पुराने अंकपत्रों की त्रुटि सुधारने पर लगेगा अर्थदंड

Varanasi Updated Wed, 05 Sep 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में अंकपत्र तथा परीक्षा संबंधी किसी प्रकरण की त्रुटि सुधारने के लिए अब पांच से दस हजार रुपये बतौर अर्थदंड देना होगा। वर्ष 2012 से पांच साल पहले तक के मामले में पांच हजार और उससे पहले के प्रकरणों में (2001 तक) दस हजार रुपये अर्थदंड लगेगा। यह फैसला मंगलवार को वाइसचांसलर प्रो. बिंदा प्रसाद मिश्र की अध्यक्षता में हुई बैठक में किया गया।
समिति ने यह फैसला भी किया कि वर्ष 2012 परीक्षा से संबंधित अंकपत्रों की गड़बडि़यों को ठीक करने के लिए छह माह की समयावधि तय की गई। इस अवधि तक यदि विद्यार्थी त्रुटियों को दूर कराता है तो उसके लिए कोई दंड नहीं देना होगा। इसके बाद यदि संशोधन कराने के लिए छात्र आता है तो नियमानुसार दंड सहित विचार किया जाएगा। तय किया गया कि वर्ष 2001 से पहले के मामलों पर किसी प्रकार का भी विचार नहीं किया जाएगा। समिति ने प्रमाणपत्रों के संबंध में भी नियम तय किया। दीक्षांत के उपरांत तीन महीने में प्रमाणपत्र लेने को कहा गया है। इसके बाद 500 रुपये अर्थदंड लेकर प्रमाणपत्र निर्गत किए जाएंगे। यह निर्णय 15 सितंबर से प्रभावी माना जाएगा। समिति ने नौ शोध छात्रों को विभिन्न विभागों-संस्कृत विद्या, पाली एवं थेरवाद, व्याकरण, पूर्व मीमांसा, सामाजिक विज्ञान, पुराणेतिहास, बौद्ध दर्शन एवं आयुर्वेद में शोध उपाधि देने का फैसला किया गया।
समिति ने परीक्षकों को निर्देश दिया कि मौखिक परीक्षा के अंक चिट की तीन प्रतियों में से प्रथम प्रति कुलसचिव, द्वितीय प्रति उप कुलसचिव परीक्षा तथा तृतीय प्रति केंद्राध्यक्ष को दी जाए। इस क्रम में केंद्राध्यक्ष उत्तर पुस्तिका जमा करने के लिए जब विश्वविद्यालय आएं तो वे उस प्रति को जमा कर दें। बैठक में प्रो. गंगाधर पंडा, प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. यदुनाथ प्रसाद दुबे, प्रो. शारदा चतुर्वेदी, प्रो. सदानंद शुक्ल, प्रो. अशोक मिश्र, कुलसचिव प्रभाष द्विवेदी, लालजी मिश्र, उप कुलसचिव परीक्षा महेंद्र कुमार उपस्थित थे।

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