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फुटकर के चक्कर में खेती घनचक्कर
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 17 Nov 2016 02:13 AM IST
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विकास भवन स्थित यूनियन बैंक के बाहर रुपया निकालने के लिए जुटे लोग।
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चंद दिन पहले तक गेहूं की बुआई की तैयारी में लगे किसानों के पास अब जुताई देने के लिए पैसे नहीं है। ट्रैक्टर वाले शुरू में तो कुछ दिन जुताई किए मगर अब नहीं कर रहे हैं। फुटकर के चक्कर में खेती घनचक्कर हो गई है। किसान दिन भर बैंक में नए नोट लेने और पुराने बदलने जा रहे हैं और इससे आलू और मटर की बुआई सबसे जादा प्रभावित हुई है। दरेखू निवासी सुधाकर पांडेय ने बताया कि परेशानी तो हो रही है लेकिन इससे अगर देश का भला होता है तो सहन कर लेंगे। बैरवन के मेवा पटेल और वीरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि खेत की जुताई, खाद और बीज के लिए पैसे की किल्लत के कारण सब ठप पड़ा है। फिर भी अगर इससे देश का कल्याण होगा तो कोई दिक्कत नहीं। जाल्हूपुर निवासी प्यारे लाल यादव का कहना है कि गेंहू की बुआई के लिए खेतों का पलेवा हो चुका है। ग्रामीण बैक से पैसा नहीं निकल पाने के कारण खेत की जुताई और गेहूं का बीज व खाद नहीं मिल पा रहा है। घर में 500 के नोट हैं लेकिन साधन सहकारी समितियां और निजी दूकानदार इन्हें लेने के लिए तैयार नहीं है। बजरंगी बबलू कहते हैं कि ऐसे मे रबी की फसल प्रभावित होगी।
पिंडरा गांव के गामा यादव का कहना है कि आलू, चना और मटर बोने के लिए खेत को तैयार किया था। बैंक में तीन दिन से लाइन में लग रहे हैं लेकिन नंबर आने से पहले पैसा खत्म हो गया। किसान सुरेश का कहना है कि बैंक से पैसा न मिलने के कारण खेत परती है। भावुक होकर अमरनाथ पाठक बोले, मोदी के फैसले से बुआई में देर हो रही है। चोलापुर के किसान रामलाल ने कहा कि नोट बंद होने के बाद बुआई करें कि नोट बदलवाएं। चिरईगांव के किसान मंगरू पटेल ने बताया कि दिक्कत बढ़ गई है। आराजीलाइन के किसान जगदीश सिंह कहते हैं कि जब जरूरत और मौसम चला जाएगा तो पैसा किस काम आएगा।
यही नहीं, इन दिनों सूद पर पैसा देने वाले भी भय के कारण उधार देने से बच रहे हैं। वहीं बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है। अब दुकानदारों ने भी उधार देना बंद कर दिया है। चोलापुर क्षेत्र के धनंजय, श्यामजी, रमेश और संजय ने बताया कि अब घर में रखे गेहूं-चावल आदि सामान के बदले अन्य उपयोगी सामान खरीदने को मजबूर हैं। अल्लोपुर निवासी दूकानदार निरहू साव ने बताया कि वह रोजमर्रा के ग्राहकों को बस मजबूरी में उधार दे रहे हैं। चौबेपुर क्षेत्र के भी किसानों को खेती बर्बाद होने की चिंता सता रही है। कादीपुर कला के किसान रमाशंकर मौर्या, अजांव के मदन गोपाल उपाध्याय, कन्हैया यादव, भंदहा कला के घनश्याम सिंह, गरथौली के सुनील चौबे, कादीपुर के राजकुमार दूबे और खारूपुर के सुनील चौबे का कहना है कि कोई उधार देने तक को तैयार नहीं है। टैक्टर वाला बिना पैसे के खेत जोतने से इनकार कर रहा है तो ट्यूबवेल वाला सिंचाई के लिए पानी देने से। कई लोगों ने पलेवा तो कर दिया है लेकिन खाद-बीज न खरीद पाने के कारण बुवाई नहीं कर सके।
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आराजीलाइन क्षेत्र के किसान बिल्कुल अलग तरह की बात कहते हैं। कहते हैं कि हम गांव वालों की खेती-किसानी व्यापारियों के साथ संबंधों पर चलती है। ट्रैक्टर से जुताई-बुआई व दुकान से खाद पंप से पानी सब किसानों के व्यवहार से हो जाता है। जब फसल हो जाती है तो किसान अन्न बेचकर दुकानदार की भरपाई कर देते है। प्रगतिशील किसान रामलाल वर्मा, नरेंद्र मिश्रा, मनोज पटेल, जयप्रकाश सिंह कहते है कि खेत की जुताई-बुआई सब आसानी से हो रहा है। रामलाल तो यह भी कहते हैं कि गत साल बीएचयू व अन्य संस्थानों से अच्छे बीज मिल गए थे। किसान उनसे बीजोत्पादन कर औरों को भी दे रहे हैं।
