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स्वतंत्रता आंदोलन के साक्ष्य देखने जुटे लोग
Varanasi
Updated Wed, 03 Jul 2013 05:30 AM IST
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रामनगर। ब्रिटिश हुकूमत के फैसलों की प्रतियां, दुर्लभ पत्र और तार समेत स्वतंत्रता आंदोलन के साक्ष्यों को देखने के लिए भीड़ जुटी रही। मंगलवार को भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के आवास पर स्वतंत्रता आंदोलन के अभिलेखीय साक्ष्यों की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इसमें प्रतिबंध के बावजूद इलाहाबाद में सभा करने पर शास्त्री जी को सुनाई गई सजा से संबंधित आदेश की प्रति भी देखने को मिली।
मुख्य अतिथि पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त डॉ. ओपी केजरीवाल ने इस प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित ‘म्यूटनी टेलीग्राम’ आकर्षण का केंद्र रहा। इसमें रानी लक्ष्मी बाई के निधन संबंधी सूचना तत्कालीन वायसराय को भेजी गई थी। इसके अलावा शहीद चंद्रशेखर आजाद और अशफाकउल्ला के पत्र भी प्रदर्शनी में लगाए गए थे। इसके पूर्व शास्त्री के संदर्भ में ‘सामाजिक जीवन में व्यवहार का महत्व’ विषयक परिचर्चा हुई। इसमें बीएचयू के प्रो. राकेश पांडेय ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री से प्रेरणा लेकर भ्रष्टाचार और गरीबी को देश से मिटाने का अभियान चलाना चाहिए। इस मौके पर डॉ. प्रेमशंकर पांडेय, आशुतोष सिन्हा, कुलदीप सिंह एवं डॉ. विश्वनाथ ने विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के प्रो. श्रद्धानंद ने की। स्वागत क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र प्रमुख डॉ. रत्नेश वर्मा और धन्यवाद ज्ञापन क्षेत्रीय अभिलेख अधिकारी डॉ. प्रभाकर जौहरी ने किया।
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मुख्य अतिथि पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त डॉ. ओपी केजरीवाल ने इस प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित ‘म्यूटनी टेलीग्राम’ आकर्षण का केंद्र रहा। इसमें रानी लक्ष्मी बाई के निधन संबंधी सूचना तत्कालीन वायसराय को भेजी गई थी। इसके अलावा शहीद चंद्रशेखर आजाद और अशफाकउल्ला के पत्र भी प्रदर्शनी में लगाए गए थे। इसके पूर्व शास्त्री के संदर्भ में ‘सामाजिक जीवन में व्यवहार का महत्व’ विषयक परिचर्चा हुई। इसमें बीएचयू के प्रो. राकेश पांडेय ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री से प्रेरणा लेकर भ्रष्टाचार और गरीबी को देश से मिटाने का अभियान चलाना चाहिए। इस मौके पर डॉ. प्रेमशंकर पांडेय, आशुतोष सिन्हा, कुलदीप सिंह एवं डॉ. विश्वनाथ ने विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के प्रो. श्रद्धानंद ने की। स्वागत क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र प्रमुख डॉ. रत्नेश वर्मा और धन्यवाद ज्ञापन क्षेत्रीय अभिलेख अधिकारी डॉ. प्रभाकर जौहरी ने किया।
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