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संपूर्णानंद के पास बनेगा नया बिजली उपकेंद्र
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शहर की बिजली व्यवस्था दुरुस्त कराने के लिए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की ओर से एक नया उपकेंद्र बनाया जाएगा। इसके लिए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पास जमीन की तलाश कर ली गई है। इसके बनने से शहर में होने वाली ट्रिपिंग वह अन्य समस्याओं से निजात मिलेगी। साथ ही इस उपकेंद्र के बनने से कई फीडरों को डबल लाइन मिल जाएगी।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अधीक्षण अभियंता द्वितीय दीपक अग्रवाल ने बताया कि पारेषण के अधिकारियों के साथ संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की सरकारी जमीन देखी गई है। अप्रूवल मिलते ही आगे का काम शुरू हो जाएगा। टेंडर प्रक्रिया फाइनल करने के बाद इसे बनने में तकरीबन 2 साल लगेंगे। यह 220/33 केवी का उपकेंद्र होगा। इस उपकेंद्र बनने से शहर के साथ साथ आजमगढ़, गाजीपुर, चंदौली और जौनपुर सहित पूरे पूर्वांचल को लाभ होगा। फिलहाल, सारनाथ स्थित 400 केवी उपकेंद्र से बनारस को आपूर्ति की जाती है। साहूपुरी स्थित 220 केवी क्षमता वाले उपकेंद्र पर लोड काफी ज्यादा है। शहर में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए बने उपकेंद्रों के लोड को आपस में बांट दिया जाएगा। इसके अलावा सभी विद्युत उपकेंद्रों में नियमित मुख्य बिजली आपूर्ति लाइन के साथ-साथ दूसरी आपूर्ति लाइन भी होगी, ताकि किसी भी परिस्थिति में बिजली आपूर्ति बाधित ना हो सके। अभी मुख्य आपूर्ति लाइन में खराबी आने पर पूरा विद्युत उपकेंद्र बंद हो जाता है, लेकिन नई व्यवस्था से न तो समस्या ढूंढने में परेशानी होगी और न ही बिजली आपूर्ति बाधित होगी। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के मुख्य अभियंता मनोज अग्रवाल ने बताया कि अभी जमीन तलाशी गई है । आगे की कार्यवाही जल्द पूरी की जाएगी।
उपकेंद्र बनने से होने वाले फायदे
-एक उपकेंद्र से कवर होंगे आसपास के कई इलाके
-लाइनें छोटी होने से विद्युत अवरोध नहीं होगा।
-लो वोल्टेज की समस्या नहीं रहेगी।
-लाखों बिजली उपभोक्ता होंगे लाभांवित।
-समस्या आने पर नहीं कटेगी सभी उपभोक्ताओं की बिजली
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पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अधीक्षण अभियंता द्वितीय दीपक अग्रवाल ने बताया कि पारेषण के अधिकारियों के साथ संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की सरकारी जमीन देखी गई है। अप्रूवल मिलते ही आगे का काम शुरू हो जाएगा। टेंडर प्रक्रिया फाइनल करने के बाद इसे बनने में तकरीबन 2 साल लगेंगे। यह 220/33 केवी का उपकेंद्र होगा। इस उपकेंद्र बनने से शहर के साथ साथ आजमगढ़, गाजीपुर, चंदौली और जौनपुर सहित पूरे पूर्वांचल को लाभ होगा। फिलहाल, सारनाथ स्थित 400 केवी उपकेंद्र से बनारस को आपूर्ति की जाती है। साहूपुरी स्थित 220 केवी क्षमता वाले उपकेंद्र पर लोड काफी ज्यादा है। शहर में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए बने उपकेंद्रों के लोड को आपस में बांट दिया जाएगा। इसके अलावा सभी विद्युत उपकेंद्रों में नियमित मुख्य बिजली आपूर्ति लाइन के साथ-साथ दूसरी आपूर्ति लाइन भी होगी, ताकि किसी भी परिस्थिति में बिजली आपूर्ति बाधित ना हो सके। अभी मुख्य आपूर्ति लाइन में खराबी आने पर पूरा विद्युत उपकेंद्र बंद हो जाता है, लेकिन नई व्यवस्था से न तो समस्या ढूंढने में परेशानी होगी और न ही बिजली आपूर्ति बाधित होगी। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के मुख्य अभियंता मनोज अग्रवाल ने बताया कि अभी जमीन तलाशी गई है । आगे की कार्यवाही जल्द पूरी की जाएगी।
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उपकेंद्र बनने से होने वाले फायदे
-एक उपकेंद्र से कवर होंगे आसपास के कई इलाके
-लाइनें छोटी होने से विद्युत अवरोध नहीं होगा।
-लो वोल्टेज की समस्या नहीं रहेगी।
-लाखों बिजली उपभोक्ता होंगे लाभांवित।
-समस्या आने पर नहीं कटेगी सभी उपभोक्ताओं की बिजली