{"_id":"663b7431ef2172a33500a0e0","slug":"anandkanan-kashi-find-team-found-exact-location-of-many-jyotirlingas-of-varanasi-2024-05-08","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Exclusive: काशी में बदलेंगे द्वादश ज्योतिर्लिंग के स्थान, घृष्णेश्वर की तलाश जारी; ऐसे हुआ खुलासा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Exclusive: काशी में बदलेंगे द्वादश ज्योतिर्लिंग के स्थान, घृष्णेश्वर की तलाश जारी; ऐसे हुआ खुलासा
Wed, 08 May 2024 06:17 PM IST
प्रगति चंद
आलोक कुमार त्रिपाठी, वाराणसी।
आलोक कुमार त्रिपाठी, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Wed, 08 May 2024 06:17 PM IST
सार
आनंदकानन काशी ढूंढे की टीम की दो महीने की खोज में वैद्यनाथ, रामेश्वर, ओंकारेश्वर और महाकाल ज्योतिर्लिंग का नया पता सामने आया है। उधर, सिंधिया घाट पर बेनाम रूप में केदारक्षेत्र से आए ईशानेश्वर महादेव पूजे जा रहे हैं।
विज्ञापन
वैद्यनाथ, रामेश्वर, ओंकारेश्वर और महाकाल ज्योतिर्लिंग का मिला नया पता
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मंदिरों के शहर बनारस में द्वादश ज्योतिर्लिंग भी विराजमान हैं। आनंदकानन काशी ढूंढे और बीएचयू की टीम ने खुलासा किया है कि वर्तमान में पूजित द्वादश ज्योर्तिलिंग में से पांच अपने स्थान पर विराजमान नहीं हैं। वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वर, ओंकारेश्वर, ईशानेश्वर और महाकाल ज्योर्तिलिंग का नया स्थान अब सामने आया है।
विज्ञापन
दो महीने की खोज के बाद पांच ज्योर्तिलिंग का सही स्थान मिला है। घृष्णेश्वर महादेव की तलाश जारी है। काशी खंड, त्रिस्थलीसेतु, तीर्थ चिंतामणि, कृत कल्पतरू, लिंग पुराण, शिव पुराण, स्कंद पुराण और वाराणसी वैभव को आधार बनाकर दो महीने तक खोज के बाद ज्योतिर्लिंग के वास्तविक स्थान के बारे में जानकारी मिली है। आनंदवन काशी ढूंढे व बीएचयू की टीम की खोज में सामने आया कि ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर महादेव का नया पता मृत्युंजय महादेव के मंदिर में है। मंदिर प्रांगण में वह हस्तिपालेश्वर महादेव के रूप में पूजित हैं।
विज्ञापन
वहीं विशेश्वरगंज में टीले पर जो ओंकारेश्वर के रूप में पूजे जा रहे हैं वह ब्रह्माजी की तपस्या से नंदी रूप में प्रकट हुए थे। उज्जैन से काशी आए महाकाल ज्योतिर्लिंग महामृत्युंजय मंदिर में दक्षेश्वर के पूर्व में हैं। वृद्धकालेश्वर के बगल वाले कालेश्वर और महाकाल में अंतर है। वहीं, कमच्छा पर वैद्यनाथ मंदिर में पूजित महादेव ज्योतिर्लिंग वाले नहीं हैं। असली वैद्यनाथ महादेव कोदई की चौकी पर विराजमान हैं। वैद्यनाथ शिवलिंग दशाश्वमेध के सामने शुक्ला भवन में हैं। भोसले घाट पर पूजित हो रहे नागेश्वर महादेव ज्योतिर्लिंग में शामिल नहीं हैं। नागेश्वर महादेव ज्योतिर्लिंग का स्थान महामृत्यंजय मंदिर प्रांगण में अखाड़े के पीछे है।
विज्ञापन
रामेश्वर महादेव के स्थान पर भी है भेद
बीएचयू के प्रो. माधव जनार्दन रटाटे ने बताया कि रामेश्वर महादेव को लेकर बड़ा भेद है। रामेश्वर ज्योतिर्लिंग रामेश्वर मीरघाट पर सोमेश्वर ज्योतिर्लिंग के बगल में विराजमान हैं। रामकुंड पर रामेश्वर और हनुमान घाट पर रामेश्वर महादेव ज्योतिर्लिंग में शामिल नहीं हैं। भगवान राम ने ब्रह्महत्या से मुक्ति के लिए जो शिवलिंग स्थापित किया था वह मीरघाट पर रघुनाथेश्वर के नाम से पूजित हैं। भगवान राम ने रावण वध के बाद ब्रह्महत्या से मुक्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ अविमुक्त क्षेत्र की यात्रा की और रघुनाथेश्वर शिवलिंग की स्थापना की थी।
बेनाम रूप में सिंधिया घाट पर पूजे जा रहे हैं ईशानेश्वर महादेव
केदारघाट पर विराजमान केदारेश्वर महादेव महाराज मांधाता की तपस्या से प्रकट हुए थे। ज्योतिर्लिंग वाले केदारक्षेत्र से जो ईशानेश्वर काशी आए थे वह सिंधिया घाट के ऊपर बेनाम रूप में पूजित हैं। वहीं महाकाल गण विश्वनाथ मंदिर प्रांगण में हैं। घृष्णेश्वर महादेव की तलाश जारी है क्योंकि वर्तमान में जो घृष्णेश्वर महादेव के रूप में कमच्छा पर पूजित हैं वह घृष्णेश्वर महादेव नहीं हैं। सोमेश्वर महादेव की अस्तित्व पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
टीम में ये रहे शामिल
द्वादश ज्योतिर्लिंग की खोज में बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के प्रो. माधव जनार्दन रटाटे, काशी करवट मंदिर के महेश उपाध्याय, मंगला गौरी के महंत नरेंद्र पांडेय, भृगु संहिता विशेषज्ञ वेदमूर्ति शास्त्री, मनीष पांडेय, काशी विद्यापीठ के संस्कृत विभाग के प्रो. उपेंद्रदेव पांडेय व सुधांशु पांडेय, केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा शामिल हैं।
बेनाम रूप में सिंधिया घाट पर पूजे जा रहे हैं ईशानेश्वर महादेव
केदारघाट पर विराजमान केदारेश्वर महादेव महाराज मांधाता की तपस्या से प्रकट हुए थे। ज्योतिर्लिंग वाले केदारक्षेत्र से जो ईशानेश्वर काशी आए थे वह सिंधिया घाट के ऊपर बेनाम रूप में पूजित हैं। वहीं महाकाल गण विश्वनाथ मंदिर प्रांगण में हैं। घृष्णेश्वर महादेव की तलाश जारी है क्योंकि वर्तमान में जो घृष्णेश्वर महादेव के रूप में कमच्छा पर पूजित हैं वह घृष्णेश्वर महादेव नहीं हैं। सोमेश्वर महादेव की अस्तित्व पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
टीम में ये रहे शामिल
द्वादश ज्योतिर्लिंग की खोज में बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के प्रो. माधव जनार्दन रटाटे, काशी करवट मंदिर के महेश उपाध्याय, मंगला गौरी के महंत नरेंद्र पांडेय, भृगु संहिता विशेषज्ञ वेदमूर्ति शास्त्री, मनीष पांडेय, काशी विद्यापीठ के संस्कृत विभाग के प्रो. उपेंद्रदेव पांडेय व सुधांशु पांडेय, केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा शामिल हैं।