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लॉक हुई 8500 डिग्रियां, बाकी के लिए भटकना मजबूरी

Wed, 26 Jan 2022 12:57 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 26 Jan 2022 12:57 AM IST
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8500 degrees locked, compulsion to wander for the rest
वाराणसी। विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों से यूजी, पीजी करने वाले विद्यार्थियों को अब डिग्री लेने के लिए विश्वविद्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। वह एक क्लिक पर अपनी सभी डिग्रियों को ऑनलाइन न केवल देख सकेंगे बल्कि जरूरत पड़ने पर उसे प्रिंट भी करा सकेंगे। यूजीसी के निदेश पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में 8500 डिग्रियों को तो डिजी लॉकर में किसी तरह रखवा दिया गया है, लेकिन बाकी छात्रों को इसका लाभ लेने के लिए भटकना मजबूरी है।
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विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र-छात्राओं को डिग्री के लिए भटकना पड़ता है। समय से डिग्रियां न मिलने के अभाव में कभी कभी छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं का फार्म भी नहीं समय से भर पाते हैं। उनकी इसी समस्याओं को देखते हुए ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने जनवरी के पहले सप्ताह में ही देश भर के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को भेजे पत्र में डिजीलॉकर में रखी डिग्रियाें, अंकपत्रों सहित अन्य दस्तावेजों को वैध प्रमाण पत्रों के रुप में स्वीकार करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रदेश स्तर पर भी प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा ने भी कुलपतियों संग बैठक कर अब तक की कार्रवाई की समीक्षा की।
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काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने बताया कि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ को डीजी लॉकर की मान्यता भी शासन स्तर से मिल चुकी है। यहां पहले चरण में पिछले तीन साल की 8500 डिग्रियां उस लॉकर में डाल दी गई हैं।
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दस साल की छह लाख डिग्रियां बंटने का इंतजार
विद्यापीठ में पिछले दस साल की करीब छह लाख ऐसी डिग्रियां हैं, जो अब तक बांटी नहीं जा सकी है। यहीं कारण है कि छात्रों को इसके लिए भटकना पड़ता है। इस तरह की स्थिति तब है जब विश्वविद्यालयों में हर साल दीक्षांत समारोह भी होते हैं और डिग्रियां तैयार भी कराई जाती हैं। इसमें कहीं न कहीं विश्वविद्यालय प्रशासन की व्यवस्थागत खामियों को भी मुख्य वजह माना जा रहा है। अब जब शासन ने कड़ाई शुरू की है तो इन डिग्रियों को बांटे जाने की तैयारी चल रही है।

संस्कृत विश्वविद्यालय में नहीं शुरू हुई कार्यवाही
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में अब तक डिजी लॉकर में कोई डिग्रियां नहीं रखी जा सकी है। ऐसे में यहां छात्रों को अभी इंतजार करना पड़ेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से वर्ष 2015 से अब तक का डाटा एक संस्था को उपलब्ध करा दिया गया है लेकिन इसकी भाषा संस्कृत होने की वजह से ही इन डिग्रियों को ऑनलाइन अपलोड करने में परेशानी हो रही है। यहीं वजह है कि संस्कृत विश्वविद्यालय की डिग्रियां अब तक डिजीलॉकर में नहीं रखी गई हैं।
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