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नए बीएचटी पर दर्ज होगा एईएसए जेई मरीजों का विवरण
Updated Mon, 18 Sep 2017 01:51 AM IST
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वाराणसी। सरकारी अस्पतालों में आने वाले एईएस और जेई(जापानी इंसेफेलाइटिस) के मरीजों के इलाज को लेकर स्वास्थ्य महकमा सतर्क हो गया है। ऐसे मरीजों के भर्ती को लेकर पहले से चली आ रही बीएचटी(बेड हेड टिकट) को बदलकर नए फार्मेट में लागू किया गया है। इसमें न केवल मरीज का पूरा विवरण मौजूद रहेगा बल्कि संबंधित चिकित्सक को उपचार की पूरी जानकारी भी इस पर दर्ज करनी होगी। हालांकि बनारस और आसपास के जिलों में ऐसे मरीज न के बराबर है बावजूद इसके शासन के इस आदेश पर अमल शुरू हो गया है।
गोरखपुर में जापानी इंसेफेलाइटिस से पीड़ित बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा है। इस तरह की घटना दुबारा न हो इसको लेकर प्रदेश के सभी मंडलीय, जिला अस्पतालों में ऐसे मरीजों के इलाज को लेकर सावधानी बरती जा रही है। अब इस बीमारी से भर्ती मरीजों के लिए जो नया बीएचटी जारी किया जा रहा है, उसमें पहले से अधिक जानकारियां दर्ज करनी होगी, जिससे कि मरीजों की बीमारी, इलाज के बारे में जानकारी मिल सके। निदेशक संक्रामक रोग की ओर से सीएमओ समेत सभी प्रमुख अधीक्षकों को इस आशय का पत्र सितंबर के पहले सप्ताह में ही आ गया था। इधर मंडलीय अस्पताल में प्रमुख अधीक्षक डॉ. बीएन श्रीवास्तव ने सभी संबंधित चिकित्सकों को नया प्रारुप देते हुए इसके हिसाब से उसमें विवरण दर्ज कराने को कहा है। बताया कि हालांकि ऐसा कोई मरीज भर्ती नहीं होता है फिर भी शासन के इस निर्देश के अनुसार कार्रवाई हो रही है।
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गोरखपुर में जापानी इंसेफेलाइटिस से पीड़ित बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा है। इस तरह की घटना दुबारा न हो इसको लेकर प्रदेश के सभी मंडलीय, जिला अस्पतालों में ऐसे मरीजों के इलाज को लेकर सावधानी बरती जा रही है। अब इस बीमारी से भर्ती मरीजों के लिए जो नया बीएचटी जारी किया जा रहा है, उसमें पहले से अधिक जानकारियां दर्ज करनी होगी, जिससे कि मरीजों की बीमारी, इलाज के बारे में जानकारी मिल सके। निदेशक संक्रामक रोग की ओर से सीएमओ समेत सभी प्रमुख अधीक्षकों को इस आशय का पत्र सितंबर के पहले सप्ताह में ही आ गया था। इधर मंडलीय अस्पताल में प्रमुख अधीक्षक डॉ. बीएन श्रीवास्तव ने सभी संबंधित चिकित्सकों को नया प्रारुप देते हुए इसके हिसाब से उसमें विवरण दर्ज कराने को कहा है। बताया कि हालांकि ऐसा कोई मरीज भर्ती नहीं होता है फिर भी शासन के इस निर्देश के अनुसार कार्रवाई हो रही है।
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