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मुख्तार को लड़ाने पर कौएद नेता एकमत नहीं
Varanasi
Updated Sat, 29 Mar 2014 05:31 AM IST
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वाराणसी। कौमी एकता दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने विधायक मुख्तार अंसारी को घोषी संसदीय सीट से लड़ाने का निर्णय लिया है जबकि वाराणसी सीट से उनकी उम्मीदवारी पर पार्टी में एकराय नहीं है। पार्टी उनके नरेंद्र मोदी के खिलाफ साझा प्रत्याशी के रूप में उतारना चाहती है। सेक्यूलर दल किसी और को चुनाव लड़ाते हैं तो पार्टी उसका समर्थन करेगी। इस बारे में संभावना तलाशने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है।
गाजीपुर जिले के युसुफपुर मोहम्मदाबाद में गुरुवार को हुई बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष अफजाल अंसारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में भदोही से रामसागर बिंद और घोषी से मुख्तार अंसारी को लड़ाने का निर्णय लिया गया। बैठक में मुख्तार को वाराणसी सीट से चुनाव लड़ाने के मुद्दे पर आजमगढ़, मऊ, बलिया और देवरिया के पदाधिकारियों ने इस पर आपत्ति जताई। कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष एमएस मुजाहिद और प्रदेश अध्यक्ष स्बिाहुद्दीन अहमद के बैठक में मौजूद नहीं होने के कारण सीट पर उनकी उम्मीदवारी का अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अतहर जमाल लारी, ओंकार पटेल और मीडिया प्रभारी शिवकुमार राय की तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया जो कांग्रेस, सपा, बसपा जैसे सेक्यूलर दरों से बातचीत कर मुख्तार को साझा उम्मीदवार के रूप में नरेंद्र मोदी के खिलाफ उतारने पर राजी करेगी क्योकि वर्ष 2009 के चुनाव में वह दूसरे नंबर पर थे। यदि दूसरी पार्टियां किसी और को साझा उम्मीदवार बनाने पर राजी होती हैं तो उसे कौएद भी समर्थन देगी।
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गाजीपुर जिले के युसुफपुर मोहम्मदाबाद में गुरुवार को हुई बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष अफजाल अंसारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में भदोही से रामसागर बिंद और घोषी से मुख्तार अंसारी को लड़ाने का निर्णय लिया गया। बैठक में मुख्तार को वाराणसी सीट से चुनाव लड़ाने के मुद्दे पर आजमगढ़, मऊ, बलिया और देवरिया के पदाधिकारियों ने इस पर आपत्ति जताई। कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष एमएस मुजाहिद और प्रदेश अध्यक्ष स्बिाहुद्दीन अहमद के बैठक में मौजूद नहीं होने के कारण सीट पर उनकी उम्मीदवारी का अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अतहर जमाल लारी, ओंकार पटेल और मीडिया प्रभारी शिवकुमार राय की तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया जो कांग्रेस, सपा, बसपा जैसे सेक्यूलर दरों से बातचीत कर मुख्तार को साझा उम्मीदवार के रूप में नरेंद्र मोदी के खिलाफ उतारने पर राजी करेगी क्योकि वर्ष 2009 के चुनाव में वह दूसरे नंबर पर थे। यदि दूसरी पार्टियां किसी और को साझा उम्मीदवार बनाने पर राजी होती हैं तो उसे कौएद भी समर्थन देगी।
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