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जज्बे को सलाम: कबड्डी के लिए छोड़ी अग्निवीर की नौकरी, अब यूपी टीम से खेल रहे हरीश
Tue, 25 Feb 2025 04:58 PM IST
वाराणसी ब्यूरो
नीलांबुज तिवारी, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।
नीलांबुज तिवारी, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 25 Feb 2025 04:58 PM IST
सार
वाराणसी जिले के हरीश सिंह ने अग्निवीर में छह माह तक ट्रेनिंग के बाद छह महीने की नौकरी भी की, लेकिन छुट्टी नहीं मिली तो इस्तीफा देकर वाराणसी लौट आए।
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हरीश सिंह
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वाराणसी जिले के चांदमारी के रहने वाले हरीश सिंह ने केंद्रीय विद्यालय 39 जीटीसी में कबड्डी खेलना शुरू किया। तीन साल तक लगातार स्कूली नेशनल गेम में बनारस का नाम रोशन किया। अग्निवीर में छह माह तक ट्रेनिंग के बाद छह महीने की नौकरी भी की, लेकिन छुट्टी नहीं मिली तो इस्तीफा देकर वाराणसी लौट आए।
हरीश ने बताया कि 2015 में सातवीं में पढ़ते थे, तब से कबड्डी खेलना शुरू किया। केवी के रीजनल स्पोर्ट्स में प्रतिभाग किया। 2016 से लगातार तीन साल तक केंद्रीय विद्यालय की ओर से राष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेला।
आगे खेलने के लिए परिवार से अनुमति नहीं मिली। इसके बाद रेगुलर पढ़ाई छोड़ दी। घर वाले नहीं माने तो इंडियन रेलवे में कार्यरत बीरेंद्र पाल ने परिवार को समझाया। 2020 में मातेश्वरी क्लब बावन बीघा में खेलने का मौका मिला।
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सात घंटे रोज अभ्यास करते थे। मूलरूप से चंदौली के धानापुर के निगुरा निवासी हरीश ने लगातार दो साल तक चंदौली की ओर से स्टेट खेला। 2022 से बनारस से खेलना शुरू किया।
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हरीश ने बताया कि 2015 में सातवीं में पढ़ते थे, तब से कबड्डी खेलना शुरू किया। केवी के रीजनल स्पोर्ट्स में प्रतिभाग किया। 2016 से लगातार तीन साल तक केंद्रीय विद्यालय की ओर से राष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेला।
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आगे खेलने के लिए परिवार से अनुमति नहीं मिली। इसके बाद रेगुलर पढ़ाई छोड़ दी। घर वाले नहीं माने तो इंडियन रेलवे में कार्यरत बीरेंद्र पाल ने परिवार को समझाया। 2020 में मातेश्वरी क्लब बावन बीघा में खेलने का मौका मिला।
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सात घंटे रोज अभ्यास करते थे। मूलरूप से चंदौली के धानापुर के निगुरा निवासी हरीश ने लगातार दो साल तक चंदौली की ओर से स्टेट खेला। 2022 से बनारस से खेलना शुरू किया।
दोस्त के होम स्टे में किया काम
अक्तूबर 2023 में परिजनों को बिना बताए बनारस लौटा। दोस्त पवन तिवारी ने कवड्डी टीम में चयन होने पर आठ हजार के जूते और किट दिलाई। रात में पेइंग गेस्ट हाउस में काम करता था, डाइट और पैसे भी मिलते थे। परिजनों को बताया तो वह नाराज हुए, लेकिन बाद में मान गए।
टूट गई थी कलाई, दोस्तों ने बढ़ाया मनोबल
15 जून 2022 काला दिन था। प्रादेशिक मैच में हाथ की कलाई टूट गई थी। छह माह तक खेल से दूर रहना पड़ा। मां रीना सिंह और पिता उदय सिंह ने मनोबल बढ़ाया। लगता था कि अब सब खत्म हो गया। खेल नहीं पाउंगा। हालांकि, धीरे-धीरे रिकवर हुआ। नवंबर 2022 में ट्रैक पर लौटा तो से मानसिक मदद मिली। अग्निवीर जीडी दोस्तों से में भर्ती हुई तो। हजार महीने की सैलरी थी। नवंबर 2024 में नौकरी छोड़कर कबड्डी को अपना लिया।
टूट गई थी कलाई, दोस्तों ने बढ़ाया मनोबल
15 जून 2022 काला दिन था। प्रादेशिक मैच में हाथ की कलाई टूट गई थी। छह माह तक खेल से दूर रहना पड़ा। मां रीना सिंह और पिता उदय सिंह ने मनोबल बढ़ाया। लगता था कि अब सब खत्म हो गया। खेल नहीं पाउंगा। हालांकि, धीरे-धीरे रिकवर हुआ। नवंबर 2022 में ट्रैक पर लौटा तो से मानसिक मदद मिली। अग्निवीर जीडी दोस्तों से में भर्ती हुई तो। हजार महीने की सैलरी थी। नवंबर 2024 में नौकरी छोड़कर कबड्डी को अपना लिया।