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डेढ़ अरब का नुकसान, 54.65 करोड़ रुपये का भेजा प्रस्ताव

Thu, 16 Apr 2015 02:14 AM IST
वाराण्ासी, ब्यूरो
वाराण्ासी, ब्यूरो Updated Thu, 16 Apr 2015 02:14 AM IST
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About 54.65 Crore destroy in heavy rain

वाराणसी। बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। जिला प्रशासन ने फसलों की बरबादी का आकलन कर बुधवार को शासन को 54.65 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का प्रस्ताव भेजा दिया लेकिन बरबादी की तस्वीर इससे ज्यादा भयावह है।

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असल में क्षति डेढ़ अरब रुपये अधिक की बताई जा रही है। प्रशासन ने अब तक कुल चार सर्वे कराए हैं और नुकसान का आंकड़ा बढ़ गया। जिले में 50 फीसदी से ज्यादा फसल बरबाद हो चुकी है जबकि मौसम का कहर अभी जारी है। ऐसे में प्रशासन जल्द ही दूसरा प्रस्ताव भी भेजेगा।
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प्रशासन ने सैंपल सर्वे के आधार पर 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान वाले 150 गांवों की पड़ताल की है। इसके आधार पर जिले भर की रिपोर्ट तैयार की गई है। इसमें 17137.332 हेक्टेयर फसल की बरबादी का आंकलन किया गया है और शासन से 54 करोड़ 65 लाख 74 हजार 715 रुपये की सहायता राशि मांगी गई है।
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 अफसरों का कहना है कि बरबादी को देखते हुए तत्काल सहायता के लिए यह राशि मांगी गई है और सर्वे का काम लगातार चलता रहेगा। नुकसान अधिक होता है तो शासन और सहायता राशि की मांग की जाएगी। उध्ार, बेमौसम बारिश और चक्रवात ने खेतों में ऐसी तबाही मचाई कि उपज न घर पहुंच सकी न बाजार।
अब ‘महंगाई डायन’ वार के लिए तैयार खड़ी है। दलहन-तिलहन और अनाज की कीमतों में अचानक तेजी आ गई है। जबकि, यह वह सीजन है जब नई उपज के आने से बाजार में दलहन, तिलहन और गेहूं की कीमतें सबसे कम होती हैं। गेहूं के भाव में अब ही प्रति क्विंटल चार सौ रुपये तक तेजी आ चुकी है।
आने वाले दिनों में महंगाई पर नियंत्रण के लिए कदम न उठाए गए तो किसानों और आम परिवारों के लिए दाल-रोटी का जुगाड़ भी मुश्किल हो जाएगा। विशेश्वरगंज सहित पूर्वांचल की थोक मंडियों में मौके की नजाकत भांप जमाखोर भी सक्रिय हो गए हैं। 
अनाज कारोबारियों के मुताबिक अप्रैल में अमूमन दलहन, तिलहन के दाम गिरते हैं। गेहूं की नई उपज आने से उसके भी रेट कम हो जाते हैं लेकिन अबकी बेमौसम बारिश से फसलों के बर्बाद होने से कीमतों पर तगड़ा असर पड़ा है। पूर्वांचल की सबसे बड़ी मंडी विशेश्वरगंज में बिगड़े मौसम के चलते कारोबार में गिरावट आई है।

 खरीदार बहुत कम आ रहे हैं। इस बीच, अनाज की कीमतों में पिछले कुछ दिनों में अचानक तेजी आ गई है। महंगाई का सबसे अधिक असर अनाज पर पड़ा है। आने वाले दिनों में दाल, सरसों तेल और आटा आदि की कीमतें और बढ़ सकती हैं। मवेशियों के भूसे का प्रबंध भी अबकी मुश्किल होगा। खेत में ही फसल नष्ट होने से किसानों के हाथ न उपज आई न भूसा। ऐसे में अबकी भूसे की कीमतें भी आसमान छू सकती हैं।

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