नोट बंदी से रमना का सेम बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। रमना में पैदा होने वाले सेम का व्यापार मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, पटना से व्यापारी आकर यहां रुकते हैं और सेम खरीद कर ट्रकों से भेजते हैं। पुराने नोट पर पाबंदी लगने से व्यापारी किसानों से लाखों का माल उधार ले जा रहे हैं। रमना गांव में सेम की पैदावार करने वाले किसानाें की संख्या लगभग आठ हजार है। अमित पटेल ने बताया कि इस साल बाढ़ ने फसलों को पहले ही तबाह कर दिया था। जो बचा था, वह नोट बंदी से प्रभावित हो रहा है। सेम की खेती से जुड़े बड़े किसान जग्गू पटेल, राजनारायण पटेल, किसन पटेल, महेंद्र पटेल ने बताया कि 2000 से 2200 रुपये क्विंटल की दर से बिक रहे सेम के धंधे में बड़े नोट पर रोक लगने से समस्या आ रही है।
पिंडरा गांव के गामा यादव का कहना है कि आलू, चना और मटर बोने के लिए खेत को तैयार किया था। बैंक में तीन दिन से लाइन में लग रहे हैं लेकिन नंबर आने से पहले पैसा खत्म हो गया। किसान सुरेश का कहना है कि बैंक से पैसा न मिलने के कारण खेत परती है। भावुक होकर अमरनाथ पाठक बोले, मोदी के फैसले से बुआई में देर हो रही है। चोलापुर के किसान रामलाल ने कहा कि नोट बंद होने के बाद बुआई करें कि नोट बदलवाएं। चिरईगांव के किसान मंगरू पटेल ने बताया कि दिक्कत बढ़ गई है। आराजीलाइन के किसान जगदीश सिंह कहते हैं कि जब जरूरत और मौसम चला जाएगा तो पैसा किस काम आएगा।
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यही नहीं, इन दिनों सूद पर पैसा देने वाले भी भय के कारण उधार देने से बच रहे हैं। वहीं बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है। अब दुकानदारों ने भी उधार देना बंद कर दिया है। चोलापुर क्षेत्र के धनंजय, श्यामजी, रमेश और संजय ने बताया कि अब घर में रखे गेहूं-चावल आदि सामान के बदले अन्य उपयोगी सामान खरीदने को मजबूर हैं। अल्लोपुर निवासी दूकानदार निरहू साव ने बताया कि वह रोजमर्रा के ग्राहकों को बस मजबूरी में उधार दे रहे हैं। चौबेपुर क्षेत्र के भी किसानों को खेती बर्बाद होने की चिंता सता रही है। कादीपुर कला के किसान रमाशंकर मौर्या, अजांव के मदन गोपाल उपाध्याय, कन्हैया यादव, भंदहा कला के घनश्याम सिंह, गरथौली के सुनील चौबे, कादीपुर के राजकुमार दूबे और खारूपुर के सुनील चौबे का कहना है कि कोई उधार देने तक को तैयार नहीं है। टैक्टर वाला बिना पैसे के खेत जोतने से इनकार कर रहा है तो ट्यूबवेल वाला सिंचाई के लिए पानी देने से। कई लोगों ने पलेवा तो कर दिया है लेकिन खाद-बीज न खरीद पाने के कारण बुवाई नहीं कर सके।
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आराजीलाइन क्षेत्र के किसान बिल्कुल अलग तरह की बात कहते हैं। कहते हैं कि हम गांव वालों की खेती-किसानी व्यापारियों के साथ संबंधों पर चलती है। ट्रैक्टर से जुताई-बुआई व दुकान से खाद पंप से पानी सब किसानों के व्यवहार से हो जाता है। जब फसल हो जाती है तो किसान अन्न बेचकर दुकानदार की भरपाई कर देते है। प्रगतिशील किसान रामलाल वर्मा, नरेंद्र मिश्रा, मनोज पटेल, जयप्रकाश सिंह कहते है कि खेत की जुताई-बुआई सब आसानी से हो रहा है। रामलाल तो यह भी कहते हैं कि गत साल बीएचयू व अन्य संस्थानों से अच्छे बीज मिल गए थे। किसान उनसे बीजोत्पादन कर औरों को भी दे रहे हैं।
नोट बंदी से रमना का सेम बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। रमना में पैदा होने वाले सेम का व्यापार मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, पटना से व्यापारी आकर यहां रुकते हैं और सेम खरीद कर ट्रकों से भेजते हैं। पुराने नोट पर पाबंदी लगने से व्यापारी किसानों से लाखों का माल उधार ले जा रहे हैं। रमना गांव में सेम की पैदावार करने वाले किसानाें की संख्या लगभग आठ हजार है। अमित पटेल ने बताया कि इस साल बाढ़ ने फसलों को पहले ही तबाह कर दिया था। जो बचा था, वह नोट बंदी से प्रभावित हो रहा है। सेम की खेती से जुड़े बड़े किसान जग्गू पटेल, राजनारायण पटेल, किसन पटेल, महेंद्र पटेल ने बताया कि 2000 से 2200 रुपये क्विंटल की दर से बिक रहे सेम के धंधे में बड़े नोट पर रोक लगने से समस्या आ रही है।