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विवादों के बीच ज्योतिष्पीठ पर आज होगा स्वरूपानंद का अभिषेक
Updated Wed, 29 Nov 2017 02:06 AM IST
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वाराणसी। डिपार्टमेंटल सेक्रेटरी शंभूनाथ चतुर्वेदी की अगुवाई वाला भारत धर्म महामंडल का धड़ा बुधवार को मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के परमहंसी आश्रम पहुंचकर ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के पद पर द्वारिका-शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का अभिषेक करेगा। धर्म महामंडल के कार्यालय में मंगलवार की दोपहर इसकी घोषणा उपाध्यक्ष सत्यनारायण पांडेय ने की।
उन्होंने कहा कि बहुमत से स्वामी स्वरूपानंद को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य बनाने का निर्णय महामंडल की मंत्री सभा ले चुकी है। इसलिए जनरल सेक्रेटरी की ओर से सात दिसंबर को इस मसले पर विचार के लिए बुलाई जाने वाली बैठक औचित्यहीन होगी। उधर, जनरल सेक्रेटरी ने कहा कि इस अभिषेक का कोई मतलब नहीं है। महामंडल की ओर से विधि सम्मत चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
महामंडल के उपाध्यक्ष सत्यनारायण पांडेय और शंभूनाथ चतुर्वेदी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि 1941 में लिए गए निर्णय के अनुसार ज्योतिष्पीठ पर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का अभिषेक गीता जयंती के अवसर पर परमहंसी आश्रम में किया जाएगा। इसमें महामंडल के प्रतिनिधिमंडल के अलावा काशी के विद्वान, संन्यासी, वैदिक आचार्य, विद्यार्थी और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि महाराज हिस्सा लेंगे। मठाम्नाय अनुशासन ग्रंथ में दिए गए विधान के अनुसार एक पीठ पर एक ही शंकराचार्य की नियुक्ति वैध होने के सवाल पर उनका कहना था कि ऐसा कुछ नहीं है। जरूरत पड़ने पर चारों पीठों पर भी एक शंकराचार्य की नियुक्ति की जा सकती है।
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भारत धर्म महामंडल की नियमावली में कहा गया है कि ज्योतिष्पीठ पर ब्रह्मानंद की परंपरा के शिष्य का ही शंकराचार्य के रूप में अभिषेक किया जा सकता है। ऐसे में स्वामी स्वरूपानंद के अलावा कोई भी ब्रह्मानंद की परंपरा का शिष्य मौजूदा समय देश में नहीं है। उन्होंने बताया कि तीनों शंकराचार्यों और काशी के विद्वानों का मार्गदर्शन प्राप्त होने के बाद यह निर्णय लिया गया है। उपाध्यक्ष सत्यनारायण ने बताया कि महामंडल के कुछ पदाधिकारी जानबूझ कर विवाद खड़ा करना चाहते हैं, जबकि स्वरूपानंद के अभिषेक को लेकर कोई विवाद नहीं है।
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उन्होंने कहा कि बहुमत से स्वामी स्वरूपानंद को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य बनाने का निर्णय महामंडल की मंत्री सभा ले चुकी है। इसलिए जनरल सेक्रेटरी की ओर से सात दिसंबर को इस मसले पर विचार के लिए बुलाई जाने वाली बैठक औचित्यहीन होगी। उधर, जनरल सेक्रेटरी ने कहा कि इस अभिषेक का कोई मतलब नहीं है। महामंडल की ओर से विधि सम्मत चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
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महामंडल के उपाध्यक्ष सत्यनारायण पांडेय और शंभूनाथ चतुर्वेदी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि 1941 में लिए गए निर्णय के अनुसार ज्योतिष्पीठ पर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का अभिषेक गीता जयंती के अवसर पर परमहंसी आश्रम में किया जाएगा। इसमें महामंडल के प्रतिनिधिमंडल के अलावा काशी के विद्वान, संन्यासी, वैदिक आचार्य, विद्यार्थी और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि महाराज हिस्सा लेंगे। मठाम्नाय अनुशासन ग्रंथ में दिए गए विधान के अनुसार एक पीठ पर एक ही शंकराचार्य की नियुक्ति वैध होने के सवाल पर उनका कहना था कि ऐसा कुछ नहीं है। जरूरत पड़ने पर चारों पीठों पर भी एक शंकराचार्य की नियुक्ति की जा सकती है।
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भारत धर्म महामंडल की नियमावली में कहा गया है कि ज्योतिष्पीठ पर ब्रह्मानंद की परंपरा के शिष्य का ही शंकराचार्य के रूप में अभिषेक किया जा सकता है। ऐसे में स्वामी स्वरूपानंद के अलावा कोई भी ब्रह्मानंद की परंपरा का शिष्य मौजूदा समय देश में नहीं है। उन्होंने बताया कि तीनों शंकराचार्यों और काशी के विद्वानों का मार्गदर्शन प्राप्त होने के बाद यह निर्णय लिया गया है। उपाध्यक्ष सत्यनारायण ने बताया कि महामंडल के कुछ पदाधिकारी जानबूझ कर विवाद खड़ा करना चाहते हैं, जबकि स्वरूपानंद के अभिषेक को लेकर कोई विवाद नहीं है।