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पूस की फुहारों के बीच सोमा ने की सुरों की बरसात
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पूस की फुहारों के बीच सुरों की मनमोहक बरसात ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पद्मश्री डॉ. सोमा घोष की मखमली आवाज को सुनने के लिए ठंड में भी श्रोता जमे रहे। ख्याल, तराना, दादरा और गजल की प्रस्तुतियों ने शाम का रंग सुरमयी कर दिया। आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर कैंटोमेंट स्थित होटल में आयोजित संगीत से सद्भाव की प्रस्तुतियां हुईं।
नाद के इस उत्सव की पहली प्रस्तुति में दुर्जय भौमिक ने तबला, सुखदेव प्रसाद मिश्र ने वायलिन और अंकित पारिख ने पखावज की त्रिबंदी से समां बांध दिया। राग यमन का आलाप, जोड़, झाला की प्रस्तुतियां शानदार रहीं। तीनाें कलाकारों ने राग पीलू सुनाकर समापन किया। इसके बाद डॉ. सोमा घोष ने मंच संभाला और शुरुआत राग कलावती से किया। पहली प्रस्तुति में उन्होंने दर्शन दीजो श्याम... से भगवान श्रीकृष्ण को मंच से प्रणाम किया।
उसके बाद छोटा ख्याल सुनाया जिया नहीं माने न माने... की प्रस्तुति दी। तराना के बाद बागेश्वरी देवी का दादरा जाओ कान्हा करो न मोसे रार... सुनाया। अंतिम प्रस्तुति में उन्होंने श्रोताओं की फरमाइश पर गजल फासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था...की सुमधुर प्रस्तुति दी। तबले पर विवेक मिश्र, हारमोनियम पर पंकज मिश्र, वायलिन पर सुखदेव मिश्र, कीबोर्ड पर संतोष कुमार ने कुशल संगत किया। इस दौरान विनय जैन, अशोक अग्रवाल, अरविंद शुक्ला, विनोद अग्निहोत्री, श्याम कृष्ण अग्रवाल, राजेंद्र कुमार गुप्ता, संजय गुप्ता, सुरेश पेशवानी, प्रफुल्ल राय मौजूद रहे।
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नाद के इस उत्सव की पहली प्रस्तुति में दुर्जय भौमिक ने तबला, सुखदेव प्रसाद मिश्र ने वायलिन और अंकित पारिख ने पखावज की त्रिबंदी से समां बांध दिया। राग यमन का आलाप, जोड़, झाला की प्रस्तुतियां शानदार रहीं। तीनाें कलाकारों ने राग पीलू सुनाकर समापन किया। इसके बाद डॉ. सोमा घोष ने मंच संभाला और शुरुआत राग कलावती से किया। पहली प्रस्तुति में उन्होंने दर्शन दीजो श्याम... से भगवान श्रीकृष्ण को मंच से प्रणाम किया।
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उसके बाद छोटा ख्याल सुनाया जिया नहीं माने न माने... की प्रस्तुति दी। तराना के बाद बागेश्वरी देवी का दादरा जाओ कान्हा करो न मोसे रार... सुनाया। अंतिम प्रस्तुति में उन्होंने श्रोताओं की फरमाइश पर गजल फासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था...की सुमधुर प्रस्तुति दी। तबले पर विवेक मिश्र, हारमोनियम पर पंकज मिश्र, वायलिन पर सुखदेव मिश्र, कीबोर्ड पर संतोष कुमार ने कुशल संगत किया। इस दौरान विनय जैन, अशोक अग्रवाल, अरविंद शुक्ला, विनोद अग्निहोत्री, श्याम कृष्ण अग्रवाल, राजेंद्र कुमार गुप्ता, संजय गुप्ता, सुरेश पेशवानी, प्रफुल्ल राय मौजूद रहे।
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