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भीड़ नियंत्रित करने के लिए रास्ते में रोकनी पड़ीं ट्रेनें
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वाराणसी। 24 घंटे के भीतर वाराणसी के रेलवे स्टेशनों पर छह लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं का आवागमन हुआ, जिससे कई बार फुट ओवर ब्रिज और प्लेटफार्म फुल हो गए। लिहाजा ट्रेनों को स्टेशन से पहले ही दिया गया। साथ ही 16 विशेष ट्रेनें वाराणसी से विभिन्न क्षेत्रों के लिए रवाना की गईं। यात्रियों के बैठने व उतरने के बाद ट्रेनों के संचालन के लिए सीसीटीवी कैमरे की मदद ली गई। अप्रत्याशित भीड़ के चलते यात्रियों, श्रद्धालुओं को अव्यवस्था का शिकार भी होना पड़ा।
आधिकारिक सूत्रों कें अनुसार, अमावस्या को लेकर रेल प्रशासन हाई अलर्ट पर रहा, लेकिन सोमवार रात से मंगलवार शाम तक भीड़ का आंकड़ा अप्रत्याशित रूप से छह लाख के पार पहुंच गया। पूछताछ और टिकट काउंटर सहित यात्री सुविधाओं में विस्तार किया गया था, लेकिन भीड़ के सामने सब नाकाफी रहा। केंद्रीय एनाउंस सिस्टम प्रभावी न होने पर भीड़ वाले स्थान पर पहुंचकर हैंड होल्ड एनाउंसमेंट सिस्टम से जानकारी प्रसारित की गई। मंडुवाडीह में हजारों की भीड़ एकत्रित हो गई, इस पर जिलाधिकारी ने डीआरएम पूर्वोत्तर रेलवे से वार्ता की। इसके बाद एक स्पेशल ट्रेन गोरखपुर कैंट के लिए चलाई गई।
सात दिन तक दिखेगा असर
कुंभ के चलते सभी मेल, एक्सप्रेस ट्रेनों की चाल बिगड़ गई है। जगह-जगह रोके जाने के चलते घंटों देरी से ट्रेनें चल रही थीं। रेल अधिकारियों की मानें तो रेलवे स्टेशनों पर भीड़ दूसरे दिन से कम हो जाएगी, लेकिन इस लेटलतीफी का असर अगले सात दिनों तक ट्रेनों के परिचालन पर पड़ेगा।
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आधिकारिक सूत्रों कें अनुसार, अमावस्या को लेकर रेल प्रशासन हाई अलर्ट पर रहा, लेकिन सोमवार रात से मंगलवार शाम तक भीड़ का आंकड़ा अप्रत्याशित रूप से छह लाख के पार पहुंच गया। पूछताछ और टिकट काउंटर सहित यात्री सुविधाओं में विस्तार किया गया था, लेकिन भीड़ के सामने सब नाकाफी रहा। केंद्रीय एनाउंस सिस्टम प्रभावी न होने पर भीड़ वाले स्थान पर पहुंचकर हैंड होल्ड एनाउंसमेंट सिस्टम से जानकारी प्रसारित की गई। मंडुवाडीह में हजारों की भीड़ एकत्रित हो गई, इस पर जिलाधिकारी ने डीआरएम पूर्वोत्तर रेलवे से वार्ता की। इसके बाद एक स्पेशल ट्रेन गोरखपुर कैंट के लिए चलाई गई।
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सात दिन तक दिखेगा असर
कुंभ के चलते सभी मेल, एक्सप्रेस ट्रेनों की चाल बिगड़ गई है। जगह-जगह रोके जाने के चलते घंटों देरी से ट्रेनें चल रही थीं। रेल अधिकारियों की मानें तो रेलवे स्टेशनों पर भीड़ दूसरे दिन से कम हो जाएगी, लेकिन इस लेटलतीफी का असर अगले सात दिनों तक ट्रेनों के परिचालन पर पड़ेगा।
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