{"_id":"5a021c214f1c1bca678b9eb6","slug":"81510087713-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"...तो इस बार ‘अराजनीतिक’ होंगी प्रथम नागरिक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
...तो इस बार ‘अराजनीतिक’ होंगी प्रथम नागरिक
Updated Wed, 08 Nov 2017 02:22 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। एक दिसंबर को निर्वाचित होने वाली शहर की प्रथम नागरिक राजनीतिक अनुभव के बगैर ही सदन में पहुंचेंगी। भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा ने जिन महिलाओं को महापौर पद का प्रत्याशी बनाया है, राजनीतिक परिवार से ताल्लुक के बावजूद इनमें से किसी भी महिला ने अब तक पार्षद का भी चुनाव नहीं लड़ा है। राजनीतिक अनुभव न होने के कारण माना जा रहा है कि इसमें राजनीतिक इच्छा रखने वालों की भूमिका अहम हो जाएगी
भाजपा की प्रत्याशी मृदु़ुला जायसवाल भाजपा से दो बार सांसद रहे शंकर प्रसाद जायसवाल की बहू हैं। वहीं कांग्रेस की शालिनी यादव भी राज्यसभा के उपसभापति रहे श्यामलाल यादव की पुत्र वधू हैं। मगर इन दोनों में से किसी ने चुनाव नहीं लड़ा है। यही हाल सपा की साधना गुप्ता का है। उनके पति जरूर सपा से जुड़े हैं मगर साधना का राजनीतिक कैरियर नहीं है। बसपा की सुधा चौरसिया यों तो 2009 से पार्टी से जुड़ी हैं लेकिन चुनाव नहीं लड़ी हैं।
इनमें से जो भी महापौर चुनी जाएंगी, उनके लिए सदन में जाने का पहला अवसर होगा। सदन की कार्यवाही से लेकर संचालन आदि का अनुभव नहीं होगा। यही नहीं, महापौर सदन में पहली बार कदम रखेंगी तो मेयर कक्ष से लेकर सदन की जगह भी बदली हुई होगी। दरअसल, इस बार निर्वाचित होने वाली मेयर को पुराना मेयर कक्ष में बैठने को नहीं मिलेगा। दरअसल, नगर निगम प्रेक्षागृह, मेयर कक्ष को तोड़कर जापान सरकार के सहयोग से कंवेंशन सेंटर बनाया जाना है। इसलिए नवनिर्वाचित पार्षदों और मेयर को सांस्कृतिक संकुल जाना पड़ेगा। सदन को यहीं से चलाने की तैयारी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
भाजपा की प्रत्याशी मृदु़ुला जायसवाल भाजपा से दो बार सांसद रहे शंकर प्रसाद जायसवाल की बहू हैं। वहीं कांग्रेस की शालिनी यादव भी राज्यसभा के उपसभापति रहे श्यामलाल यादव की पुत्र वधू हैं। मगर इन दोनों में से किसी ने चुनाव नहीं लड़ा है। यही हाल सपा की साधना गुप्ता का है। उनके पति जरूर सपा से जुड़े हैं मगर साधना का राजनीतिक कैरियर नहीं है। बसपा की सुधा चौरसिया यों तो 2009 से पार्टी से जुड़ी हैं लेकिन चुनाव नहीं लड़ी हैं।
विज्ञापन
इनमें से जो भी महापौर चुनी जाएंगी, उनके लिए सदन में जाने का पहला अवसर होगा। सदन की कार्यवाही से लेकर संचालन आदि का अनुभव नहीं होगा। यही नहीं, महापौर सदन में पहली बार कदम रखेंगी तो मेयर कक्ष से लेकर सदन की जगह भी बदली हुई होगी। दरअसल, इस बार निर्वाचित होने वाली मेयर को पुराना मेयर कक्ष में बैठने को नहीं मिलेगा। दरअसल, नगर निगम प्रेक्षागृह, मेयर कक्ष को तोड़कर जापान सरकार के सहयोग से कंवेंशन सेंटर बनाया जाना है। इसलिए नवनिर्वाचित पार्षदों और मेयर को सांस्कृतिक संकुल जाना पड़ेगा। सदन को यहीं से चलाने की तैयारी है।
विज्ञापन