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गायन, वादन और नृत्य से मदहोश हुए संगीतप्रेमी
Varanasi
Updated Sat, 05 May 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। पद्मविभूषण पंडित किशन महाराज की पुण्य तिथि संगीतोत्सव के रूप में मनाई गई। गायन, वादन और नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियों से पंडित जी को श्रद्घांजलि दी गई। देर रात तक स्वरलहरियों से समारोह स्थल गुंजायमान रहा।
नागरी नाटक मंडली में शुक्रवार को श्री सतगुरु जगजीत सिंह जी महाराज के सौजन्य और संगीत सभा काशी द्वारा आयोजित विश्व विख्यात तबले के जादूगर पं. किशन महाराज की चौथी पुण्य तिथि पर आयोजित संगीतोत्सव का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि मधुसूदन पटले अहमदाबाद ने किया। कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति दिल्ली से आए सितार वादक गुरुदयाल सिंह नामधारी ने राग पूरिया धनाश्री में मध्य लय और झपताल में दी। दूसरी प्रस्तुति द्रुत गत तीन ताल में दी तो लोग वाह-वाह कर उठे। तबले पर संगत राजेश कुमार मालवीय ने किया। दूसरी प्रस्तुति में मुंबई की मीनल नाटू ने राग यमन में हे री माई कासे कहूं और राग बागेश्वरी में आज मोरी काहे रोकी बाट पेश की। तबले पर प्रशांत गायकवाड़ और हारमोनियम पर जमुना बल्लभ दास गुजराती तथा तानपूरे पर तनु श्री ने संगत की।
इसके बाद सुश्री हेतल मेहता जोशी ने स्वतंत्र तबला वादन ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने उठान, चरणधारी, कायदा, बाट, रेला, गत, फर्द, टुकड़ा और बनारस घराने की बंदिशें पेश की। वहीं, पंडित शिवनाथ मिश्र और देवव्रत मिश्र के सितार वादन ने समारोह को स्वरलरियों से सराबोर कर दिया। तबले पर पूरण मिश्र और प्रशांत मिश्र ने संगत की। संचालन प्रतिमा सिन्हा ने किया। इस दौरान दयाशंकर मिश्र दयालू, जवाहर लाल शास्त्री, अनिल मिश्रा, अंजलि मिश्रा, राम अवतार पांडेय और गंगा सहाय पांडेय समेत काफी संख्या में संगीत प्रेमी मौजूद थे।
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नागरी नाटक मंडली में शुक्रवार को श्री सतगुरु जगजीत सिंह जी महाराज के सौजन्य और संगीत सभा काशी द्वारा आयोजित विश्व विख्यात तबले के जादूगर पं. किशन महाराज की चौथी पुण्य तिथि पर आयोजित संगीतोत्सव का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि मधुसूदन पटले अहमदाबाद ने किया। कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति दिल्ली से आए सितार वादक गुरुदयाल सिंह नामधारी ने राग पूरिया धनाश्री में मध्य लय और झपताल में दी। दूसरी प्रस्तुति द्रुत गत तीन ताल में दी तो लोग वाह-वाह कर उठे। तबले पर संगत राजेश कुमार मालवीय ने किया। दूसरी प्रस्तुति में मुंबई की मीनल नाटू ने राग यमन में हे री माई कासे कहूं और राग बागेश्वरी में आज मोरी काहे रोकी बाट पेश की। तबले पर प्रशांत गायकवाड़ और हारमोनियम पर जमुना बल्लभ दास गुजराती तथा तानपूरे पर तनु श्री ने संगत की।
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इसके बाद सुश्री हेतल मेहता जोशी ने स्वतंत्र तबला वादन ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने उठान, चरणधारी, कायदा, बाट, रेला, गत, फर्द, टुकड़ा और बनारस घराने की बंदिशें पेश की। वहीं, पंडित शिवनाथ मिश्र और देवव्रत मिश्र के सितार वादन ने समारोह को स्वरलरियों से सराबोर कर दिया। तबले पर पूरण मिश्र और प्रशांत मिश्र ने संगत की। संचालन प्रतिमा सिन्हा ने किया। इस दौरान दयाशंकर मिश्र दयालू, जवाहर लाल शास्त्री, अनिल मिश्रा, अंजलि मिश्रा, राम अवतार पांडेय और गंगा सहाय पांडेय समेत काफी संख्या में संगीत प्रेमी मौजूद थे।
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