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Amish Tripath: काशी में बोले लेखक अमीश- यहां लिखी गजनवी पर हुई हजार साल पुरानी सर्जिकल स्ट्राइक

Thu, 04 Dec 2025 05:50 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 04 Dec 2025 05:50 AM IST
सार

Varanasi News: जाने-माने लेखक अमीश त्रिपाठी ने बताया कि वे काशी के रहस्यों पर भी एक किताब लिखना चाहते हैं। नाॅर्मल तरीके से बनारस आना-जाना होता है। यहां के लोगों से भी उसी तरह बातचीत होती है। काफी कुछ जानने को मिल जाता है।

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Amish Tripath Writer Amish said in Kashi thousand year old surgical strike on Ghaznavi was written varanasi
लेखक अमिश त्रिपाठी को सम्मानित करते हुए। - फोटो : संवाद

विस्तार

Amish Tripathi in Varanasi: रामचंद्र सीरीज और द शिवा ट्राॅयोलॉजी जैसी प्रसिद्ध पौराणिक पुस्तकों के लेखक अमीश त्रिपाठी ने अगली किताब काशी में ही लिखी है। बुधवार को बीएचयू के काशी तमिल संगमम में पहुंचे अमीश ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि काशी में ही गजनवी पर हुई एक हजार साल पुरानी सर्जिकल स्ट्राइक लिखी है। अपनी आने वाली किताब चोल टाइगर्स को उन्होंने काशी के घाटों पर बैठकर लिखा है।

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उन्होंने बताया कि चोल सम्राट व शिव भक्त राजेंद्र चोल ने सोमनाथ मंदिर विध्वंस का बदला लेने के लिए महमूद गजनवी पर सर्जिकल स्ट्राइक किया था। उसकी हत्या कर दी थी। इस किताब में इसी का जिक्र किया गया है। उन्होंने बताया कि अब वह काशी और दक्षिण के संबंधों पर उपन्यास लिखेंगे। 
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काशी पर शिव जी कृपा है, इसलिए यहां के रहस्यों पर किताब लिखने की इच्छा है। अमीश कहते हैं कि वह काशी आते रहते हैं। बताया कि यहां के घाटों पर अकेले बैठकर कहानियों में खुद को पाता हूं। लो प्रोफाइल होकर आता हूं और कोई भी फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर नहीं करता।
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अमीश ने कहा कि पांडियन राज्य में कन्नगी नाम की एक महिला के साथ अन्याय हुआ था। उनके तप और श्राप से वह शहर नष्ट हो गया। क्षमा-याचना के लिए पांडियन राजा काशी तक आए। हिमालय से पत्थर मंगवाकर गंगा में पवित्र किया गया। इसके बाद 2500 किमी दूर उन पत्थरों से मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। इस पर भी किताब लिखूंगा।

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दादा बीएचयू में ही थे प्रोफेसर
अमीश त्रिपाठी ने कहा कि उनकी पढ़ाई तमिलनाडु में हुई लेकिन उनके दादा पं.बाबूलाल त्रिपाठी बीएचयू में ही प्रोफेसर थे। इसलिए मूल तौर पर वह काशी के ही हुए। प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय को भी वह बाबा मानते हैं।

संगमम कार्यक्रम में अमीश त्रिपाठी ने छात्रों के सवालों के जवाब देते हुए कहा कि जब हम एक विश्व शक्ति बनने की राह पर आगे बढ़ रहे हैं, तो हमें अपने पूर्वजों की तीन प्रमुख सीख का पालन करना होगा। हम उस परंपरा से आते हैं जहां हम दूसरों पर हमला नहीं करते। इसलिए हम एक महाशक्ति नहीं बल्कि विश्व गुरु की तरह बर्ताव करेंगे। हमें भारत की जड़ों और प्राचीन विरासत को समझने की जरूरत है। ये संगमम इसी का उत्सव है।

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