने बताया कि नोटबंदी के चलते मार्केट डाउन जरूर हुआ है पर प्लास्टिक मनी का चलन बढ़ा है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी की घोषणा के एक हफ्ते बाद ही 90 से 95 प्रतिशत लोग कैशलेस खरीदारी कर रहे हैं।
नोटबंदी के एक महीने बाद भी हालात सामान्य नहीं हो रहे। लोगों को बैंकों-एटीएम में घंटों कतार में खड़े होने के बाद भी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं मिल रहे। वजह, बैंक खुद ही कैश की किल्लत से जूझ रहे हैं। बैंक अफसरों का कहना है कि आरबीआई की ओर से उन्हें पर्याप्त रुपये नहीं मिल रहे।
जिले में 27 राष्ट्रीयकृत, 14 निजी क्षेत्र और एक ग्रामीण बैंक की कुल 431 शाखाएं हैं। बावजूद इसके हालात सामान्य नहीं हो रहे। लोगों को अपने रुपये पाने के लिए बैंक से लेकर एटीएम तक के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं लेकिन उन्हें कहीं राहत नहीं मिल पा रही है। ऐसे में परेशान लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है और बैंक कर्मचारियों से नोंकझोंक हो रही है। शुक्रवार को तो जिले में कुछ जगहों पर तो मैनेजर बैंक में ताला बंद कर बाहर चले गए।