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बसपा सांसद अतुल राय ने नहीं किया सरेंडर, कोर्ट ने कहा- न्याय की मूल भावना हो रही प्रभावित
Tue, 04 Jun 2019 07:38 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Tue, 04 Jun 2019 07:38 PM IST
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अतुल राय (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम आशुतोष तिवारी की अदालत ने दुष्कर्म मामले में फंसे घोसी से बसपा सांसद अतुल राय की सरेंडर की तारीख को आगे बढ़वाने की याचिका को खारिज कर दिया है। सांसद अतुल राय ने पैर में चोट लगने के कारण सरेंडर करने की तारीख को आगे बढ़ाने के लिए याचिक दायर की थी।
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सुनवाई में अदालत ने कहा कि आरोपी की ओर से प्रकरण को लम्बा खींचने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे न्याय की मूल भावना प्रभावित होती है। ऐसे में आत्मसमर्पण प्रार्थना खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि पूर्व में जारी प्रक्रिया प्रभावी होगी। अदालत ने पहले ही आरोपी अतुल को सीआरपीसी की धारा 82 के तहत फरार घोषित किया है।
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इसके पहले आरोपी के अधिवक्ता अनुज यादव ने आवेदन देकर अदालत को सूचित किया था कि, समर्पण के लिए आते वक्त जमानिया के पास वाहन दुर्घटना के दौरान पैर में गंभीर चोट लग गई है इसलिए समर्पण के लिए दूसरी तिथि नियत की जाय। इस पर अदालत ने साढ़े 3 बजे तक घटना के बाबत चिकित्सकीय प्रमाण पत्र देने को कहा, उस समय तक प्रमाण पत्र नहीं देने पर अदालत ने आत्मसमर्पण संबंधी आवेदन खारिज कर दिया।
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अतुल राय पर एक युवती ने बालात्कार का आरोप लगाते हुए, वाराणसी के लंका थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए अतुल राय ने हाईकोर्ट में अपील की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 8 मई को अतुल राय की याचिका को खारिज कर दिया था। इस पर अतुल राय ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। इसके बाद वाराणसी कोर्ट में हाजिर होने के लिए अर्जी दाखिल की। अदालत ने लंका थाने की पुलिस से आख्या मांगी थी, जो पुलिस ने दे दी।