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बलिया: पत्नी की मौत के बाद अकाउंट में बचे रुपये पाने के लिए पांच माह से बैंक का चक्कर लगा रहा बुजुर्ग

Sat, 16 May 2020 04:37 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, बलिया
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 16 May 2020 04:37 PM IST
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After death of his wife elder has been circling bank for five months to withdraw money left in account in ballia
कागज के साथ बुजुर्ग। - फोटो : अमर उजाला।

कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन में सिर्फ वही परेशान नहीं है जो घर से बाहर हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो सिर्फ इसलिए परेशान हैं कि जिन्हें काम करना चाहिए वे अपने काम को सही तरीके से अंजाम नहीं दे रहे हैं। बलिया जिले में एक ऐसे ही बुजुर्ग हैं जो पिछले पांच माह से पत्नी की मौत के बाद उसके अकाउंट में बचे छह हजार रुपये निकालने के लिए बैंक के चक्कर लगा रहे हैं। इसके एवज में अब तक दो हजार रुपये खर्च भी कर चुके हैं। इसके बाद भी संभवत बैंक वालों की मुराद पूरी नहीं कर सका है, इसलिए चक्कर लगाना जारी है।

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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बांसडीह शाखा की खाताधारक शिवकुमारी देवी की मौत बीते 19 दिसंबर को हो गई। उनकी मौत के बाद पति जीउत गोड़ ने बैंक वालों से संपर्क किया और पत्नी के अकाउंट में बचे छह हजार रुपये पाने के लिए क्या करना होगा की जानकारी मांगी। जवाब में बैंक वालों ने उसे एक लंबी चौड़ी लिस्ट थमा दी। लिस्ट में मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल, तहसील से नोटरी, बैंक के अधिकृत अधिवक्ता से प्रमाण पत्र आदि के साथ अन्य कागजातों की मांग की गई।
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बैंक की तरफ से मांगे गए कागजातों को जुटाने में जीउत गोड़ को तीन महीने लग गए। इस दौरान उन्होंने तहसील से लेकर अधिवक्ता के घर तक कई बार चक्कर लगाए। संबंधित लोगों की जेबें गर्म की तब जाकर किसी तरह सभी कागजात इकट्ठा कर पाया। इन सभी कागजों को लेकर वह बीते 18 मार्च को बैंक में पहुंचा तो कहा गया कि अब इन कागजों की जांच की जाएगी। इसके बाद उसे पत्नी के अकाउंट में बचे हुए पैसे मिलेंगे।

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जीउत अब इस उम्मीद में था कि जल्द ही पत्नी की आखिरी अमानत उसके पास होगी। लेकिन बैंक वालों का मन अभी उसे दौड़ाने से भरा नहीं था। बीच में लॉकडाउन ने भी जीउत की उम्मीदों पर पानी फेरा। बैंक खुलने लगे तो उसने चक्कर लगाना फिर शुरू किया।

बृहस्पतिवार को बैंक से बाहर आकर उदास बैठे जीउत पर जब अमर उजाला रिपोर्टर की नजर पड़ी तो पूछताछ में उसने सारी कहानी बयां की। उसने बताया कि साहब ने कहा है लाकडाउन खत्म होने के बाद आना तब पैसे मिलेंगे। रिपोर्टर उसे लेकर बैंक के अंदर गया और अकाउंटेंट नंदकिशोर से बात की तब भी उसने पैसे देने से मना कर दिया।

नंदकिशोर का कहना था कि अब वह लॉकडाउन के बाद जीउत के घर जाएगा और पता करेगा की असलियत में पत्नी की मौत हुई है या नहीं। इसके बाद ही पैसा दिया जाएगा। उसने कहा कि इस तरह के कागजात तो लोग फर्जी भी बनवा लेते हैं इनका क्या भरोसा।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया(बांसडीह) के शाखा प्रबंधक योगेश यादव ने बताया कि सोमवार को जीउत गोड़ को बैंक भेज दीजिएगा। उसके कागजात चेक कर यदि सही हुए तो पेमेंट करा दिया जाएगा।
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