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मेले के साथ उठाया गुड्डी लड़इया का लुत्फ
Varanasi
Updated Fri, 23 May 2014 05:31 AM IST
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वाराणसी। गाजी मियां का घुमंतू मेला गुरुवार को बेनियाबाग में लगा। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों ने शिरकत की। बच्चे झूला झूले और महिलाओं ने भी स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ उठाया। उधर, शाम को गुड्डी लड़इया में खूब पेंच लड़े और भक्काटे की आवाज बेनिया में गूंजती रही।
सैयद सालार मसऊद गाजी मियां के 18 मई को हुए तीन दिवसीय मेले के बाद नगर के कई मुस्लिम बहुल इलाकों में घुमंतू मेले की शुरुआत हुई। इसी क्रम में गुरुवार को बेनियाबाग में मेला लगा। हालांकि तीखी धूप के चलते मेले में रौनक तो शाम को हुई लेकिन सुबह से ही यहां मेले की शुरुआत हो गई थी। शाम को बच्चों के झुंड चहकते हुए मेले में पहुंचने लगे। फिर क्या था, जहां चर्खी झूले गुलजार हो गए तो वहीं मेले में भीड़ बढ़ने लगी। महिलाओं के भी आ जाने से मेला देर शाम तक अपने शबाब पर जा पहुंचा। चाट पकौड़ी और सौंदर्य प्रसाधन की दुकानों पर महिलाएं उमड़ पड़ीं। वहीं बच्चे झूला तो झूले ही खिलौने लेने के लिए भी मचल उठे। देर शाम तक लोग मेले का लुत्फ उठाते रहे।
उधर, इससे पूर्व अपराह्न में धूप की तपिश कम हुई तो पतंगबाज आ जमे। फिर शुरू हुआ आकाश में गुड्डी लड़इया का नजारा। पतंग और डोर के साथ पतंगबाजों ने जब अपने जौहर दिखाने शुरू किए तो बेनिया का मैदान ‘भक्काटे’ की आवाजों से गूंजने लगा। जब कोई पतंग कटती तो उसे लूटने के लिए कई लड़के एक साथ दौड़ पड़ते।
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सैयद सालार मसऊद गाजी मियां के 18 मई को हुए तीन दिवसीय मेले के बाद नगर के कई मुस्लिम बहुल इलाकों में घुमंतू मेले की शुरुआत हुई। इसी क्रम में गुरुवार को बेनियाबाग में मेला लगा। हालांकि तीखी धूप के चलते मेले में रौनक तो शाम को हुई लेकिन सुबह से ही यहां मेले की शुरुआत हो गई थी। शाम को बच्चों के झुंड चहकते हुए मेले में पहुंचने लगे। फिर क्या था, जहां चर्खी झूले गुलजार हो गए तो वहीं मेले में भीड़ बढ़ने लगी। महिलाओं के भी आ जाने से मेला देर शाम तक अपने शबाब पर जा पहुंचा। चाट पकौड़ी और सौंदर्य प्रसाधन की दुकानों पर महिलाएं उमड़ पड़ीं। वहीं बच्चे झूला तो झूले ही खिलौने लेने के लिए भी मचल उठे। देर शाम तक लोग मेले का लुत्फ उठाते रहे।
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उधर, इससे पूर्व अपराह्न में धूप की तपिश कम हुई तो पतंगबाज आ जमे। फिर शुरू हुआ आकाश में गुड्डी लड़इया का नजारा। पतंग और डोर के साथ पतंगबाजों ने जब अपने जौहर दिखाने शुरू किए तो बेनिया का मैदान ‘भक्काटे’ की आवाजों से गूंजने लगा। जब कोई पतंग कटती तो उसे लूटने के लिए कई लड़के एक साथ दौड़ पड़ते।
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