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संघरत्न संतलाल ने किया देहदान
Varanasi
Updated Thu, 11 Sep 2014 05:31 AM IST
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वाराणसी। संघरत्न संतलाल का पार्थिव शरीर बुधवार को उनके पुत्र कृष्णायन ने बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान को सौंपा । अपने पिता की इच्छा को पूरा करते हुए उन्होंने मेडिकल स्टूडेंट्स के अध्ययन के उद्देश्य से देहदान किया।
जानकारी के मुताबिक लंबे समय से कैंसर से पीडि़त संतलाल का मंगलवार को रेलवे कैंसर संस्थान में निधन हो गया था। उनके बेटे कृष्णायन ने बताया कि आजमगढ़ में जन्में उनके पिता बचपन से ही समाज के गरीब, पिछड़ों और दलिकों को हक दिलाने के लिए संघर्ष करते रहे। डा. भीमराव अंबेडकर के अनुयायी रहे। 14 अक्तूबर 1994 को उन्होंने बौद्ध धर्म स्वीकर कर लिया था। अंतिम दिनों में आजमगढ़ में बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में लगे रहे। पूर्व सांसद बलिहारी बाबू ने भी संतलाल जी के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि मरणोपरांत देहदान कर उन्होंने अपनी सामाजिक सेवा की प्रतिबद्धता को दोहराया है।
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जानकारी के मुताबिक लंबे समय से कैंसर से पीडि़त संतलाल का मंगलवार को रेलवे कैंसर संस्थान में निधन हो गया था। उनके बेटे कृष्णायन ने बताया कि आजमगढ़ में जन्में उनके पिता बचपन से ही समाज के गरीब, पिछड़ों और दलिकों को हक दिलाने के लिए संघर्ष करते रहे। डा. भीमराव अंबेडकर के अनुयायी रहे। 14 अक्तूबर 1994 को उन्होंने बौद्ध धर्म स्वीकर कर लिया था। अंतिम दिनों में आजमगढ़ में बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में लगे रहे। पूर्व सांसद बलिहारी बाबू ने भी संतलाल जी के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि मरणोपरांत देहदान कर उन्होंने अपनी सामाजिक सेवा की प्रतिबद्धता को दोहराया है।
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