{"_id":"140-123309","slug":"Varanasi-123309-140","type":"story","status":"publish","title_hn":"झमाझम बारिश में बांसुरी के जादूगर ने छेड़ी तान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
झमाझम बारिश में बांसुरी के जादूगर ने छेड़ी तान
Varanasi
Updated Fri, 28 Feb 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। बांसुरी के जादूगर पद्मविभूषण पं. हरिप्रसाद चौरसिया को सुनने के लिए गुरुवार की रात सैकड़ों संगीत प्रेमी झमाझम बारिश में भीगने के बाद भी जमे रहे। पानी के दबाव से पंडाल टूटने के बाद कुछ लोगों ने मंच पर ही जगह बनाई तो कुछ लोग आसपास के बारजों, छतों के नीचे जम गए। इस दौरान बांसुरी पर राग बागेश्वरी की जब अवतारणा हुई तब लोगों ने आनंद की बारिश का सुखद एहसास भी किया। मौका था दुर्गाकुंड स्थित हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय में शिवरात्रि संगीत समारोह की दूसरी निशा का।
कथक सम्राट पं. बिरजू महाराज की पुत्री ममता ने भी अपने पावों की थाप और थिरकन से इस निशा को यादगार बनाया। शिव स्तुति के बाद उन्होंने तीन ताल में पुरानी आमद से नृत्य शुरू किया। गत निकास, छोटी-छोटी तिहाइयों के बाद उन्होंने पुरानी आमद की बोल पर नृत्य किया। इसमें राधा को पकड़ने के लिए कृष्ण बरजोरी करते हैं और राधा छुड़ाती हुई भागती हैं। इसी दौरान बारिश शुरू हो गई लेकिन उन्होंने तबले के ताल और घुंघरू के बोल के समन्वय से श्रोताओं को बांधे रखा। इसके बाद शिव के दिग-दिग ताल रूपी डमरू और कन्हा की ता थई की पदचाप पर सधे अंदाज में थिरककर लोगों को बरबस मुरीद बनाया। परमेलु में निबद्ध शिव-पार्वती के मिलन की भावपूर्ण बंदिश के बाद कामदेव की भी उन्होंने प्रस्तुति की। अहिल्या उद्धार की कथा को भी थाप और घुंघरूओं की झनकार में अभिव्यक्त किया। इनके साथ तबले पर जयकिशन, सारंगी पर गुलाम वारिस, सितार पर नीरज मिश्र और बोल पढ़ंत पर अनिर्वाण भट्टाचार्य ने संगत की।
रात करीब सवा 10 बजे पं. हरि प्रसाद ने बांसुरी पर फूंक मारी। राग बागेश्वरी की अवतारणा कर उन्होंने अलाप के बाद विलंबित, द्रुत लय की बंदिशें बजाईं। इसके बाद इसी राग को रूपक ताल में निबद्ध कर वे स्वरों का मिठास हर अंतस में घोल गए। इनके साथ तबले पर शुभंकर बनर्जी, पखावज पर पं. भवानी शंकर ने संगत की। बांसुरी पर सहयोग दिया उनकी शिष्या देवप्रिया ने। इनसे पहले आदित्य कुमार मिश्र और कृष्ण कुमार उपाध्याय ने तीन ताल में तबले पर युगलबंदी की। कायदा, टुकड़ा, रेला, परन, टुकड़ा, चक्करदार के बाद ना धिं धिं ना की प्रस्तुति की। हारमोनियम पर अमन जैन ने लहरा दिया। इनके बाद भगीरथ जालान ने राग केदार में झप ताल में निबद्ध बंदिश-शिवाकांत शंभो... की प्रस्तुति की। दूसरी बंदिश राग राग चांदनी में थी- डारि-डारि वन बोलन लागी....। राग तिलक कामोद में ठुमरी की बंदिश -रोको ना डगर मेरो श्याम...से उन्होंने समां बांधा। तबले पर ललित कुमार, हारमोनियम पी. रमेश पोखरियाल ने संगत की। इस मौके पर प्रसिद्ध कथा मर्मज्ञ पं.रमेश भाई ओझा ने कलाकारों को अंगवस्त्रम ओढ़ाकर सम्मानित किया। संचालन किया गीतकार पं. हरिराम द्विवेदी ने।
