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लगी रहती है एंबुलेंस की कतार, नर्सिंगहोम से नहीं सरोकार
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पंजाब की अदालत में बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश नंबर वाली जिस एंबुलेंस से पेश किया गया, जांच में उसके पंजीकरण के कागज फर्जी निकले। ऐसे में मऊ से बाराबंकी तक हड़कंप मचा हुआ है। शहर में भी ऐसी सैकड़ों एंबुलेंस दौड़ रही हैं, जिनका किसी नर्सिंगहोम या अस्पताल से कोई सरोकार ही नहीं है। बावजूद परिवहन विभाग ने अब तक इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
वर्तमान में वाराणसी आरटीओ में 305 एंबुलेंस पंजीकृत हैं, मगर 2000 से ज्यादा अवैध एंबुलेंस सड़कों पर दौड़ रही हैं। बीएचयू अस्पताल के छोटे गेट से नरिया मार्ग पर सड़क किनारे कई एंबुलेंस खड़ी रहती हैं। लंका क्षेत्र में बीएचयू ट्रामा सेंटर, माधव मार्केट और मंडलीय अस्पताल के इर्दगिर्द भी कई एंबुलेंस नजर आती हैं। इन एंबुलेंस पर ऐसे अस्पतालों का नाम दर्ज रहता है जिनके बारे में किसी को कुछ नहीं पता।
गौरतलब है कि कई बार एंबुलेंस से बिहार में शराब तस्करी के मामले भी सामने आ चुके हैं। अभियान चलाकर चेकिंग के बजाय परिवहन विभाग के साथ ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी समझ से परे है।
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एंबुलेंस चालकों से होती है मारपीट
नरिया मार्ग पर खड़ी होने वाली एंबुलेंस से अवैध वसूली के लिए आए दिन मारपीट के मामले आते रहते हैं। हाल ही में एक एंबुलेंस चालक का अपहरण कर बीएचयू के एक छात्र सहित चार लोगों ने 10 हजार की फिरौती मांगी थी। लोगों का कहना है कि लंका चौराहा और नगवा पुलिस चौकी पर तैनात कुछ सिपाहियों की मिलीभगत से कुछ मनबढ़ एंबुलेंस चालकों से वसूली करते हैं। जो चालक पैसे नहीं देते उनके साथ मारपीट की जाती है।
रोजाना लगता है जाम
नरिया मार्ग पर एंबुलेंस के खड़े होने से रास्ता संकरा हो जाता है। सड़क की दूसरी लेन पर मेडिकल स्टोरों और पैथालॉजी में जांच कराने वालों के वाहन खड़े रहते हैं। ऑटो और अतिक्रमण के कारण भी वहां सुबह से शाम तक जाम लगता है। इस पर किसी अधिकारी का ध्यान नहीं रहता है।
कमीशन के लिए निजी अस्पताल में करा देते हैं भर्ती
कुछ एंबुलेंस चालक अस्पतालों से कमीशन लेते हैं। वह मरीज को वहां भर्ती करा कर भाग निकलते हैं। शहर में सोनभद्र व मिर्जापुर के अलावा बिहार और मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों से भी मरीज एंबुलेंस से आते हैं। कई बार चालक उन्हें बीएचयू में भर्ती कराने की बात कहकर लाते हैं और निजी अस्पताल में पहुंचा देते हैं। विवाद तो होता है पर अच्छे उपचार और बीएचयू में बेड न खाली होने का हवाला देकर परिजनों को शांत करा दिया जाता है।
यह है एंबुलेंस का नियम
- नर्सिंग होम और अस्पताल से संबद्धता प्रमाणपत्र
- एंबुलेंस में अलग अलग सुविधाओं के हिसाब से संसाधन
- एंबुलेंस वाहन की फिटनेस जांच आवश्यक
एंबुलेंस की आड़ में अवैध वाहन
- पुराने और डग्गामार वाहन एंबुलेंस की आड़ में दौड़ रहे
- कम सुविधाओं के चलते मरीजों की जान से खिलवाड़
