अमर उजाला संवाद: काशी के विकास में सहयोग दे समाज, जागरूकता और जिम्मेदारी दोनों जरूरी; साझा किए गए विचार
काशी के विकास में सहयोग के लिए समाज की जागरूकता और जिम्मेदारी दोनों जरूरी हैं। अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि शहर के विकास को गति देने के लिए प्रशासन के साथ आम लोगों की भागीदारी भी अहम है। नागरिकों को अपनी जिम्मेदारियां समझते हुए सकारात्मक पहल करनी चाहिए।
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काशी के विकास को गति देने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी, नागरिकों में जागरूकता और जिम्मेदारी का भाव जरूरी है। जाति-धर्म से ऊपर उठकर वंचितों को सहयोग, महिलाओं को बराबरी का अधिकार और युवा पीढ़ी को सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक करना होगा।
शहर की आध्यात्मिक पहचान और व्यावसायिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाकर सुनियोजित विकास करना होगा। इन्हीं मुद्दों पर बृहस्पतिवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद में विभिन्न समाजों और संगठनों के 15 प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। डेढ़ घंटे की इस चर्चा में प्रतिनिधियों ने अपने संगठनों के बारे में जानकारी भी दी।
इनकी रही मौजूदगी : ब्राह्मण समाज से सतीश चंद्र मिश्रा, स्वर्णकार समाज से किशोर कुमार सेठ, स्वर्णकार संघ से शैलेश वर्मा, खत्री समाज से शम्मी खत्री, वेस इंडिया के निदेशक डॉ. राजेश श्रीवास्तव, समाजसेविका अंजु चौरसिया, सिंधी समाज से निधि लालवानी, कायस्थ समाज से राकेश कुमार श्रीवास्तव, सनातनी गंगा फाउंडेशन के समन्वयक अरुणी चंद्र सिन्हा, मारवाड़ी समाज के प्रधानमंत्री पवन अग्रवाल, साहू समाज से अनिल साहू, भारत विकास परिषद से कमल कुमार सिंह व शैलेश वर्मा, समाज सेविका दीपमाला राय, सखी सहेली संस्था से मीनाक्षी सिंह मौजूद रहीं।
- दबे कुचले लोगों का शोषण बंद हो, उन्हें हर तरीके से सहयोग दिया जाए।
- शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार हो, भीड़ प्रबंधन भी व्यवस्थित हो।
- विकास सुनियोजित हो और सभी समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें।
- महिलाएं सशक्त हों और उनको बराबरी का दर्जा मिले। महिलाएं आत्मनिर्भर हों।
- अगर लोगों को आर्थिक तौर पर मजबूत किया जाए तो समाज खुद ब खुद सशक्त होगा।
- रामनगर में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा स्थापित की जाए।
- जिला प्रशासन एक समन्वय समिति बनाए जिसका अध्यक्ष कोई आईएएस हो। कोई भी विकास कार्य बिना उनकी अनुमति से न हो।
- गंगा उस पार नई काशी बसाई जाए और उसे पुलों के माध्यम से जोड़ा जाए।
- सोशल मीडिया के माध्यम से कमजोर लोगों के उत्पादों का प्रमोशन किया जाए, ताकि उन्हें रोजगार मिले और वो स्वावलंबी बनें।
- वाराणसी के तीन स्टेशनों को अलग-अलग नाम दिया जाए। पार्कों को सुंदरीकरण और ओपन जिम बनवाने से अच्छा है कि पारंपरिक अखाड़ों का पुननिर्माण कराया जाए।