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स्वाधार गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
Updated Thu, 09 Aug 2018 01:01 AM IST
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लालानगर। मुजफ्फरपुर और देवरिया में संवासिनियों के शारीरिक शोषण की घटनाएं सामने आने के बाद महिला स्वाधार गृहों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। गोपीगंज स्थित जनक समिति महिला स्वाधार केंद्र में भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। न तो सुरक्षाकर्मी की तैनाती है और चहारदीवारी इतनी छोटी है कि कोई भी लांघ सकता है।
किराए के मकान में संचालित हो 2001 से संचालित हो रहे जनक समिति महिला स्वाधार गृह में इस समय 14 संवासिनियां हैं, जिनमें दो मानसिक रूप से बीमार हैं। इनमें पांच बालिग और नौ नाबालिग संवासिनियां हैं। ज्यादातर संवासिनियां जिले के भिन्न-भिन्न थानों से अपहरण के मामलों में यहां भेजी गई हैं। स्वाधार गृह की अधीक्षिका गरिमा सिंह, चौकीदार विमलेश, काउंसलर अर्चना मौर्या, प्रशिक्षिका रिचा वर्मा, लिपिक सुनील, चपरासी बिरजा देवी समेत अन्य कुछ स्टाफ पार्ट टाइम कार्य करते हैं लेकिन सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं हैं। स्वाधार गृह के परिसर की उत्तरी बाउंड्रीवाल बेहद छोटी है। यहां रात्रि में पुलिस ड्यूटी भी नहीं लगाई जाती। ऐसे में संवासिनियों की सुरक्षा पर सवाल उठने लाजिमी हैं। जनपद के सभी थानों से अपहरण, घरेलू हिंसा आदि जटिल केस वाली संवासिनियों का दाखिला यहां किया जाता है, लेकिन मानक के अनुरूप सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। वहीं, स्वाधार गृह की संचालिका डॉ. किरण त्रिपाठी ने बताया किया कि गुमशुदा, घरेलू हिंसा की शिकार कई संवासिनियों को अपने स्तर से उनके पता की जानकारी लेकर पुलिस के सहयोग से घर पहुंचाया है। 2012 और 2018 में दो संवासिनियों की शादी भी करवाई जा चुकी है। घरेलू हिंसा से परेशान महिलाओं के परिवार के लोगों को बुलवाकर सुलह समझौते कराए गए। संस्था में सिलाई बुनाई कढ़ाई पेंटिंग सहित अन्य कई ट्रेनिंग संवासिनियों को दी जाती है। कुछ महीने पूर्व दाखिल दो गर्भवती संवासिनियों के बच्चे भी यहीं पैदा हुए थे, जिनका पालन-पोषण की जिम्मेदारियां भी उठाईं।
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किराए के मकान में संचालित हो 2001 से संचालित हो रहे जनक समिति महिला स्वाधार गृह में इस समय 14 संवासिनियां हैं, जिनमें दो मानसिक रूप से बीमार हैं। इनमें पांच बालिग और नौ नाबालिग संवासिनियां हैं। ज्यादातर संवासिनियां जिले के भिन्न-भिन्न थानों से अपहरण के मामलों में यहां भेजी गई हैं। स्वाधार गृह की अधीक्षिका गरिमा सिंह, चौकीदार विमलेश, काउंसलर अर्चना मौर्या, प्रशिक्षिका रिचा वर्मा, लिपिक सुनील, चपरासी बिरजा देवी समेत अन्य कुछ स्टाफ पार्ट टाइम कार्य करते हैं लेकिन सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं हैं। स्वाधार गृह के परिसर की उत्तरी बाउंड्रीवाल बेहद छोटी है। यहां रात्रि में पुलिस ड्यूटी भी नहीं लगाई जाती। ऐसे में संवासिनियों की सुरक्षा पर सवाल उठने लाजिमी हैं। जनपद के सभी थानों से अपहरण, घरेलू हिंसा आदि जटिल केस वाली संवासिनियों का दाखिला यहां किया जाता है, लेकिन मानक के अनुरूप सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। वहीं, स्वाधार गृह की संचालिका डॉ. किरण त्रिपाठी ने बताया किया कि गुमशुदा, घरेलू हिंसा की शिकार कई संवासिनियों को अपने स्तर से उनके पता की जानकारी लेकर पुलिस के सहयोग से घर पहुंचाया है। 2012 और 2018 में दो संवासिनियों की शादी भी करवाई जा चुकी है। घरेलू हिंसा से परेशान महिलाओं के परिवार के लोगों को बुलवाकर सुलह समझौते कराए गए। संस्था में सिलाई बुनाई कढ़ाई पेंटिंग सहित अन्य कई ट्रेनिंग संवासिनियों को दी जाती है। कुछ महीने पूर्व दाखिल दो गर्भवती संवासिनियों के बच्चे भी यहीं पैदा हुए थे, जिनका पालन-पोषण की जिम्मेदारियां भी उठाईं।
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