विज्ञापन
इनसेट
हरिप्रसाद ने भगवान का जताया शुक्रिया
वाराणसी। हनुमान प्रसाद पोद्दार अंधविद्यालय में प्रस्तुति के दौरान बारिश पर पं. हरिप्रसाद चौरसिया ने भगवान का शुक्रिया जताया। उनका कहना था कि ईश्वर की कृपा है कि उन्होंने बारिश से मेरे और श्रोताओं के प्रेम को और बढ़ा दिया।
विज्ञापन
कथक सम्राट पं. बिरजू महाराज की पुत्री ममता ने भी अपने पावों की थाप और थिरकन से इस निशा को यादगार बनाया। शिव स्तुति के बाद उन्होंने तीन ताल में पुरानी आमद से नृत्य शुरू किया। गत निकास, छोटी-छोटी तिहाइयों के बाद उन्होंने पुरानी आमद की बोल पर नृत्य किया। इसमें राधा को पकड़ने के लिए कृष्ण बरजोरी करते हैं और राधा छुड़ाती हुई भागती हैं। इसी दौरान बारिश शुरू हो गई लेकिन उन्होंने तबले के ताल और घुंघरू के बोल के समन्वय से श्रोताओं को बांधे रखा। इसके बाद शिव के दिग-दिग ताल रूपी डमरू और कन्हा की ता थई की पदचाप पर सधे अंदाज में थिरककर लोगों को बरबस मुरीद बनाया। परमेलु में निबद्ध शिव-पार्वती के मिलन की भावपूर्ण बंदिश के बाद कामदेव की भी उन्होंने प्रस्तुति की। अहिल्या उद्धार की कथा को भी थाप और घुंघरूओं की झनकार में अभिव्यक्त किया। इनके साथ तबले पर जयकिशन, सारंगी पर गुलाम वारिस, सितार पर नीरज मिश्र और बोल पढ़ंत पर अनिर्वाण भट्टाचार्य ने संगत की।
विज्ञापन
रात करीब सवा 10 बजे पं. हरि प्रसाद ने बांसुरी पर फूंक मारी। राग बागेश्वरी की अवतारणा कर उन्होंने अलाप के बाद विलंबित, द्रुत लय की बंदिशें बजाईं। इसके बाद इसी राग को रूपक ताल में निबद्ध कर वे स्वरों का मिठास हर अंतस में घोल गए। इनके साथ तबले पर शुभंकर बनर्जी, पखावज पर पं. भवानी शंकर ने संगत की। बांसुरी पर सहयोग दिया उनकी शिष्या देवप्रिया ने। इनसे पहले आदित्य कुमार मिश्र और कृष्ण कुमार उपाध्याय ने तीन ताल में तबले पर युगलबंदी की। कायदा, टुकड़ा, रेला, परन, टुकड़ा, चक्करदार के बाद ना धिं धिं ना की प्रस्तुति की। हारमोनियम पर अमन जैन ने लहरा दिया। इनके बाद भगीरथ जालान ने राग केदार में झप ताल में निबद्ध बंदिश-शिवाकांत शंभो... की प्रस्तुति की। दूसरी बंदिश राग राग चांदनी में थी- डारि-डारि वन बोलन लागी....। राग तिलक कामोद में ठुमरी की बंदिश -रोको ना डगर मेरो श्याम...से उन्होंने समां बांधा। तबले पर ललित कुमार, हारमोनियम पी. रमेश पोखरियाल ने संगत की। इस मौके पर प्रसिद्ध कथा मर्मज्ञ पं.रमेश भाई ओझा ने कलाकारों को अंगवस्त्रम ओढ़ाकर सम्मानित किया। संचालन किया गीतकार पं. हरिराम द्विवेदी ने।
विज्ञापन
इनसेट
हरिप्रसाद ने भगवान का जताया शुक्रिया
वाराणसी। हनुमान प्रसाद पोद्दार अंधविद्यालय में प्रस्तुति के दौरान बारिश पर पं. हरिप्रसाद चौरसिया ने भगवान का शुक्रिया जताया। उनका कहना था कि ईश्वर की कृपा है कि उन्होंने बारिश से मेरे और श्रोताओं के प्रेम को और बढ़ा दिया।