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पर्यावरण बचाने के लिए जीवन शैली बदलें
Updated Sun, 25 Feb 2018 01:12 AM IST
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भदोही। पर्यावरण को बचाने के लिए हर किसी को आगे आना होगा। पर्यावरण से हर व्यक्ति प्रभावित होगा। पर्यावरण संरक्षण के प्रति सकारात्मक विचार के साथ हमें अपने व्यवहार और जीवन शैली में भी बदलाव लाना होगा। शनिवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राजकीय महाविद्यालय में पर्यावरण केंद्रित विचार एवं व्यवहार विषयक सेमिनार के उद्घाटन के मौके पर पर्यावरण विशेषज्ञों ने ये बातें कहीं।
मुख्य अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. सिराजुद्दीन ने कहा कि पर्यावरणीय समस्याएं परिस्थिति जनित भी हैं। उन परिस्थितियों को दूर करने के लिए भी हमें काम करना होगा, ताकि मनुष्य दूसरे संसाधनों का उपयोग करे। वाराणसी की डॉ. अमिता रक्षित ने कहा कि कृषि को इको सेंट्रिक बनाना होगा। किसानों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए। डॉ. वीके त्रिपाठी ने प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग बढ़ाने और आम जन को जागरूक करने पर जोर दिया। डॉ. कमाल अहमद सिद्दीकी ने पर्यावरण संरक्षण की प्राचीन मान्यताओं पर प्रकाश डालते हुए नवीन अन्वेषण पर जोर दिया।
केएनपीजी कालेज ज्ञानपुर की प्राचार्या डॉ. शुभ्रा श्रीवास्तव ने कहा कि मनुष्य अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए पर्यावरण का ध्यान नहीं देता। यह सोच घातक सिद्ध हो सकती है। प्राचार्या डॉ. अजय गोस्वामी ने पर्यावरण प्रदूषण के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला। अध्यक्षता प्रो. दीप्ती भदौरिया ने की। इसमें डॉ. अनराधा सिंह, डॉ. सुमन सिंह, डॉ. पियूष चंद्र मिश्र, डॉ. प्रमोद गुप्ता और डॉ. हरेराम यादव ने भी विचार रखे।
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मुख्य अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. सिराजुद्दीन ने कहा कि पर्यावरणीय समस्याएं परिस्थिति जनित भी हैं। उन परिस्थितियों को दूर करने के लिए भी हमें काम करना होगा, ताकि मनुष्य दूसरे संसाधनों का उपयोग करे। वाराणसी की डॉ. अमिता रक्षित ने कहा कि कृषि को इको सेंट्रिक बनाना होगा। किसानों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए। डॉ. वीके त्रिपाठी ने प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग बढ़ाने और आम जन को जागरूक करने पर जोर दिया। डॉ. कमाल अहमद सिद्दीकी ने पर्यावरण संरक्षण की प्राचीन मान्यताओं पर प्रकाश डालते हुए नवीन अन्वेषण पर जोर दिया।
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केएनपीजी कालेज ज्ञानपुर की प्राचार्या डॉ. शुभ्रा श्रीवास्तव ने कहा कि मनुष्य अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए पर्यावरण का ध्यान नहीं देता। यह सोच घातक सिद्ध हो सकती है। प्राचार्या डॉ. अजय गोस्वामी ने पर्यावरण प्रदूषण के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला। अध्यक्षता प्रो. दीप्ती भदौरिया ने की। इसमें डॉ. अनराधा सिंह, डॉ. सुमन सिंह, डॉ. पियूष चंद्र मिश्र, डॉ. प्रमोद गुप्ता और डॉ. हरेराम यादव ने भी विचार रखे।
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