एंबुलेंस सेवा की हकीकत, वह ढाई घंटे तक करता रहा फोन, पर नहीं उठा और.....
मां के गुजर जाने का दर्द एक बेटे से बेहतर दूसरा कौन बता सकता है। कालीमहाल की रहने वाली कुसुम विश्वकर्मा ने समय से इलाज न मिलने के कारण दम तोड़ दिया। मृतका के बेटे रोहित का आरोप है कि वह सरकारी एंबुलेंस सेवा पर घंटों फोन करते ही रह गए लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। किसी तरह वह मां को लेकर पास के एक निजी अस्पताल में पहुंचे तो वहां भर्ती करने से मना कर दिया गया।
मृतका के बेटे रोहित विश्वकर्मा दिल्ली में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और वह लॉक डाउन के दौरान घर पर ही हैं। कुसुम विश्वकर्मा (52) डायलिसिस पर चल रही थीं। बुधवार की शाम सात बजे अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। रोहित ने पहले सरकारी एंबुलेंस सेवा पर कई बार कॉल किया, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। थक हारकर रोहित ने प्राइवेट एंबुलेंस को फोन लगाया, लेकिन उसने भी असमर्थता जताई।
ढाई घंटे के प्रयास के बाद किसी तरह मोहल्ले के आटो को लेकर रोहित पास के निजी चिकित्सालय में पहुंचे। वहां पर इमरजेंसी में कंपाउंडर तैनात था तो उसने दूसरे अस्पताल में भेज दिया। वहां पर उन्हें गेट से वापस भेज दिया गया। इसके बाद वह लोग बीएचयू ट्रॉमा सेंटर पहुंचे, लेकिन वहां से उन्हें बीएचयू सर सुंदरलाल भेजा गया। बीएचयू में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। गुरुवार की सुबह मणिकर्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।