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काशी की आबोहवा में फिर दिल्ली से ज्यादा प्रदूषण
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 06 Feb 2017 05:19 PM IST
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कागजों पर ही बनी टास्क फोर्स और रणनीति
- फोटो : फाइल फोटो
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वाराणसी की आबोहवा में लगातार जहर घुलता जा रहा है। रविवार-सोमवार को वाराणसी का वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक रविवार शाम वाराणसी में प्रदूषण का स्तर पीएम 2.5-298 और पीएम 10- 239 मापा गया।
पीएम 2.5 अगर 100 तक हो तो उसे सामान्य कहा जाता है। 201 से 300 तक खराब कहा जाता है।
प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। रविवार शाम की दिल्ली में पीएम 2.5-296, कानपुर में पीएम 2.5-342, आगरा में पीएम 2.5-321, पटना में पीएम 2.5-392 आंका गया।
हैरत की बात यह है कि इसकी रोकथाम के लिए न तो प्रदूषण नियंत्रण विभाग संजीदा है और न ही प्रशासन की ओर से कोई पहल की जा रही है।
कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने इस दिशा में कारगर कदम उठाने के लिए करीब दो महीने पूर्व टास्क फोर्स गठन करने का निर्देश दिया था।
प्रदूषण के कारणों की पहचान कर रोक थाम की रणनीति बनाई गई थी।
इसके बाद कुछ नहीं हुआ।
बता दें कि दिवाली के बाद भी वाराणसी में प्रदूषण का स्तर दिल्ली, गाजियाबाद और कानपुर के बाद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था।
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक रविवार शाम वाराणसी में प्रदूषण का स्तर पीएम 2.5-298 और पीएम 10- 239 मापा गया।
पीएम 2.5 अगर 100 तक हो तो उसे सामान्य कहा जाता है। 201 से 300 तक खराब कहा जाता है।
प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। रविवार शाम की दिल्ली में पीएम 2.5-296, कानपुर में पीएम 2.5-342, आगरा में पीएम 2.5-321, पटना में पीएम 2.5-392 आंका गया।
हैरत की बात यह है कि इसकी रोकथाम के लिए न तो प्रदूषण नियंत्रण विभाग संजीदा है और न ही प्रशासन की ओर से कोई पहल की जा रही है।
कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने इस दिशा में कारगर कदम उठाने के लिए करीब दो महीने पूर्व टास्क फोर्स गठन करने का निर्देश दिया था।
प्रदूषण के कारणों की पहचान कर रोक थाम की रणनीति बनाई गई थी।
इसके बाद कुछ नहीं हुआ।
बता दें कि दिवाली के बाद भी वाराणसी में प्रदूषण का स्तर दिल्ली, गाजियाबाद और कानपुर के बाद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था।
अस्थमा और ब्रोंकाइटिस का ज्यादा खतरा
बनारस में बढ़ता वायु प्रदूषण
- फोटो : अमर उजाला
मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा के चेस्ट फिजीशियन डॉ. आरके शर्मा ने बताया कि मानक से अधिक प्रदूषण होने पर अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, डिस्पनिया (सांस फूलने) के रोगी बढ़ते हैं। आंखों में जलन और हृदय संबंधी बीमारियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है।