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बगदाद के उलेमा ने काशी में पढ़ाई जुमे की नमाज
Varanasi
Updated Sat, 27 Apr 2013 05:30 AM IST
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वाराणसी। हबीबपुरा पितरकुंडा स्थित मस्जिद हकीम सलामत अली में बगदाद के उलेमा के पीछे जुमे की नमाज अदा करने को लोग उमड़ पड़े। मस्जिद नमाजियों से खचाखच भरी रही। नमाज के बाद मुल्क की खुशहाली और अमन-चैन के लिए दुआएं मांगी गई और लोगों को मिल्लत के साथ रहने की नसीहत दी गई।
मस्जिद में जुमे की नमाज के लिए लोग सुबह 10:00 बजे से ही जुटने लगे थे। बगदाद से आए गौसुल आजम पीराने पीर हजरत अब्दुल कादिर जीलानी रह. के वंशज अल्लामा सैयद महमूद पाशा कादरी ने ठीक एक बजे खुत्बा शुरू किया और फिर जुमे की नमाज अदा कराई। इससे पूर्व, संक्षिप्त तकरीर में उन्होंने लोगों से अल्लाह और उसके रसूल के बताए रास्ते पर चलने, आपस में मिल्लत के साथ रहने की नसीहत दी। कहा कि इस्लाम शांति का पैगाम देने वाला मजहब है। नमाज में मुसलमानों की सुरक्षा, उन्हें नेक रास्ते पर चलाने और मुल्क की खुशहाली और तरक्की के लिए दुआएं की गईं। नमाज के बाद सलातो सलाम का नजराना पेश किया गया। फिर लोग उलेमाओं से मुसाफा (इस्लामी तरीके से हाथ मिलाना) करने को टूट पड़े।
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मस्जिद में जुमे की नमाज के लिए लोग सुबह 10:00 बजे से ही जुटने लगे थे। बगदाद से आए गौसुल आजम पीराने पीर हजरत अब्दुल कादिर जीलानी रह. के वंशज अल्लामा सैयद महमूद पाशा कादरी ने ठीक एक बजे खुत्बा शुरू किया और फिर जुमे की नमाज अदा कराई। इससे पूर्व, संक्षिप्त तकरीर में उन्होंने लोगों से अल्लाह और उसके रसूल के बताए रास्ते पर चलने, आपस में मिल्लत के साथ रहने की नसीहत दी। कहा कि इस्लाम शांति का पैगाम देने वाला मजहब है। नमाज में मुसलमानों की सुरक्षा, उन्हें नेक रास्ते पर चलाने और मुल्क की खुशहाली और तरक्की के लिए दुआएं की गईं। नमाज के बाद सलातो सलाम का नजराना पेश किया गया। फिर लोग उलेमाओं से मुसाफा (इस्लामी तरीके से हाथ मिलाना) करने को टूट पड़े।
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