- एंबुलेंस की आड़ में काम भी हो रहे हैं
वर्जन
एंबुलेंस पंजीकरण का नियम है और उसके लिए नर्सिंग होम या अस्पताल से संबद्धता जरूरी है। अवैध एंबुलेंस के खिलाफ टीम बनाकर अभियान चलाया जाएगा।
सर्वेश चतुर्वेदी, एआरटीओ
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वर्तमान में वाराणसी आरटीओ में 305 एंबुलेंस पंजीकृत हैं, मगर 2000 से ज्यादा अवैध एंबुलेंस सड़कों पर दौड़ रही हैं। बीएचयू अस्पताल के छोटे गेट से नरिया मार्ग पर सड़क किनारे कई एंबुलेंस खड़ी रहती हैं। लंका क्षेत्र में बीएचयू ट्रामा सेंटर, माधव मार्केट और मंडलीय अस्पताल के इर्दगिर्द भी कई एंबुलेंस नजर आती हैं। इन एंबुलेंस पर ऐसे अस्पतालों का नाम दर्ज रहता है जिनके बारे में किसी को कुछ नहीं पता।
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गौरतलब है कि कई बार एंबुलेंस से बिहार में शराब तस्करी के मामले भी सामने आ चुके हैं। अभियान चलाकर चेकिंग के बजाय परिवहन विभाग के साथ ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी समझ से परे है।
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एंबुलेंस चालकों से होती है मारपीट
नरिया मार्ग पर खड़ी होने वाली एंबुलेंस से अवैध वसूली के लिए आए दिन मारपीट के मामले आते रहते हैं। हाल ही में एक एंबुलेंस चालक का अपहरण कर बीएचयू के एक छात्र सहित चार लोगों ने 10 हजार की फिरौती मांगी थी। लोगों का कहना है कि लंका चौराहा और नगवा पुलिस चौकी पर तैनात कुछ सिपाहियों की मिलीभगत से कुछ मनबढ़ एंबुलेंस चालकों से वसूली करते हैं। जो चालक पैसे नहीं देते उनके साथ मारपीट की जाती है।
रोजाना लगता है जाम
नरिया मार्ग पर एंबुलेंस के खड़े होने से रास्ता संकरा हो जाता है। सड़क की दूसरी लेन पर मेडिकल स्टोरों और पैथालॉजी में जांच कराने वालों के वाहन खड़े रहते हैं। ऑटो और अतिक्रमण के कारण भी वहां सुबह से शाम तक जाम लगता है। इस पर किसी अधिकारी का ध्यान नहीं रहता है।
कमीशन के लिए निजी अस्पताल में करा देते हैं भर्ती
कुछ एंबुलेंस चालक अस्पतालों से कमीशन लेते हैं। वह मरीज को वहां भर्ती करा कर भाग निकलते हैं। शहर में सोनभद्र व मिर्जापुर के अलावा बिहार और मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों से भी मरीज एंबुलेंस से आते हैं। कई बार चालक उन्हें बीएचयू में भर्ती कराने की बात कहकर लाते हैं और निजी अस्पताल में पहुंचा देते हैं। विवाद तो होता है पर अच्छे उपचार और बीएचयू में बेड न खाली होने का हवाला देकर परिजनों को शांत करा दिया जाता है।
यह है एंबुलेंस का नियम
- नर्सिंग होम और अस्पताल से संबद्धता प्रमाणपत्र
- एंबुलेंस में अलग अलग सुविधाओं के हिसाब से संसाधन
- एंबुलेंस वाहन की फिटनेस जांच आवश्यक
एंबुलेंस की आड़ में अवैध वाहन
- पुराने और डग्गामार वाहन एंबुलेंस की आड़ में दौड़ रहे
- कम सुविधाओं के चलते मरीजों की जान से खिलवाड़
- एंबुलेंस की आड़ में काम भी हो रहे हैं
वर्जन
एंबुलेंस पंजीकरण का नियम है और उसके लिए नर्सिंग होम या अस्पताल से संबद्धता जरूरी है। अवैध एंबुलेंस के खिलाफ टीम बनाकर अभियान चलाया जाएगा।
सर्वेश चतुर्वेदी, एआरटीओ